धर्म-आस्था:डोली पर माता का आगमन, गजवाहन पर विदा

शेखपुरा2 महीने पहले
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  • शुभकारी होगी मां की विदाई, अच्छी बारिश की संभावना, शांति और खुशहाली आएगी

शारदीय नवरात्र 7-15 अक्टूबर तक होगा। इसमें 7 अक्टूबर को कलश स्थापना व 15 अक्टूबर को विजयदशमी मनाई जाएगी। नवरात्र माता की आराधना का कल्प समय है। इसलिए उनका आगमन व विदाई मानव समाज के लिए काफी मायने रखती है। इस नवरात्र में माता का आगमन डोली पर हो रहा है। जो समाज के लिए शुभकारी नहीं है। इसमें महामारी व मारकाट की स्थिति बनी रहने की संभावना रहेगी। जबकि माता की विदाई गजवाहन पर हो रही है। यह शुभकारी है। हर ओर शांति व खुशहाली आएगी। अच्छी बारिश होने की भी संभावना है। बताया जाता है कि नवरात्र की पूजा को लेकर मंदिर व पूजा पंडालों में माता की प्रतिमा के लिए मिट्टी चढ़ा दी गई है। मिट्टी व पुआल से माता की प्रतिमा पूरी तरह से तैयार कर लिया गया है। जिसे सूखने के बाद छठे पूजा के दिन प्रतिमा को रंगने का काम किया जाएगा।

अच्छी बारिश होने से अनाज से घर भरे रहेंगे | शारदीय नवरात्र में माता की गजवाहन पर विदाई समाज के लिए शुभकारी होगी। इससे घरों में सुख-समृद्धि व वर्षा होने से अनाज से घर भरे रहेंगे। वहीं डोली पर माता का आगमन शुभ नहीं है। 7 अक्टूबर को कलश स्थापना व 14 को शांति हवन होगा। आचार्य बालकांत पांडेय

12 अक्टूबर को सूर्योदय के साथ ही नव पत्रिका प्रवेश होगा। वहीं, माता के नेत्रदान को लेकर चार शुभ मुहूर्त है। जिसमें नेत्रदान को लेकर सुबह 7-9 बजे, 9:15-11:45 बजे, दोपहर बाद 1-3 बजे व शाम को 5-7 बजे तक मुहूर्त रहेगा।
शारदीय नवरात्र का 7 से 15 अक्टूबर तक दिवसवार पूजा विवरण

  • 7 अक्टूबर : गुरुवार कलश स्थापना, शैलपुत्री स्वरूप की पूजा
  • 8 अक्टूबर : शुक्रवार माता के दूसरे रूप ब्रह्मचारिणी की पूजा
  • 9 अक्टूबर : शनिवार माता के तीसरे रूप चंद्रघंटा की पूजा
  • 10 अक्टूबर : रविवार माता के चौथे रूप कुष्मांडा की पूजा
  • 11 अक्टूबर : सोमवार माता के पांचवे रूप स्कंदमाता व छठे रूप कात्यायनी की पूजा, बेल निमंत्रण
  • 12 अक्टूबर : मंगलवार नवपत्रिका प्रवेश, नेत्रदान, माता कालरात्रि की पूजा
  • 13 अक्टूबर : बुधवार माता महागौरी की पूजा, अष्टमी उपवास, निशा रात्रि पूजा
  • 14 अक्टूबर : गुरुवार महानवमी व्रत, माता सिद्धिदात्री की पूजा, अष्टमी पारण, शांति हवन
  • 15 अक्टूबर : शुक्रवार विजया दशमी, अपराजिता पूजा, प्रतिमा विसर्जन
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