पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

राहत:जुलाई माह में मात्र 65 एमएम बारिश होने के कारण अबतक मात्र 12% ही हुई धान की रोपाई

शेखपुरा12 दिन पहले
  • कॉपी लिंक
धान की रोपनी करते किसान। - Dainik Bhaskar
धान की रोपनी करते किसान।
  • बारिश शुरू होते ही किसानों के चेहरे खिले, मंगलवार व बुधवार को हुई बारिश के बाद किसान खेतों में रोपनी के लिए पहुंचे

बारिश शुरू होते ही किसानों के चेहरे खिल उठे हैं। मंगलवार और बुधवार को भी हुई बारिश के बाद से जिले के किसान युद्ध स्तर पर खेतों में कूद पड़े। जिले के लगभग हर क्षेत्रों में धान की रोपनी शुरू हुई है। लेकिन जुलाई में एक पखवारे से पर्याप्त बारिश नहीं होने से जिले के ज्यादातर किसान किसान बिचड़ा तैयार होने के बावजूद भी सिंचाई के अभाव में रोपनी कार्य नहीं शुरू कर पाए थे। लेकिन बारिश शुरू होते ही खेतों में रोपनी शुरू हो चुकी है। हालांकि मई एवं जून महीने पर्याप्त बारिश होने के के कारण किसानों के द्वारा खेतों की जुताई कर चुके थे।

कृषि विभाग की माने जुलाई तक जिले में लगभग 260 एमएम बारिश होनी थी लेकिन अब तक मात्र 65 एमएम ही बारिश ही सकी है। वहीं, जिले लगभग 30 प्रतिशत से अधिक रोपनी का कार्य भी हो जाना चाहिए था। बारिश के अभाव में रोपनी का कार्य हल्की प्रभावित रहा। जिसके चलते अब तक मात्र 12 प्रतिशत ही धान की रोपनी हुई है। जिला कृषि पदाधिकारी शिवदत्त सिन्हा ने बताया कि गत दिनों बारिश नहीं होने के कारण जिले में रोपनी का कार्य प्रभावित हुआ है। उन्होंने कहा कि बारिश के कारण धान की रोपनी थोड़ा पिछड़ा गया है। पानी का काफी दिनों से इंतजार करना पड़ा जो बिचड़ा बड़ा हो गया है, तो उसे काटकर रोपनी किया जा सकता है। साथ ही उन्होंने कहा कि पिछले दो दिनों से जिले के विभिन्न क्षेत्रों में अच्छी बारिश हो रही है। जिसके कारण किसान युद्ध स्तर पर धान की रोपाई का कार्य शुरू जार दिया है।

2700 हेक्टेयर में अब तक किसान कर चुके रोपनी
अभी जिले में 23 हजार हेक्टेयर भूमि में धान की रोपनी का लक्ष्य निर्धारित है। लेकिन अब तक मात्र 2700 हेक्टेयर भूमि में धान की रोपनी हुई है। वहीं, बारिश के बाद रोपनी में काफी तेजी आने की उम्मीद है। अचानक खेतों के तैयार होने के से रोपनी की डिमांड बढ़ जाएगी। बाहर से आए कुछ रोपनीहार कुछ दिन पूर्व बारिश नहीं होने से वापस लौट गए है। वहीं इस कोरोना काल में रोपनीहार को लेकर किसानों की थोड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

रोपनी के लिए अन्य जिलों से पहुंचे हैं मजदूर
जिले में धान की रोपनी के लिए बिहार के कई जिलों से मजदूर जिला के विभिन्न गांवों में प्रतिवर्ष पहुंचते हैं। इन मजदूरों में महिलाएं भी शामिल होती हैं। अभी भी जिले के विभिन्न गांव में गया, सासाराम, हाजीपुर, सीतामढ़ी, मोतिहारी, मुजफ्फरपुर, समस्तीपुर सहित अन्य जिलों से पुरुष रोपनहार धान की रोपनी के लिए पहुंचते हैं। लेकिन इस वर्ष कोरोना काल के कारण किसानों को थोड़ी परेशानी हो रही है। वही जिले में धान रोपाई करने के लिए मजदूर की काफी समस्या हो रही है। किसान एक गांव से दूसरे गांव में जाकर धान रोपने के लिए मजदूर की खोज कर रहे हैं।

260 मिमी बारिश की अब तक थी जरुरत
जिले में अब तक जुलाई माह में मात्र 65 मिलीमीटर ही बारिश हो पाई है। जबकि अब तक 260 मिलीमीटर तक बारिश हो जानी चाहिए थी। वहीं, 20 जुलाई जिले में औसतन 35 मिलीमीटर बारिश हुई है। कम बारिश के कारण जिले में वर्षा आधारित स्थानों पर धान की खेती पिछड़ी हुई है। खेत की रोपनी के लिए किसान जद्दोजहद कर रहे हैं। साधन संपन्न किसान डीजल पंप और मोटर पंप के सहारे अपने खेतों की रोपाई कर पाए हैं जबकि छोटे किसान अच्छी बारिश की आस में बैठे हैं।

खबरें और भी हैं...