याेजना:स्कूलाें में किशोरियों की ‘पक्की सहेली’ जल्द

सीवान3 महीने पहले
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  • मिलेगी आयरन की गोली, एनीमिया दर साल में 3% कम करने का लक्ष्य
  • किशोरावस्था ही स्वस्थ जीवन की बुनियाद

किशोरावस्था स्वस्थ जीवन की बुनियाद होती है। किशोरियों में खून की कमी भविष्य में सुरक्षित मातृत्व के लिए नुकसानदायक साबित हो सकती है। इसको ध्यान में रखते हुए 10 से 19 वर्ष तक की किशोर, किशोरियों व गर्भवती महिलाओं को आयरन की गोली दी जाती है। कोरोना संकट काल में स्कूल व आंगनबाड़ी केंद्र बंद कर दिया गया था। अब राज्य सरकार द्वारा स्कूल खोलने का निर्देश दिया गया है। इसको लेकर स्वास्थ्य विभाग के कार्यपालक निदेशक संजय कुमार सिंह ने सिविल सर्जन को पत्र जारी कर निर्देश दिया है कि प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी, प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी एवं बाल विकास परियोजना पदाधिकारी से संबंध स्थापित कर सूक्ष्म कार्य योजना बनाकर आईएफए (नीली गोली) का विद्यालय एवं आंगनबाड़ी केंद्रों में आवश्यकतानुसार उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है।

सिविल सर्जन डॉ. यदुवंश कुमार शर्मा ने बताया एनीमिया एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या है जो स्वास्थ्य व तंदुरुस्ती के साथ-साथ पढ़ने एवं काम करने की क्षमता को भी विपरीत रूप से प्रभावित करती है। इसी को लेकर किशोर, किशोरियों की बेहतर स्वास्थ्य को लेकर कदम उठाया गया है। माध्यमिक विद्यालयों में किशोर, किशोरियों को दवा खिलायी जाती है।

क्या कहते हैं आंकड़े
राष्ट्रीय स्वास्थ्य सर्वेक्षण 5 के अनुसार जिले में 6 माह से 59 माह तक के 63.9 प्रतिशत बच्चे एनीमिया से ग्रसित हैं। 15 से 49 वर्ष की 53.1 फीसदी महिलाएं एनीमिया से ग्रसित हैं। 15 से 49 वर्ष के 58 प्रतिशत गर्भवती महिलाएं एनिमिया की शिकार है। इसी की कमी को दूर करने के लिए आयरन की को गोली दी जाती है। इधर, विभाग द्वारा जारी पत्र में कहा गया है कि प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी, प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी, बाल विकास परियोजना पदाधिकारी से समन्वय स्थापित कर प्रत्येक बुधवार एवं गुरुवार को विद्यालय जाने वाले किशोर,किशोरियों को विद्यालय के माध्यम से तथा प्रत्येक बुधवार को विद्यालय नहीं जाने वाले किशोर, किशोरियों को आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से आईएफए (नीली गोली) का वितरण करेंगे एवं प्रतिमाह 5 तारीख तक प्रतिवेदन प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी को उपलब्ध कराएंगे।

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