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शिक्षा का सौदा:ऑनलाइन क्लास के नाम पर निजी स्कूल मचा रहे लूट, अब सरकारी भी पीछे नहीं

शेरघाटी17 दिन पहले
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  • कोरोना काल में बोर्ड ने बढ़ाया पंजीयन शुल्क, अब रजिस्ट्रेशन के लिए देने होंगे ज्यादा पैसे

कोरोना महामारी के कारण पहले से ही परेशान अभिभावकों को 98 दिनों के बाद स्कूल खुलते ही झटका लगा है। शिक्षा विभाग ने 2023 में मैट्रिक बोर्ड की परीक्षा देने वाले छात्र-छात्राओं को रजिस्ट्रेशन शुल्क के नाम पर अतिरिक्त फीस का बोझ लाद दिया है। कोरोना महामारी के बीच चुपके से बिना किसी को सूचना दिए बिहार विद्यालय परीक्षा समिति ने अचानक से नवम कक्षा के छात्रों के रजिस्ट्रेशन फीस में वृद्धि कर दी है। दो दिन पहले स्कूल और काॅलेज खुले हैं। वो भी प्लस टू से ऊपर वाले बच्चों को स्कूल व काॅलेज आने की अनुमति दी गई है।

नवम कक्षा में नामांकन शुरू है। अभी बहुत से बच्चों को नामांकन भी नहीं हुआ है। लेकिन अब वे नवम कक्षा में नामांकन के लिए स्कूल आएंगे तो नामांकन और 2023 मैट्रिक बोर्ड के लिए रजिस्ट्रेशन शुल्क भी साथ में देना पड़ेगा। इसको लेकर बिहार बोर्ड ने सभी स्कूलों को लेटर भेज दिया है। इस तरह से देखा जाय तो ऑनलाइन कक्षा के नाम पर जहां एक ओर प्राइवेट स्कूल लूट मचा रहे हैं वहीं सरकार भी पीछे नहीं है। जबकि इस बार संकट और बढ़ गया है। दूसरी लहर ने कई परिवारों को खासा प्रभावित किया है। इसके बावजूद सरकार ने 2023 मैट्रिक बोर्ड परीक्षा में शामिल होने वाले छात्रों के रजिस्ट्रेशन शुल्क में वृद्धि कर दी है।

महंगाई ने आम आदमी का जीना किया मुहाल

अभिभावकों को कहना है कि कोरोना काल में आमलोगों की आय के साधन लगातार घटते जा रहे हैं। दूसरी ओर इंधन के बढ़ते कीमतों की वजह से महंगाई चरम पर है। आमलोगों की मुश्किलें बढ़ गई है। महंगाई ने आम आदमी की कमर तोड़ कर रख दी है। पैसा न रहने के कारण कई लोगों ने अपने बच्चों को स्कूल से नाम कटा दिया है। ऐसे में सरकारी स्कूलों में भी पंजीयन शुल्क के नाम पर फीस वृद्धि करना आमलोगों के साथ मजाक नहीं तो क्या है। कोरोना और महंगाई के कारण सरकार को आमलोगों को मदद करना चाहिए। लेकिन सरकार ऊपर से अभिभावकों से ही लूट मचाना चाहती है। अभिभावक कहते हैं कि एक बात स्पष्ट हो गया कि सरकार किसी की हो, उनलोगों को सिर्फ सत्ता चाहिए। आमलोगों की समस्याओं से उन्हें कुछ लेना देना नहीं है।

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