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आमने-सामने:कोरोना काल में विस चुनाव हो सकता है तो दुर्गापूजा क्यों नहीं

शेखपुरा8 महीने पहले
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नवरात्र 17 अक्टूबर से शुरू हो रहे हैं। माता दुर्गा के प्रतिमाओं का बनाने का काम जोरों पर है। जबकि अब रंग रोगन का कार्य भी शुरू होगा। कोरोना संक्रमण के कारण अनलाॅक 5 के कारण नवरात्रि में ऐसा पहली बार होगा जहां पंडाल नही बनाए जाएंगे। सार्वजनिक रूप से साउंड सिस्टम नही लगाए जाएंगे। मेला सा नजारा नही देखने को मिलेगा। गृहमंत्रालय भी इसके लिए गाईड लाइन जारी कर चुका है। जिसके अनुसार किसी भी प्रकार के मेले की अनुमति नही होगी।जिसको लेकर पूजा समितियों में आक्रोश देखा जा रहा है।

इस बाबत कई पूजा समितियों ने दैनिक भास्कर को बताया कि जब कोरोना काल में चुनाव हो सकती है तो दुर्गा पूजा क्यों नहीं हो सकता है। पूजा समितियों ने साफ़ तौर पर कहा कि यदि जिला प्रशासन दबाब बनाया तो इस बार वोट बहिष्कार करेंगे। वोट बहिष्कार करने को लेकर कई पूजा समितियों ने मंदिर परिसर में पेपर चिपका कर कहा है कि दुर्गा पूजा नहीं तो वोट नहीं? फिलहाल 25 अक्टूबर को प्रतिमा विसर्जन कराए जाने पर पूजा समितियों के साथ-साथ हिन्दू धर्मालंबियों ने सरकार के इस फैसले पर लगातार आक्रोश जाता है।

आस्था के साथ प्रशासन को किसी तरह का नहीं करने दिया जाएगा खिलवाड़ : पूजा समिति के लोगों ने कहा कि माता दुर्गा के प्रति जिले वासियों की प्रगाढ़ आस्था है। आस्था के साथ प्रशासन को किसी तरह का खिलवाड़ नहीं करने दिया जाएगा। परंपरा के अनुसार विजयादशमी के दिन सुबह कलश विसर्जन होता है, उसके पश्चात मां की गोदभराई (खोईचा) और अपराजिता पूजा होती है, तत्पश्चात शाम में आरती के बाद प्रतिमा विसर्जन के लिए स्थान छोड़ती है।

लोगों ने इस बार विधानसभा चुनाव में वोट बहिष्कार की धमकी दी

पूजा समिति के सदस्य यह कहते हुए दिखे कि अगर प्रशासन जबरन 25 को प्रतिमा विसर्जन का दबाव बनाएगा तो वे लोग चुनाव का बहिष्कार करेंगे। पूजा समिति के सदस्य ने कहा कि आजादी से अब तक का इतिहास हैं कि ऐसा कभी नहीं हुआ कि नवमी के दिन ही बड़ी मां दुर्गा का विसर्जन हुआ हो। जब तक दशमी के दिन गोदी नहीं दी जाती है, माता की प्रतिमा का विसर्जन नहीं किया जाता है। यह शेखपुरा के साथ पूरे बिहार की जनता के साथ घोर अन्याय हैं।

दशमी के दिन खोईंचा व मंदिर में प्रसाद लेने को लगा रहता है तांता
दशमी के दिन खोइचा (गोदभराई) का विशेष महत्व है। मान्यता है कि उक्त तिथि को जो भी नि:संतान महिलाएं मां दुर्गा के चौखट पर आती है, वैसी महिला को मंदिर के पुजारी द्वारा महिला के खोईचा में माता का प्रसाद देते हैं और उक्त महिला संतान सुख प्राप्त करती है। विजयादशमी के दिन ऐसी नि:संतान महिलाओं का तांता मंदिर में प्रसाद पाने के लिए लगा रहता है।

गृह मंत्रालय के गाइडलाइन का सख्ती से किया जाएगा पालन
डीएम इनायत खान ने बताया कि दशहरा को लेकर गृहमंत्रालय ने जो गाइडलाइन जारी किया है। उसका सख्ती से पालन कराया जाएगा। कोविड के कारण नवरात्रि में किसी भी प्रकार का सार्वजनिक आयोजन नही होगा। 25 अक्टूबर काे सभी प्रतिमा का विसर्जन करना हाेगा। सार्वजनिक उद्घोषणा प्रणाली का उपयोग नहीं होगा। आदेश का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सुसंगत धाराओं से कार्रवाई की जाएगी।

नवरात्रि को लेकर गाइडलाइंस

नवरात्रि के दौरान चुनाव आचार संहिता का पूर्ण रूप से पालन हो {नवरात्रि के लिए कोई तोरण द्वार या गेट नहीं बनाए जाएंगे -जिस जगह पर मूर्तियां रखी गयी है, उस जगह को छोड़कर शेष भाग खुला छोड़ना है {किसी प्रकार का मेला का आयोजन नहीं किया जाएगा {सामुदायिक भोज या प्रसाद का वितरण नहीं होगा {पूजा स्थल के पास किसी भी प्रकार के खाद्य पदार्थ की दुकानें नहीं लगेगी {सार्वजनिक उद्घोषणा प्रणाली का उपयोग नहीं होगा {विसर्जन से संबंधित कोई जुलूस नहीं निकाला जाएगा। {हर हाल में विसर्जन 25 अक्टूबर के दिन हो जाना चाहिए {न आमंत्रण पत्र बांटा जाएगा, न हीं मंडप के उद्घाटन के लिए कोई समारोह का आयोजन होगा।

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