दीपोत्सव के बाद छठ पर्व की तैयारी शुरू:छठ पर्व का चार दिवसीय अनुष्ठान सोमवार को नहाय-खाय से शुरू होगा

शेखपुरा21 दिन पहले
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लोक आस्था के पर्व छठ के लिए चूल्हे बनाती महिला। - Dainik Bhaskar
लोक आस्था के पर्व छठ के लिए चूल्हे बनाती महिला।
  • जिले के बाजारों में केले और नारियल की खेप आई, 9 को खरना, अस्ताचलगामी सूर्य को 10 और 11 को उदयगामी सूर्य को दिया जाएगा अर्घ्य

जिले में दीपोत्सव की समाप्ति के बाद लोगों ने छठ पूजा की तैयारी शुरू कर दी है। छठ पर्व का चार दिवसीय अनुष्ठान सोमवार को नहाय-खाय के साथ शुरू होगा। मंगलवार को व्रती खरना का अनुष्ठान करेंगी। बुधवार को अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा। गुरुवार को उदयगामी सूर्य को अर्घ्य देने के साथ पर्व का चार दिवसीय अनुष्ठान संपन्न होगा। अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य 5:27 मिनट पर, तो उदयगामी सूर्य को सुबह 6:34 मिनट पर अर्घ्य देने का मुहूर्त है। इधर, घाटों की साफ-सफाई का कार्य अंतिम चरण में है। पूजा-समितियों द्वारा घाटों पर लाइटिंग आदि का कार्य शुरू कर दिया गया है।

पंडित बालाकांत पांडेय ने बताया कि सूर्यषष्ठी व्रत श्रद्धा व विश्वास के साथ करने से मनुष्य के ज्ञाताज्ञात समस्त पापों का नाश होता है और मनोवांछित फलों की प्राप्ति भी। पूजा में ईंख, अदरख, मूली, हल्दी, सुथनी, अरवी, नींबू, बोड़ी, नारियल, सिंघाड़ा, केला, साठी चावल, गुड़, पान, लौंग, इलायची, सुपारी सहित औषधियों एवं विभिन्न प्रकार के ऋतुफल का उपयोग अर्घ्य के रूप में दिया जाएगा। सत्व, रज व तम तीनों गुण छठी माता के नियंत्रण में करते हैं काम छठ माता की पूजा सूर्यषष्ठी व्रत के रूप में की जाती है। यह शक्ति रूपा मानी जाती है। इनकी पूजा पौराणिक काल से चली आ रही। जिसका निर्देश लौकिक छठव्रत की कथा, मान्यता एवं महिलाओं द्वारा गाए जाने वाले गीतों में मिलता है और यह प्रत्यक्ष भी है। सत्व, रज, तम ये तीनों ही गुण छठी माता के नियंत्रण में काम करते हैं, जो सृष्टि के संचालक एवं संवर्द्धक हैं।

सूर्य की पूजा भारत में ही नहीं, बल्कि पूरे विश्व में है व्याप्त
भगवान सूर्य प्रत्यक्ष देवता माने जाते हैं। इनकी पूजा की परंपरा बहुत पहले से भारत में ही नहीं बल्कि विश्व में व्याप्त है। क्योंकि, सूर्य के प्रकाश से ही चंद्र भी प्रकाशित होते हैं एवं तारे भी चमकते हैं, जो अनेक ग्रह, नक्षत्र के रूप में माने जाते हैं। भगवान सूर्य के कारण ही दिन एवं रात का वर्गीकरण संभव हो पाता है। प्राचार्य ने बताया कि सूर्योपासना से आयु, विद्या, बुद्धि, बल, तेज एवं मुक्ति की प्राप्ति होती है।

मंगलगीत गाकर मिट्टी के चूल्हे बना रहीं छठव्रती

शेखाेपुरसराय | छठव्रतियों ने मिट्टी के चूल्हे बनाकर छठ पूजा की तैयारी आरंभ कर दी है। इस दौरान छठ माता के मंगल गीत भी गाये गये। छठ पर्व के दौरान मिट्टी के चूल्हे पर ही खरना का प्रसाद बनाया जाता है। जिसमें मिट्टी की हांडी का ही इस्तेमाल किया जाता है। हालांकि आधुनिक युग मे मिट्टी की हांडी के स्थान पर पीतल के बर्तन इस्तेमाल किये जाने लगे है।

लेकिन मिट्टी की हांडी का स्थान कोई बर्तन नहीं ले सकता। क्योंकि मिट्टी की हांड़ी में बने खरना के प्रसाद में मिट्टी की सोंधी खुश्बू आती है। शेखोपुरसराय प्रखंड क्षेत्र के नीमी गांव स्थित आदित्य नारायण के पंचार्ग मंदिर के समीप बने छठ घाट पर बड़ी संख्या में छठव्रतियों ने मिट्टी के चूल्हे बनाना आरम्भ कर दिया है।
नीमी के सूर्यनारायण मंदिर में उमड़ते हैं व्रती
नीमी में बने सूर्यनारायण मन्दिर में हजारों छठव्रती भगवान भास्कर को अर्घ्य देती हैं। छठ घाट की सफाई व सजावट को लेकर नगर पंचायत ने पहल शरू की है। नगर पंचायत पदाधिकारी विजय कुमार ने बताया कि छठ पूजा को लेकर घाट का निरीक्षण किया जा चुका है।

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