अनीमिया का खतरा:जिले की 58% गर्भवती महिलाएं एनीमिक, क्षमता पर पड़ता है असर

सीवान2 महीने पहले
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  • गर्भधारण के दौरान एनीमिया हो सकता है खतरनाक, लक्षण दिखते ही डॉक्टरों से करें संपर्क

जिले में एनीमिया के मरीजों की संख्या दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है। अनीमिया का लक्षण सबसे ज्यादा गर्भवती महिलाओं में देखने को मिलता है। एनीमिया की बीमारी गर्भधारण के दौरान खतरनाक साबित होता है। खून की कमी हो जाती है। जबकि महिलाओं में गर्भावस्था के दौरान खून की कमी नहीं होनी चाहिए ताजा रिपोर्ट के दौरान 58 फीसदी गर्भवती महिला एनीमिया से पीड़ित होती है। कोरोना काल में इस बात पर विशेष जोर दिया जा रहा है कि शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होनी चाहिए। आज की जीवन शैली में एनीमिया एक आम बीमारी हो गई है, लेकिन इसके प्रति लापरवाही जान जोखिम में डाल सकती है। व्यक्ति के शरीर में आयरन की कमी के कारण जब हीमोग्लोबिन का बनना सामान्य से कम हो जाता है। तब शरीर में खून की कमी होने लगती है। इस स्थिति को ही एनीमिया कहा जाता है।
जीवनशैली में बदलाव लाना जरूरी
इस बीमारी से बचाव के लिए लोगों को जीवनशैली बदलने एवं आयरन युक्त आहार का सेवन करने की जरूरत है। सिविल सर्जन ने बताया कि राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 (2019-20) के अनुसार जिले में 15 से 49 वर्ष की 58 प्रतिशत गर्भवती, 15 से 49 वर्ष की 53.1 प्रतिशत महिलाएं एनीमिया से ग्रसित हैं। एक स्वस्थ्य महिला में हीमोग्लोबिन की मात्रा 12 ग्राम प्रति डेसीलीटर और पुरुषों में 14 ग्राम प्रति डेसीलीटर होनी चाहिए। वहीं जिले में 5 से 59 माह के 63.9 प्रतिशत बच्चे एनीमिया से शिकार है।

ऑक्सीजन की हाेने लगती है कमी: सिविल सर्जन डॉ. यदुवंश कुमार शर्मा ने बताया कि एनीमिया हमारी शारीरिक व मानसिक क्षमता को प्रभावित करता है। एनीमिया में हीमोग्लोबिन की कमी होती है। हीमोग्लोबिन ही फेफड़ों से ऑक्सीजन लेकर खून में पहुंचाता है। यही कारण है कि शरीर में हीमोग्लोबिन की कमी होने से ऑक्सीजन की कमी होने लगती है और शरीर को पर्याप्त ऊर्जा नहीं मिलती है। जो भी व्यक्ति अपने खान-पान का ख्याल नहीं रखता है उसे एनीमिया हो सकता है लेकिन महिलाओं में एनीमिया की समस्या अधिक देखने को मिलती है।

एनीमिया के लक्षण
सांस फूलना, थकावट आना, चक्कर आना, घबराहट, एकाग्रता में कमी और आंखों, हथेलियों व नाखून का रंग पीला होना एनीमिया के प्रमुख लक्षण हैं।

हर उम्र के लोग एनीमिया ग्रसित हो सकते हैं
सीएस ने कहा कि बच्चों से लेकर बड़ों तक हर उम्र के लोग एनीमिया ग्रसित हो सकते हैं, लेकिन किशोरावस्था, प्रसव के बाद और रजोनिवृत्ति के बीच की आयु में यह समस्या अधिक देखी जाती है। आमतौर पर ऐसा तब होता है, जब शरीर में लाल रक्त कणों की कोशिकाओं के नष्ट होने की दर उनके निर्माण की दर से अधिक होती है।

गर्भवती एवं धात्री महिलाएं खान पान का रखें विशेष ध्यान
कोरोना के दौर में तो हमें इस पर विशेष ध्यान देना चाहिए क्योंकि इससे हमारी प्रतिरोधक क्षमता भी कम हो सकती है। ऐसी स्थिति में कोरोना के संक्रमण की संभावनाएं बढ़ जाती हैं। हमें ऐसे समय में अपने खान-पान का विशेष ध्यान रखना चाहिए। हमें फल व सब्जियों को अच्छी तरह से धोकर खाना चाहिए। खाना बनाने व खाना खाने से पहले हाथों को साबुन और पानी से अच्छे से धोना चाहिए। गर्भवती एवं धात्री महिलाओं को डाक्टर की सलाह से विटामिन सी युक्त खाद्य पदार्थ नीबू, संतरा, आंवले के साथ आयरन की गोलियों का सेवन करना चाहिए।

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