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  • Mafia Of Other States Are Also Involved In The Game Of Ticket Brokerage From Software, RPF Team Will Go To Azamgarh For Arrest

कार्रवाई:सॉफ्टवेयर से टिकट की दलाली के खेल में जुड़े हैं दूसरे राज्यों के भी माफिया, गिरफ्तारी के लिए आजमगढ़ जाएगी आरपीएफ की टीम

सीवान13 दिन पहले
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गिरफ्तार टिकट दलाल के साथ आरपीएफ की टीम। - Dainik Bhaskar
गिरफ्तार टिकट दलाल के साथ आरपीएफ की टीम।
  • प्रतिदिन दो टिकट और एक माह के लिए 3000 रुपए में खरीदते हैं सॉफ्टवेयर
  • सॉफ्टवेयर का खर्च 50 रुपए, जबकि दलाल यात्री से 500 से 1000 रुपए ज्यादा लेकर टिकट बनाते हैं

रेलवे के टिकट दलाली के खेल में दूसरे राज्यों के माफिया जुड़े हुए हैं। प्रतिबंधित सॉफ्टवेयर एनजीईटी के कारोबार में कई राज्यों के माफियाओं के जुड़ने का सुराग आरपीएफ की टीम को लगी है। इसके बाद ऐसे माफियाओं की गिरफ्तारी के लिए आरपीएफ की टीम जल्दी दूसरे राज्यों में जाएगी। मंगलवार को स्टेशन रोड स्थित ई टिकट के एक दलाल की गिरफ्तारी के बाद उसके कंप्यूटर से प्रतिबंधित एनजीईटी सॉफ्टवेयर मिला। आरपीएफ तथा अपराध सूचना शाखा की टीम द्वारा पूछताछ में बताया गया कि यह प्रतिबंधित सॉफ्टवेयर यूपी के आजमगढ़ के एक माफिया से उसने खरीदी थी। वाह माफिया 3000 रुपए में 1 माह के लिए यह सॉफ्टवेयर बेचता है। इस सॉफ्टवेयर से प्रतिदिन वह दो तत्काल टिकट बना सकता है। अगर दो से ज्यादा तत्काल टिकट की जरूरत पड़ी तो उस माफिया से इससे हिसाब में ज्यादा रुपया देकर सॉफ्टवेयर को खरीदना होता है। यानी कि 3000 रुपए में एक माह तक प्रतिदिन दो टिकट के हिसाब से 50 तत्काल टिकट बनाया जा सकता है। इस तरह एक टिकट पर सॉफ्टवेयर का खर्च 50 रुपए पड़ता। जबकि एक टिकट दलाल प्रत्येक यात्रियों से 500 से 1000 रुपए ज्यादा लेकर टिकट बनाते हैं।

आईआरसीटीसी से वेरीफाई कर होती है गिरफ्तारी
आरपीएफ पुलिस साइबर कैफे पर संदेह होता है या ई टिकट का कारोबार बड़े पैमाने पर हो रहा है। उसकी सूची तैयार कर आरपीएफ की टीम आईआरसीटीसी से वेरीफाई करती है। कई बार आईआरसीटीसी खुद आरपीएफ की टीम को साइबर कैफे की सूची उपलब्ध कराती है। आरपीएफ की टीम गिरफ्तारी से पहले किसी के माध्यम से तो साइबर कैफे की पूरी तरह से तहकीकात कराती है। वहां पर खुद ग्राहक के रूप में जाकर टिकट बनाने का अनुरोध करती है। जब आरपीएफ की टीम यह आश्वस्त हो जाती है कि यहां पर एक टिकट बनाने का कारोबार होता है। इसके बाद उसकी गिरफ्तारी के लिए रणनीति बनाकर छापेमारी करती है। इस तरह आईआरसीटीसी टीम को छापेमारी के दौरान हर हालत में सफलता मिलती है।

आईआरसीटीसी को कर लेते हैं हैक
आरपीएफ के इंस्पेक्टर अजय कुमार सिंह ने बताया कि यह प्रतिबंधित सॉफ्टवेयर है। इसके उपयोग से कंप्यूटर में लिंक का स्पीड बढ़ जाता है। साथ ही तत्काल टिकट के समय आईआरसीटीसी के सॉफ्टवेयर को हैक कर तत्काल टिकट बनाने में कामयाब हो जाते हैं। इस वजह से तत्काल टिकट के लिए रेलवे के रिजर्वेशन काउंटर पर लाइन में लगे एक या दो यात्रियों का ही तत्काल टिकट बन पाता है। उसके बाद लाइन में लगे यात्रियों के समय तत्काल टिकट वेटिंग होने लगता है। इससे रेलवे के अधिकृत टिकट काउंटरों से लाइन में लगने के बावजूद यात्रियों को बिना टिकट वापस निराश होना पड़ता है।

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