सावन की साेमवारी / 6 जुलाई से शुरू हाेकर 3 अगस्त को समाप्त हाेगा सावन

Sawan will start from July 6 and end on August 3
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Sawan will start from July 6 and end on August 3

  • इस बार होगीे पांच सोमवारी, यह शुभ संकेत, कोरोना काल में दर्शन करने में बरतनी होगी सावधानी

दैनिक भास्कर

Jul 01, 2020, 04:00 AM IST

शेखपुरा. इस बार सावन की शुरुआत 6 जुलाई से होगी। इसी दिन सोमवार है। इस माह में कुल 5 सोमवारी पड़ेंगे। 3 अगस्त को आखिरी सोमवारी होगी। लंबे अरसे बाद इस साल सावन के पांच सोमवार होंगे। यह भगवान शिव की पूजा- पाठ के हिसाब से शुभ संकेत देने वाले हैं। इससे एक दिन पहले 5 जुलाई को गुरु पूर्णिमा है। लेकिन गुरु और शिष्य की इस पौराणिक परंपरा के निर्वहन और मिलन में इस बार कोरोना आड़े आएगा। इस बार जिला प्रशासन की गाइडलाइन के अनुसार कहीं पर भी भीड़ नहीं करनी है। ऐसे में यह आयोजन ऑनलाइन होंगे अथवा गुरु पूजन घरों में मूर्ति रखकर या फिर ऑनलाइन पूजा पाठ के माध्यम से होगा।
गिरिहिंडा पहाड़ पर अवस्थित शिव-पार्वती मंदिर है ऐतिहासिक
शेखपुरा के 200 फिट ऊपर गिरिहिंडा पहाड़ पर अवस्थित शिव-पार्वती मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है और बाबा के दर्शन के लिए शेखपुरा के अलावे नवादा, नालंदा, लखीसराय, जमुई आदि जिलों से श्रद्धालु पहुंचकर भोले बाबा की पूजा -अर्चना करते हैं। इस दौरान हज़ारों लोगों की भीड़ उमड़ी रहती है। लेकिन इस बार कोरोना के बढ़ते प्रकोप के कारण बाबा के दर्शन के लिए भीड़ नहीं उमड़ेगी।  

अब शादी के लिए 4 महीने 25 दिन तक करना होगा इंतजार
ज्योतिष के जानकारों के अनुसार 27 जून को 7 रेखा का सावा होगा। तत्पश्चात 29 जून को सुनम का अबूझ मुहूर्त रहेगा, इस दिन सावों की धूम रहेगी। वहीं, 30 जून को 9 रेखा का सावा रहेगा। वहीं 1 जुलाई से देवशयन करेंगे और चातुर्मास आरंभ होंगे। वहीं, 25 नवंबर को देव प्रबोधिनी एकादशी के साथ सावे फिर से शुरू होंगे। 

लेकिन 30 जून से 25 नवंबर के बीच सावे नहीं होंगे और 4 महीने 25 दिन लोगों को फिर शादी ब्याह के लिए इंतजार करना पड़ेगा। इसके बाद 25 नवंबर को 8 रेखा, 30 नवंबर को 8 रेखा का देव दीपावली का सावा होगा। वहीं 1 दिसंबर को 7 रेखा और 7 दिसंबर को भी 7 रेखा और 9 दिसंबर को 8 रेखा के सावे का शुभ मुहूर्त होगा।

सावन माह में भगवान शिव की पूजा का है विशेष महत्व
ज्योतिषाचार्य के अनुसार भगवान शिव की पूजा-पाठ का महत्व सावन के महीने में विशेष होता है। खासतौर से कुंवारी कन्याओं और विवाहिताओं के लिए। वहीं इस बार यह अनूठा संयोग सोमवार को शुरू होकर सोमवार को ही संपन्न हो रहा है। इसलिए भी इसका अलग महत्व माना जा रहा है। इस बार चातुर्मास पांच महीने के होंगे, यानी कि साधु-संतों के प्रवचन अथवा उनके दर्शन का लाभ भक्तों को 5 महीने तक हो सकेगा।

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