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बाढ़ का खतरा:सिसवन व दरौली में घटा सरयू का पानी तटबंधाें की सुरक्षा में 64 मजदूर तैनात

सीवानएक महीने पहले
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कटाव रोकने के लिए नदी किनारे बालू भरकर रखे गए बोरे। - Dainik Bhaskar
कटाव रोकने के लिए नदी किनारे बालू भरकर रखे गए बोरे।
  • जलस्तर घटने से अधिकारियों और तटीय इलाकों में रहनेवाले ग्रामीणों ने ली राहत की सांस
  • बाढ़ विभाग के कनीय अभियंता कर रहे कैंप, जलस्तर पर रखी जा रही है नजर

जिले में लगातार हो रही बारिश से सरयू नदी उफान पर थी। लेकिन दो-तीन दिन से जलस्तर में कमी आई है। इससे तटवर्ती गांवों के लोगों ने राहत की सांस ली है। हालांकि बाढ़ की आशंका से प्रशासन अलर्ट है। बाढ़ नियंत्रण विभाग ने तटबंध की चौकसी बढ़ा दी है। इसके लिए रात्रि में गश्ती करने के लिए 60 मजदूरों को तटबंध पर तैनात किया गया है। वे लोग चौकसी के साथ-साथ तटबंध पर हुए रैनकट, रैटहोल, फॉक्स होल सहित अन्य की मरम्मत भी की जा रही है। बाढ़ नियंत्रण विभाग के कनीय अभियंता भी कैंप किए हुए हैं। बाढ़ नियंत्रण विभाग के कार्यपालक अभियंता हरेकृष्ण प्रसाद ने बताया कि सिसवन में सरयू नदी खतरे के निशान 57.04 सेटी मीटर के निशान से 2.19 सेंटीमीटर नीचे बह रही है। यहां पर जलस्तर 54.850 सेंटीमीटर है। इसी तरह से दरौली में 1.440 सेंमी पानी खतरे के निशान से नीचे है। यहां पर ंखतरे का निशान 60.820 है। वहां पर 59.480 सेमी पानी रिकॉर्ड किया गया है। कार्यपालक अभियंता ने बताया कि जलस्तर में तेजी से सुधार हो रहा है। लगातार नदी का जलस्तर घटा है। नदी के तटबंधों पर मजदूरों द्वारा चौकसी बढ़ा दी गयी है।

खराब पड़े हैं दर्जन भर स्लूइस गेट
दाहा नदी के किनारे सेमरी, हुसेना, कथतल, नयागांव आदि गांवों के दर्जन भर स्लूइस गेट मरम्मत के अभाव में खराब पड़े हैं। 20 साल पूर्व सुखाड़ में खेतों की सिंचाई व बाढ़ में फसलों को सैलाब के पानी से बचाव के लिये गेट बनाए गये थे लेकिन अब यह जर्जर पड़े हैं।

स्लूइस गेट व बांध मरम्मत नहीं होने से खेती में दिक्कत
सिसवन| प्रखंड के रामगढ़ गांव के समीप दाहा नदी पर स्थित एक सलुइस गेट की मरम्मति में उदासीनता पांच गांवों के लोगों के समक्ष मुसीबत बन गई है। इसके चलते लोगों की खेती-बारी प्रभावित है। यहां पिछले तीन वर्षों में सैलाब के पानी ने डेढ़ हजार हेक्टेयर क्षेत्र के खरीफ की फसल को बर्बाद किया है।समस्या के समाधान के लिये स्थानीय लोगों ने जनप्रतिनिधियों से गुहार लगाई लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है।

खेती-किसानी की ओर किसानाें की नजर
रघुनाथपुर प्रखंड के दक्षिणी छोर में स्थित सरयू नदी के बढ़ते जलस्तर विगत दो हफ्ते से घटना शुरू हो गया है। इसके बाद नदी के किनारे बसे दियारा क्षेत्र की पांच पंचायतों के लोगों को राहत मिली है। इन पंचायतों के किसानों ने अब खेती-बारी की तरफ अपना ध्यान लगाना शुरू कर दिया है। राजपुर नरहन तथा बडुआ पंचायत में मक्के की खेती शुरू हो गई है। गंभिरार गांव में जलस्तर घटने के साथ ही किसानों ने धान की खेती पर भी ध्यान देना शुरू कर दिया गया है। दियारा क्षेत्र में निवास करने वाले झोपड़ियों में किसानों के पशु भी उचित स्थानों से वापस दियारा क्षेत्र के अंदर जाना शुरू कर दिया है।

कमलदाह सरोवर में होता है सैलाब के पानी का संग्रहण
ऐतिहासिक महेन्द्रनाथ मन्दिर के उत्तर 550 बीघे में कमलदाह सरोवर विस्तृत है।बरसात में यह पानी से लबालब हो जाता है।चूंकि इस पोखरे का जलग्रहण क्षेत्र दारौंदा व सारण के एकमा प्रखंड के दर्जनभर गांवों तक है जिससे इसमें क्षमता से बहुत अधिक पानी आ जाता है।यह पानी वंहा बने सलुइस गेट से निकल पइन से होकर दाहा नदी में गिरता है।इन दिनों पइन का बांध जर्जर हो गया जिससे पानी जंहा तहां फैल सैलाब के रूप में तब्दील हो जाता है।

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