• Hindi News
  • Local
  • Bihar
  • Patna
  • Shekhapura
  • Navratri Special; Even Today There Is A Tradition Of Solah Kahar In Sheikhpura, A Two ton Statue Is Carried On The Shoulder And The Circumambulation Of The City Is Done.

आस्था:नवरात्र विशेष; आज भी शेखपुरा में सोलह कहार की परंपरा है बरकरार दो टन की प्रतिमा को कंधे पर उठाकर कराई जाती है शहर की परिक्रमा

शेखपुरा20 दिन पहले
  • कॉपी लिंक
  • कई दशकों से शेखपुरा में चली आ रही है परंपरा, लेकिन इस बार कोरोना के कारण सादगी से मनाया जाएगा त्योहार

दशहरा त्यौहार को बंगाल का नकल माना जाता है। शेखपुरा की दुर्गा पूजा पर आधुनिकता की लेप काफी वर्षों से चढ़ी हुई है। प्रतिमा निर्माण से लेकर पंडाल बनाने तथा सजावट में कई आधुनिकता आ गई है, मगर जिले में दशहरा त्यौहार पर सोलह कहार की परंपरा सैकड़ो वर्षो से लेकर आज तक बरकरार हैं। मां दुर्गा की प्रतिमा के विसर्जन जुलूस में यहां सोलह कहार की परंपरा निभाई जाती है। शेखपुरा में दुर्गा की बड़ी प्रतिमाएं बनाई जाती है। जिसमें दस फीट की मां दुर्गा की विशाल प्रतिमा के साथ शेर, महिषासुर सहित अन्य देवी-देवताओं में गणेश, कार्तिक, लक्ष्मी तथा सरस्वती की प्रतिमाएं स्थापित की जाती है।

इन सभी प्रतिमाओं का वजन दो टन के करीब हो जाता है। शेखपुरा में प्रतिमाओं के विसर्जन के पिछले सौ से अधिक वर्षो से चली आ रही सोलह कहार की इस परंपरा के तहत लोग दो टन की पूरी प्रतिमा को कंधे पर उठाकर सारे शहर का परिक्रमा करते हैं। शेखपुरा शहर में दुर्गा पूजा का विसर्जन जुलूस को लगभग छह किमी की दूरी तय करनी पड़ती है। शहर की सभी प्रतिमाएं गिरीहिन्डा के खीरी पोखर में विसर्जित जी जाती है। हालांकि इस बार सादे समारोह में प्रतिमा को स्थापित की जाएंगी।

दो टन भारी मां दुर्गा की प्रतिमा को उठा सोलह कहार करते हैं नदी में विसर्जन

सोलह कहार की इस पौराणिक परंपरा के तहत लोग कंधे पर दो टन भारी प्रतिमा को उठाकर छह किमी की पैदल यात्रा करके खीरी पोखर में उसका विसर्जन करते हैं। इस परंपरा को लेकर दुर्गा पूजा समिति के अध्यक्ष अनिल कुमार वर्मा कहते हैं कि प्रतिमा विसर्जन में सोलह कहार की यह परंपरा बेटी की विदाई के भावनात्मक संबंध से जुटा हुआ है। जिस तरह नैहर से बेटी की विदाई में घर के लोग पालकी को कंधा देते हैं वहीं, भावनात्मक रिश्ता दिखाने के लिए विसर्जन जुलूस में दुर्गा की प्रतिमाओं को सोलह कहार उठाकर समूचे शहर का भ्रमण करते हैं। उन्होंने कहा कि अब प्रतिमा उठाने वाले कहारों को खोजने में समस्या झेलनी पड़ती है, फलत: पूजा समितियां प्रतिमा विसर्जन को ट्रैक्टर का सहारा लेने लगे हैं।

1953 से कमिश्नरी बाजार में स्थापित हो रही है सोनरवा दुर्गा

शेखपुरा में स्वर्णकार मां दुर्गा की प्रतिमा करीब 300 वर्षों से स्थापित हो रही है। परंतु कमिश्नर बाजार में यह सन् 1953 से लगातार स्थापित होते आ रही है। इसके पहले इनकी स्थापना माहुरी टोला एवं बनिया टोला में हुई थी, परंतु उसके बाद कमिश्नरी बाजार के पन्नालाल सर्राफ ने अपनी जमीन प्रतिमा की स्थापना के लिए दी, तब से आज तक ये प्रतिमा यहां स्थापित हो रही हैं। इस दौरान पन्नालाल स्वर्णकार के साथ मिलकर लक्ष्मण वर्मा, जगदीश शर्राफ, लखनलाल, ज्वाला प्रसाद वर्मा सहित अन्य ने कमिश्नरी बाजार में बड़ी दुर्गा जी को स्थापित करने की शुरुआत की जो कि आज भी जारी है।

खबरें और भी हैं...