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बेबसी की बेड़ियों से मुक्त होगा शेरघाटी का इमरान:दैनिक भास्कर में युवक की बेबसी की दर्द भरी खबर पढ़ते ही मदद को आगे आए कई लोग, युवक को अस्पताल में कराया भर्ती

शेरघाटी2 महीने पहले
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पिछले दो सप्ताह से बेबसी की जंजीरों में जकड़ी इमरान की जिंदगी का दर्द उजागर होने के बाद समाजसेवियों ने मदद के लिए हाथ बढ़ाया है। हमजापुर स्थित कमर अली सुलतान के चहारदीवारी के अंदर दो सप्ताह से लोहे की जंजीर के साथ पेड़ से बंधा इमरान का इलाज कराया जाएगा। दैनिक भास्कर में मानसिक रूप से अस्वस्थ युवक की दास्तां पढ़ने के बाद मायापुर निवासी और लोक कल्याण ग्रुप के ट्रस्टी व डायरेक्टर अजय कुमार सिंह ने इलाज के खर्च उठाने का वादा किया।

वहीं स्थानीय युवा शिकोह अलबदर, डा. हिमायूं नसीम और आबिद इमाम ने उसे शहर के रमना मोहल्ले स्थित लाइफ लाइन क्लिनिक में भर्ती कराया। जहां डा. शब्बन और डा. हिमायूं के देखरेख में इलाज किया गया। चिकित्सकों ने बताया कि युवक को इलाज किया गया। उसको एक सप्ताह की दवा दी गई। उन्होंने बताया कि फिलहाल युवक को आराम की जरूरत है। कुछ दिन आराम करने से युवक पूर्णतः ठीक हो जाएगा। बता दें कि “हमजापुर में दो सप्ताह से जंजीर से बंधा है युवक” शीर्षक से दैनिक भास्कर ने प्रमुखता से खबर प्रकाशित किया था।

पैर व कमर में जंजीर लगाकर पेड़ से युवक को बांधा था
बता दें कि झारखंड राज्य के हंटरगंज थाना क्षेत्र के मीरपुर निवासी इमरान को मानसिक रूप से बीमार होने पर परिजनों ने हमजापुर स्थित कमर अली सुलतान के मजार पर पैर और कमर में लोहे की जंजीर लगाकर एक पेड़ से बांध दिया गया था। परिजनों को उम्मीद थी इसके उपर किसी का अदृश्य साया है जो यहां ठीक हो जाएगा।

इसके चलते धूप और बारिश में भी वह पेड़ से बंधा रहता था। यह सिलसिला पिछले दो सप्ताह चल रहा था। इस दौरान बच्चे उसपर छोटे-छोटे कंकड़ भी फेंक रहे थे। एक तरह से कहा जाय तो मानसिक रोगी बच्चों के लिए मनोरंजन का केंद्र बन चुका था।

लोक कल्याण ग्रुप के डायरेक्टर और युवा मदद को आए आगे
दैनिक भास्कर में इमरान की खबर पढ़ने के बाद समाजसेवियों ने भी मदद के लिए हाथ आगे बढ़ाया। शनिवार को मायापुर निवासी व लोक कल्याण ग्रुप के डायरेक्टर अजय कुमार सिंह ने बताया कि युवक के इलाज में जो खर्च आएगा, वो खर्च करने के लिए तैयार हैं। उन्होंने बताया कि गया, पटना, रांची आदि बड़े शहरों में उसे दिखाने की जरूरत पड़ेगी, इसके लिए वे तैयार हैं। इधर शहर के युवा शिकोह अलबदर, डा. हिमायूं नसीम और आबिद इमाम ने मजार से युवक को मुक्त करके क्लिनिक में भर्ती कराया और इलाज कराया। इलाज के साथ परिजनों को कई तरह के सुझाव दिए।

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