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अनदेखी:चिताबकला स्कूल जाने के लिए सड़क नहीं बच्चे बोले-डीएम अंकल रोड बनवा दीजिए..

शेरघाटी12 दिन पहले
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स्कूल जाती एचएम और बच्चे। - Dainik Bhaskar
स्कूल जाती एचएम और बच्चे।
  • स्कूल में हैं 570 बच्चे व 8 शिक्षक, बरसात में स्कूल जाने में बच्चों को होती है खासा परेशानी
  • खेत-खलिहान होकर मध्य विद्यालय चिताबकला जाते हैं बच्चे

शेरघाटी-चेरकी रोड में मध्य विद्यालय चिताबकला तक आने जाने के लिए सड़क सुविधा नहीं है। इस बात को लेकर छात्र-छात्राएं काफी परेशान हैं। वहीं स्कूल के हेडमास्टर सबिता कुमारी ने भी विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से लेकर स्थानीय जनप्रतिनिधियों तक इस मामले को लेकर जानकारी दी, लेकिन आज तक कोई हल नहीं निकला है। बताया जाता है कि शिक्षकों, बच्चों और अभिभावकों के मांग पर दो साल पहले ब्रिक्स सोलिंग किया गया था, वो भी इस साल के बरसात में आधा बह गया।

सड़क निर्माण के लिए दोबारा कार्य शुरू नहीं किया गया है। अब एक बार फिर स्कूली छात्र-छात्राएं जिलाधिकारी से सड़क निर्माण की मांग कर रहे हैं। वे कहते हैं कि सरकार एक ओर ढाई सौ आबादी वाले टोलों को सड़क उपलब्ध कराने की बात करती है। दूसरी ओर विद्यालय में प्रतिदिन आने-जाने वाले सैकड़ों विद्यार्थियों को एक अदद रास्ता उपलब्ध नहीं है।

स्कूल जाने वाले रास्ते की हालत खराब
स्कूल के छात्र-छात्राओं और अभिभावक कहते हैं कि एक तो स्कूल जाने वाले रास्ते की दूरी ज्यादा है ऊपर से इसकी हालत बहुत खराब है। यहीं कारण है कि बहुत छात्र-छात्राएं खेत पर बने मेढ़ से स्कूल आते-जाते हैं। लेकिन जब खेत में फसल लगी होती है तो कठिनाई और बढ़ जाती है। बारिश के दिनों मुश्किलों का सामना ज्यादा करना पड़ता है। बताया जाता है कि लगातार मांग के बाद दो साल पहले ब्रिक्स सोलिंग सड़क का निर्माण किया गया। लेकिन वह भी इस बरसात में बर्बाद हो गया। सड़क निर्माण के लिए अभिभावकों ने भी वरीय अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों को पत्र लिखा है।

सरकारी स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों को सरकार दे रही सुविधा
सूबे की नीतीश सरकार ने सरकारी स्कूलों को शिक्षा स्तर सुधारने के लिए काफी प्रयास किए हैं। जिसके तहत बच्चों को निशुल्क पुस्तक, साइकिल, ड्रेस और भोजन की व्यवस्था तक स्कूल में कर दी है। इतना ही नहीं सरकार ने सरकारी स्कूल भवन में बिजली व्यवस्था करने के आदेश भी दिए हैं। वहीं बच्चों को स्कूल तक पहुंचने में किसी तरह की असुविधा न हो इसके लिए सड़क निर्माण करने के निर्देश भी दिए जा चुके हैं फिर भी कई स्कूलों में बच्चों को आने जाने के लिए रास्ते का निर्माण नहीं होना चिंतनीय है।

छह से ज्यादा गांव के बच्चे आते हैं पढ़ने
मिडिल स्कूल चिताबकला के हेडमास्टर सबिता कुमारी कहती हैं कि इस स्कूल में बहेलिया बीघा, मलहचक, बनियांटोला, निरंजना टाड़, निम्हारा और चिताबकला के बच्चे पढ़ाई करने आते हैं। इसके अलावे छठी कक्षा में राजाबीघा और तेतरिया के भी बच्चे आते हैं। वे कहती हैं स्कूल में 570 बच्चे और 8 शिक्षक हैं। उन्होंने बताया कि मुख्य मार्ग से खेत के रास्ते ही स्कूल नजदीक पड़ता है। सड़क मार्ग की दूरी ज्यादा होने के साथ खराब भी है। दो साल पहले निर्माण हुआ, वो भी इस साल आधा बह गया। फिर भी निर्देश दिया गया है कि सड़क मार्ग से ही बच्चे स्कूल आएं ताकि किसी तरह के जोखिम से उनको सामना न करना पड़े।​​​​​​​

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