सख्ती बढ़ी:खेतों में पराली जलाने वालों पर अब सेटेलाइट से रखी जा रही है पैनी नजर

शेखपुराएक महीने पहले
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खेतों में जले धान की फसल के अवशेष। - Dainik Bhaskar
खेतों में जले धान की फसल के अवशेष।
  • जांच के बाद जिले के 12 किसानों का निबंधन किया गया रद्द, 6 अन्य की हो रही जांच‎, धरती और आकाश से लगातार की जा रही निगरानी

पराली जलाने की घटनाओं पर स्थानीय प्रशासन भले ही आंख मूंद ले, लेकिन सैटेलाइट की पैनी नजर से बचना नामुमकिन है। धान की कटाई शुरू होते ही कृषि विभाग अलर्ट हो गया है। राज्य मुख्यालय जिले के हर कोने की निगरानी में जुटा है। कंट्रोल रूम ने जिला मुख्यालय को पराली जलने के चित्र और लोकेशन भेजने शुरू कर दिए हैं। इसके बाद की कार्रवाई आपके‎ लिए नुकसानदेह साबित हो सकता‎ है। मुकदमा के मामले में भले ही‎ सरकार ने नरमी का संकेत दे दिया‎ है, लेकिन किसी भी प्रकार के लाभ‎ से तीन साल तक के लिए आप‎ वंचित कर दिए जाएंगे।इसमें 12 किसान का कृषि विभाग‎ ने निबंधन रद्द कर दिया है, जबकि‎ अन्य 6 किसान की जांच चल रही है।‎ इसके साथ ही जिला कृषि‎ पदाधिकारी शिवदत्त सिन्हा ने‎ कृषि निदेशक को अग्रेतर कार्रवाई‎ के लिए पत्र प्रेषित किया है। डीएओ‎ ने बताया कि सेटेलाइट के मैसेज‎ के आधार पर पराली जलाने के आरोप में एक दर्जन किसानों का‎ निबंधन रद्द करते हुए अग्रेतर‎ कार्रवाई के लिए कृषि निदेशक को‎ पत्र प्रेषित किया गया है। 6 अन्य‎ मैसेज के सत्यापन के लिए जांच‎ की जा रही है। पराली जलने की घटनाओं पर अंतरिक्ष में मौजूद सेटेलाइट से नजर तो रखी ही जा रही है। स्थानीय स्तर पर कृषि विभाग, कर्मचारी, पुलिस विभाग समेत ग्राम पंचायतों को जिम्मेदारी सौंपी गई है।

पराली जलाने वाले किसानों के खिलाफ सख्ती के प्रावधान
दो एकड़ तक फसल अवशेष जलाने वालों से ढाई हजार रुपये जुर्माना वसूलने का प्रावधान है। पांच एकड़ तक पांच हजार रुपये व पांच एकड़ से अधिक क्षेत्रफल में पराली जलाने पर दोषी व्यक्ति से 15 हजार रुपये जुर्माना वसूला जा सकता है। दोबारा पकड़े जाने पर संबंधित किसान को कृषि विभाग की योजनाओं के लाभ से हाथ धोना पड़ेगा। कर्मचारी सेटेलाइट से प्राप्त केस का सत्यापन कर कार्रवाई कर रहे हैं।

पराली जलाने से होता है नुकसान
पराली जलाने से राख पैदा होता है और उस जगह के सूक्ष्म जीवों का नाश हो जाता है। इससे फसलों की पैदावार कम हो जाती है और मिट्टी की गुणवत्ता प्रभावित होती है। हवा में उपस्थित धुएं से आंखों में जलन और सांस लेने में दिक्कत होती है। प्रदूषित कणों की वजह से अस्थमा और खांसी जैसी बीमारियों को बढ़ावा मिलता है। इसके अलावा निमोनिया और दिल की बीमारी जैसे रोग भी बढ़ रहे हैं। जिला कृषि पदाधिकारी शिवदत्त सिन्हा ने बताया कि पराली न जले इसके लिए भूमि मालिकों को एसएमएस (सुपर एक्स्ट्रा मैनेजमेंट सिस्टम) लगाने के निर्देश दिए गए हैं। इससे फसल अवशेष के छोटे टुकड़े हो जाते हैं। इसके अलावा पराली जलने की घटनाओं की मॉनिटरिंग सेटेलाइट से भी की जा रही है। कृषि विभाग व कर्मचारी पूरी तरह अलर्ट हैं। जो भी व्यक्ति पराली जलाते हुए पकड़ा जाएगा। उसके खिलाफ कार्रवाई होगी। साथ ही कहा कि फसलों के अवशेष को जलाने से पर्यावरण पर प्रतिकूल असर पड़ता है।

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