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अपील:योगाभ्यास को दिनचर्या में शामिल कर कोरोना वायरस की तीसरी लहर से बचें

सीवान |डॉ. अश्विनी कुमार7 दिन पहले
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  • शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता और फेफड़ों को भी योग व प्राणायाम करके बनाया जा सकता है मजबूत, भास्कर बता रहा है कौन से आसन होंगे उपयोगी
  • हर दिन योगाभ्यास-प्राणायम करेंगे तो मानसिक रूप से भी रहेंगे मजबूत, बीमार होने पर शंका का भी होगा समाधान

पिछले करीब दो वर्षों से पूरा विश्व कोरोना वायरस से जूझ रहा है। कोरोना वायरस एक रेस्पिरेट्री वायरस है। जो हवा के माध्यम से हमारे आंख-नाक और मुंह के द्वारा शरीर में प्रवेश करता है। इस बीमारी से पीड़ित व्यक्ति को सांस लेने में तकलीफ होती है। जिसके कारण कई लोगों की अबतक इस महामारी से जान भी जा चुकी है। इसी वर्ष अप्रैल-मई में कोरोना की दूसरी लहर आई थी, जिसमें लाखों लोगों ने अपनी जान गंवा दी थी। इस दौरान लोगों को जो सबसे अधिक समस्या हुई वो सांस लेने की थी। इसके लिए लोगों को ऑक्सीजन का सहारा लेना पड़ा। उस समय ऑक्सीजन की किल्लत की खबरें भी देशभर से आईं। अस्पतालों में बेड फुल हो गए और मरीजों की संख्या बेतहाशा बढ़ती है। इन सबके बीच जो लोग नियमित तौर पर योगाभ्यास, प्राणायाम को अपनी जीवनशैली से जोड़कर रखा उन्हें कम तकलीफ हुई और वे कम संक्रमित भी हुए।

इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए योगाभ्यास : विशेषज्ञों के अनुसार विश्व के कई हिस्सों में इस महामारी की तीसरी लहर ने भी अब दस्तक दे दी है। हालांकि अबतक भारत इससे अछूता है। आगे भी इस बीमारी से बचे रहने के लिए योगगुरु गव्यसिद्ध डॉ. अश्विनी कुमार हमें कुछ ऐसे ही योगाभ्यास के बारे में जानकारी दे रहे हैं, ताकि हम कोरोना की हर लहर से सुरक्षित रह सकें।

फेफड़ों के लिए माइक्रो योग करें, ताकि कोरोना की लहर के दौरान ये बड़े नतीजे दे

एक मोटे आसन पर रीढ़ की हड्डी सीधी करके बैठें। इस प्रकार बैठे कि दोनों जंघा भूमि को अच्छी तरह से स्पर्श कर सकें। अब दोनों हाथों को आपस में जोड़ें और कंधे की ऊंचाई तक सामने ले आए। केहूनी सीधी रहे। लंबी गहरी सांस को भरते हुए दोनों हाथों को धीरे-धीरे फैलाते हुए ज्यादा-से-ज्यादा पीछे की तरफ ले जाएं। ध्यान रहे की हथेलियों की ऊंचाई कंधे की ऊंचाई के ही बराबर बनी हुई रहे। स्वास को छोड़ते हुए 5 बार धीरे-धीरे ताली बजाएं। अब मध्यम गति में गति को बढ़ाते हुए 5 बार ताली बजाएं। इसके पश्चात गति को तीव्र करते हुए 5 से 10 बार ताली बजाएं। फिर गति को मध्यम करते हुए 5 बार और फिर 5 बार धीरे धीरे करें। अंत में एक लंबी गहरी सांस लेकर जितनी देर श्वास अंदर रोक सकते हैं रोके और फिर तेजी के साथ ताली बजाएं और थोड़ी देर विश्राम करें। फेफड़ों में बढ़ी हुई ऊर्जा को महसूस करें। सामान्य श्वास लेते और छोड़ते रहें। यह एक चक्र का अभ्यास हुआ क्षमता अनुसार इसको तीन चक्र अथवा अधिक भी कर सकते हैं। गति शरीर की सामर्थ्यता के अनुसार ही रखनी है। सुबह-शाम किया जा सकता है। लाभ की प्राप्ति के लिए 5 से 21 बार ओंकार अर्थात ओम का उच्चारण करेंगे।

सम प्राणायाम
हाथ की उंगलियों से हृदय मुद्रा बना लें। इसके लिए तर्जनी अर्थात अंगूठे के बगल वाली उंगली को अंगूठे की जड़ में रेखा के ऊपर रखें और मध्यमा और अनामिका उंगली के अग्र भाग को अंगूठे के अग्रभाग से स्पर्श करें। छोटी उंगली को बिल्कुल सीधी रखें। इस प्रकार दोनों हाथों की उंगलियों से इस मुद्रा को बना कर आराम से घुटनों पर रखें।
5 सेकंड में खूब लंबी गहरी सांस भर ले। फिर अगले 5 सेकंड तक श्वास को फेफड़ों में भरकर रोके रखें। फिर अगले 5 सेकंड में धीरे-धीरे श्वास को बाहर छोड़ते जाएं। फिर अगले 5 सेकंड श्वास को बाहर छोड़कर ही रखें। इस प्रकार एक चक्र का अभ्यास पूरा हुआ। एक सांस लेने, रोकने, छोड़ने और छोड़कर रुकने में 20 सेकंड का समय लगा; एक श्वास की आयु 20 सेकंड हुई। इसी प्रकार 5-25 बार क्षमता अनुसार अभ्यास करेंगे।

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