सुविधाओं में कटौती:सड़क के लिए ग्रामीणों का प्रदर्शन, बोले-आश्वासन से नहीं चलेगा काम, सुविधा दें

सीवान12 दिन पहले
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गांव की मुख्य सड़क पर प्रदर्शन करते विद्यार्थी। बारिश के बाद इन्हें स्कूल जाना होता है मुश्किल। - Dainik Bhaskar
गांव की मुख्य सड़क पर प्रदर्शन करते विद्यार्थी। बारिश के बाद इन्हें स्कूल जाना होता है मुश्किल।
  • गांव के लोगों को बुनियादी सुविधाएं देने में भी अधिकारी कर रहे हैं अनदेखी
  • गांव के लोगों की फरियाद नहीं सुनते अधिकारी और क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि

बड़हरिया प्रखंड के सिकंदरपुर पंचायत के विश्वंभरपुर के सभी वार्डों में जर्जर सड़क व बिजली के खुले तार को ठीक कराने के लिए ग्रामीणों ने शुक्रवार को प्रदर्शन किया। प्रदर्शन कर रहे राकेश कुमार, सरफराज, इमरान, असुद्दीन अंसारी समेत अन्य ग्रामीणों ने बताया कि जर्जर सड़क से हम सभी गांव के लोग परेशान हैं। अब आश्वासन से काम नहीं चलेगा। सुविधाएं नहीं मिलीं तो आंदोलन का रास्ता अख्तियार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि शिकायत के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। बरसात के दिनों में घर के छोटे-छोटे बच्चे गिरकर घायल हो जाते हैं। गांव में ज्यादातर गलियां मिट्टी की हैं। इनमें हमेशा कचरा और गंदगी फैली रहती है। सड़क नहीं होने से शादी-विवाह में बहुत परेशानी होती है। कभी तो शादी या अन्य शुभ कार्यों के लिए दूसरे गांव या पंचायत में रिश्तेदारों के घर जाकर करनी पड़ती है। बिजली के तार का भी यही हाल है। कहीं जमीन से मात्र पांच-सात फीट ऊपर से तार गुजरा है तो कहीं जैसे-तैसे तार ले जाया गया है। इससे हमेशा खतरा बना रहता है। विकास के नाम पर किसी भी तरह का कोई कार्य नहीं किया गया है। पुलिया की स्थिति भी जर्जर हो चुकी है। जबकि मुख्यालय से गांव की ओर जाने वाली मुख्य पुलिया ही एक सहारा है। जो वर्तमान समय में क्षतिग्रस्त हो चुकी है। फिर भी हम सब उसी रास्ते से आवाजाही करते हैं। जिस दिन कोई बड़ी घटना हो जाएगी उस दिन विभाग के द्वारा कार्रवाई की जाएगी। बिजली के तार भी पूरे पंचायत में धरती से चार से पांच मीटर ऊपर खुला में बिछाया गया है। जब भी बच्चे सड़क पर खेलते हैं तो तार से हमेशा सटने का डर बना रहता है। बरसात के दिनों में अर्थ भी कभी-कभी मिलने लगती है। चार से पांच महीने पूर्व दो गाय बिजली के चपेट में आने से मौत हो गई थी। विभाग को सूचना दिया गया लेकिन कोई कारवाई नहीं की गई।

पंचायत की एक भी सड़क का नहीं हुआ है पक्कीकरण
पंचायत के अंदर शायद ही कोई ऐसा सड़क हो जो संपूर्ण रूप से पक्की हो। सभी सड़कें टूट फूट कर खराब हो चुकी है। हर पांच साल पर मुखिया या वार्ड पार्षद के द्वारा आश्वासन दिया जाता है कि सड़क नाली और पानी के लिए विशेष व्यवस्था किया जाएगा लेकिन चुनाव खत्म होते ही सब खत्म हो जाता है। उसके बाद मुखिया या वार्ड पार्षद से शिकायत करने पर यही आश्वासन मिलता है कि अभी फंड नहीं आया है आते ही सभी कार्य किए जाएंगे। इस तरह की बहानेबाजी से पूरे गांव के लोग परेशान हैं। ग्रामीणों का कहना है की अभी तो हम लोगों ने गांव के सड़क पर ही प्रदर्शन किया है। इसके बावजूद भी प्रखंड स्तर से कोई कार्रवाई नहीं होगी तो प्रखंड मुख्यालय का घेराव करेंगे।

बारिश में घर से निकलना हो जाता है मुश्किल
गांव के राकेश कुमार ने कहा कि पंचायत में कहीं भी पक्की सड़क का कार्य बेहतर तरीके से नहीं किया गया है। आधे से अधिक क्षेत्रों में मिट्टी की सड़क है। बरसात में चलना मुश्किल हो जाता है। यह परेशानी लंबे समय से है, बावजूद न तो इसपर अधिकारी ध्यान देते हैं और न ही जनप्रतिनिधि। यदि कोई बीमार पड़ जाता है तो उसे अस्पताल तक पहुंचाना मुश्किल है।

चांड़ी-विश्वंभरपुर मुख्य सड़क पर पैदल भी चलना हो गया मुश्किल
चाड़ी विश्वंभरपुर मुख्य सड़क पर दर्जनों कोचिंग व शिक्षण संस्थाएं हैं। जहां पूरे पंचायत या दूसरे क्षेत्रों से भी छात्रों का आना जाना लगा रहता है। कोचिंग या स्कूल जाने के लिए पुलिया ही एक मात्र सहारा है। छात्रों ने बताया कि पुलिया पर जाते समय हमेशा डर बना रहता है क्योंकि पुलिया दोनों तरफ से गिर चुका है। बीच रास्ते में बनाए गए पुलिया क्षतिग्रस्त हो चुका है। कभी भी बड़ी घटना घटित हो सकती है। स्कूल या कोचिंग जाने में एक यही मात्र एक सड़क है। पुलिया पर हमेशा अंधेरा ही रहता है। लाइट की व्यवस्था नहीं कराई गई है।

खुले और लटके बिजली तार से बढ़ी मुश्किल
ग्रामीणों ने बताया कि पंचायत के अंदर खुला में तार जमीन से 4 से 5 मीटर के ऊपर में बिछाए गए हैं। इससे हमेशा हादसा होने का डर बना रहता है। शिकायत भी की गयी बावजूद कोई कार्रवाई नहीं होती है। इसीलिए, हमलोगों ने सड़क पर प्रदर्शन किया है। इसके बावजूद भी अगर कार्यवाही नहीं होती है तो बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन या घेराव करेंगे। पूरे पंचायत में बरसात के दिनों में हमेशा डर बना रहता है। थोड़ी सी तेज हवा चलने पर सभी एक-दूसरे में तारे सटने लगते हैं। इससे अर्थिग लगता है। 3 से 4 महीने पहले इसी तरह के घटने में दो गाय की मौत हो गई। मुआवजा भी अब तक नहीं मिला है।

हमेशा लगता है डर
ग्रामीण विपिन कुमार, हरेंद्र यादव और सरफराज आदि ने बताया कि जर्जर सड़क होने के कारण आए दिन घटनाएं होती रहती हैं। छोटे बच्चे गिरकर घायल हो रहे हैं।बिजली के तार खुले में ही लटका दिया गया है। इससे हमेशा खतरा बना रहता है। बरसात या तेज हवा में लाइट काट दी जाती है। मगर, इसका स्थायी समाधान नहीं होता।

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