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उपलब्धि:राज्य और राष्ट्रीयस्तर के आठ मेडल जीत चुका है 15 वर्षीय आदित्य

सीवान| अमनराज8 दिन पहले
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  • गौरव सम्मान समेत ट्राॅफियों पर भी किया हस्ताक्षर, नौ साल की उम्र में ही शुरू कर दी थी कराटे की ट्रेनिंग

कराटे की दुनिया में अपनी छाप छोड़ने वाले आदित्य रंजन प्रतिभा से प्रदेश के नाम का झंडा विश्व के विभिन्न शहरों में फहराया है। वह लगातार कराटे में अपना डंका बजा रहे हैं। पन्द्रह वर्षीय रंजन अपनी मेहनत की बल पर अपने अचूक निशाने लगा रहे हैं। शहर के बीचों-बीच बसा दखिन टोला में रहनेवाले खिलाड़ी आदित्य रंजन ने राष्ट्रीयजगत में अपना प्रदर्शन दिखा चुके हैं। खेल जीवन वर्ष 2011 से शहर के राजेन्द्र स्टेडियम से शुरू किया। इसके बाद लगातार उन्होंने अपने जीवन में तरक्की पाने के लिए कड़ी मेहनत की। इसके बाद उन्होंने वर्ष 2018 में प्रदेश और दिल्ली, झारखंड, मध्यप्रदेश में राज्यस्तरीय मैचों में एक सफल कराटे के रूप में अपनी अमिट छाप छोड़ी है।

दूसरे क्लास से शुरू किया कराटे| आदित्य रंजन दूसरी कक्षा से ही कराटे में रुचि लेने लगे थे। बेहतर ट्रेनिंग के लिए इंस्टीट्यूट में दाखिला लिया। शुरू के दौर में कराटे सीखने पर परेशानी बहुत आई। लेकिन, धीरे-धीरे जीवन की रफ्तार बढ़ने लगी। अब तक पांच बार स्टेट व तीन बार नेशनल मेडल जीत चुके हैं।

यहां से मिले मेडल
वर्ष 2014 में राज्यस्तरीय प्रतियोगिता में गोल्ड मैडल हासिल किया। वहीं उसने राष्ट्रीयस्तर पर सिल्वर मेडल हासिल कर अपने राज्य का नाम रोशन किया। वर्ष 2015 में दिल्ली में आयोजित सातवीं कराटे चैम्पियनशिप में सिल्वर मेडल हासिल किया। इसके बाद वर्ष 2016 में राज्यस्तरीय प्रतियोगिता में अपनी शानदार प्रदर्शन करते हुए गोल्ड मैडल हासिल किया।

पिता चलाते है किराने की दुकान
आदित्य रंजन के पिता राजीव रंजन पिछले कई सालों से किराने की दुकान चलाते हैं। इससे घर का जीवन यापन चलता हैं। पिता ने बताया कि बेटा आदित्य को अंतरराष्ट्रीय मैदान पर देखना चाहते हैं। जिस परिस्थितियों के बीच से बच्चे को पाला पोसा है वो अब सफल होता दिख रहा है। कराटे की दुनिया मंे जिला ही नहीं प्रदेश में भी इसके टक्कर का कोई नही हैं। जहां खेलने जाता है जीतकर ही लौटता है।

दिल्ली में मिला गौरव सम्मान
दिल्ली में गौरव सम्मान से सम्मानित, पटना में राज्य कराटे के सचिव पंकज काम्बली के द्वारा ट्राफी, झारखंड में प्रथम मेडल से सम्मानित हो चुका हैं। ब्रोंज मेडल भी जीत चुका हैं। साथ ही स्थानीय पूर्व सांसद, जिलाधिकारी, समेत अन्य संस्थाओं के द्वारा भी सम्मानित किया जा चुका हैं।
इन बेल्टों से होती है पहचान
शुरू के दौर में येलो बेल्ट से कराटे की शुरुआत हुई थी। उसके बाद बढ़ते हुए ऑरेंज बेल्ट, ग्रीन बेल्ट, ब्लू बेल्ट, ब्राउन बेल्ट समेत ब्लेक बेल्ट में शामिल हो चुका है।

इस खिलाड़ी की मेहनत एक दिन अवश्य ही रंग लाएगी। शुरू से ही समय के साथ चलना ही रंजन का सिद्धांत रहा है। 2021 में होने वाले अंतरराष्ट्रीय खेल में भी जाएगा। जहां जिले का नाम रोशन करेगा।
मोनू कुमार, कोच

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