परेशानी:कम उम्र में बन रहे हृदय रोग का शिकार, 50 साल से ऊपर के 20 तो 40 से ऊपर के 10 प्रतिशत पीड़ित

शेखपुरा2 महीने पहले
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ईसीजी कर रहे कर्मी। - Dainik Bhaskar
ईसीजी कर रहे कर्मी।
  • वर्ल्ड हार्ट डे अनियमित जीवन शैली के कारण लोग स्वस्थ जीवन जीने के तरीके भूल रहे, लाइफस्टाइल में सुधार की जरूरत

सिटी रिपोर्टर। बिहारशरीफ आज विश्व हृदय दिवस है। खान-पान और जीवन शैली में सुधार करने के लिए संकल्प लेने का दिन है। बदलते परिवेश और अनियमित जीवन शैली के कारण लोग अपना स्वस्थ जीवन जीने के तरीके भी भुलते जा रहे हैं। नतीजा है कि हृदय रोग से संबंधित समस्याएं भी बढ़ती जा रही है। पहले सामान्य तौर पर 50 साल से ज्यादा उम्र वालों में हृदय रोग से संबंधित समस्याएं देखने को मिलता था। लेकिन आज 25 साल से उपर के लोग भी इसका शिकार हो रहे हैं। कम उम्र में भी ह्रदय सम्बन्धी शिकायतों का बढ़ना चिन्ता का विषय है।

हृदय रोग से संबंधित मिलने वाले मरीजों एवं कारण जानने के लिए दैनिक भास्कर की टीम ने सरकारी एवं निजी अस्पताल से जानकारी ली। विशेषज्ञ चिकित्सकों से बात की। चिकित्सकों से बात करने के दौरान सबसे बड़ा कारण तनाव एवं अनियमित जीवन शैली सामने आई। सदर अस्पताल के डीएस डॉ. सुजीत कुमार अकेला ने बताया कि सदर अस्पताल में हार्ट के डॉक्टर नहीं हैं। इसके बावजूद महीने में 4-5 मरीज आ ही जाते हैं।
प्राथमिक उपचार के बाद किया जाता विम्स रेफर
उन्होंने बताया कि सदर अस्पताल में जनवरी से लेकर 28 सितम्बर तक 1226 लोगोें की ईसीजी की गयी है। जिसमें करीब 30-35 मरीज हृदय रोग से पीड़ित पाए गए हैं। इन लोगों को प्राथमिक उपचार करने के बाद विम्स रेफर कर दिया जाता है। उन्होंने बताया कि जीवन शैली व खान-पान में अनियमित बदलाव, तनाव और मोटापा हृदय रोग का प्रमुख कारण है।
तैलीय पदार्थ का सेवन करना बेहद खतरनाक
गैर संचारी रोग पदाधिकारी डॉ. राम मोहन सहाय ने बताया कि तैलीय पदार्थ का सेवन करना हृदय रोग के लिए सबसे ज्यादा खतरनाक साबित हो सकता है। लोग अपनी डाइट में ऑयल का सेवन कम करें। ऑयल के ज्यादा सेवन से शरीर की नसों में फैट जमा होने लगता है। जिससे हार्ट अटैक की सम्भावनाएं बढ़ जाती है। स्वस्थ व्यक्ति को ज्यादा से ज्यादा सरसों के तेल को अपनी डाइट में रखना चाहिए। रिफाइन तथा नारियल के तेल का प्रयोग कम करना चाहिए।

अभिभावकों की अनदेखी भी बड़ा कारण
उन्होंने कहा कि बड़े ही नहीं बल्कि बच्चे भी हृदय रोग के शिकार हो जाते हैं। इसका मुख्य कारण अभिभावकों की लापरवाही है। बच्चों में किसी प्रकार की समस्या होती है तो अभिभावक विशेषज्ञ चिकित्सकों से दिखाने के बजाय आरएमपी एवं मेडिकल स्टोर से सलाह लेकर दवा दे देते हैं। जिसके कारण बच्चों की सही जांच नहीं हो पाती है और बाद में हृदय से संबंधित रोग हो जाता है। कुछ बच्चे जन्म से ही हृदय रोग से पीड़ित मिल रहे हैं। ऐसे मामले आये दिन सामने आ रहे हैं।

गंभीर बात : कम उम्र में भी हो रहे हैं हृदय रोग का शिकार

हार्ट केयर के संचालक डाॅ. दिनेश कुमार ने बताया कि पहले की अपेक्षा आज कम उम्र के लोग भी हृदय रोग के शिकार हो रहे हैं। पहले आमतौर पर 50 साल से उपर के लोगों में हृदय रोग से संबंधित समस्या ज्यादा देखने को मिलती थी। लेकिन वर्तमान परिवेश में देखा जाय तो 25 साल से उपर के लोगोे में भी हार्ट संबधी समस्या होने की संभावना बढ़ गई है। उन्होंने बताया कि 50 साल से उपर के करीब 15-20 प्रतिशत लोगों में हृदय रोग से संबंधित शिकायत देखने को मिल रहा है। वहीं 40-50 साल के लोगोें में 10 और 25-40 साल के लोगोे में 5 प्रतिशत लोग हृदय रोग के शिकार हे रहे हैं।

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