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मकर संक्रांति की तैयारी:तिल की महक कर रहा तिलकुट खाने काे बेचैन, व्यवसायी भी गदगद

सीवान8 दिन पहले
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कोरोनाकाल में आर्थिक मंदी के बीच मकर संक्रांति में तिलकुट की मंडी में व्यापारी गदगद हैैं। यहां बनने वाले विभिन्न स्वाद और गुणवत्ता के तिलकुट की मांग जिले में बढ़ गई है। ग्रामीण क्षेत्रों में भी इसकी आपूर्ति हो रही है। तिलकुट के व्यवसाय में उछाल से कारोबार लगभग तीस लाख रुपए तक पहुंच गया है। सर्द मौसम, मकर संक्रांति व परंपरागत इम्यूनिटी पावर के लिए मशहूर तिलकुट बनाने का कार्य परवान पर है। मुख्यालय में इसको बनाने के लिए एक दर्जन दुकानों में मिस्त्री और मजदूर दिन रात काम कर रहे हैं। तिलकुट जिले के विभिन्न इलाकों सहित अन्य जिलों में भी बिक्री की जा रही है। शहर से छोटे दुकानदार तिलकुट की खरीदारी करते हैं। कारोबार की शुरुआत नवंबर माह में होती है। जो कि 14 जनवरी के बाद समाप्त होने लगती है। इस साल का कारोबार करोड़ तक जाने की संभावना हैं। व्यसाइओ के अनुसार लागत की अपेक्षा मुनाफा कब मिल रहा है। तिलकुट बनाने के साथ इसकी बिक्री के लिए मुख्यालय सहित आसपास के गांव बाजार सहित अन्य दुकानें भी स्पेशल रूप से खोली गई हैं।

ढाई महीने के लिए ठेके पर लाए जाते हैं कारीगर
दुकानदारों के अनुसार 14 जनवरी को मकर संक्रांति के साथ तिलकुट बनाने और बिक्री का कारोबार बंद हो जाता है। दूसरे जिले से ढाई महीने के ठेका पर आते हैं। कारोबार बंद होने के बाद अपने घर चले जाते हैं। तिलकुट बनाने में चीनी गुड़, उजला और काला तिल उपयोग होता है। अधिकांश उजाला और काला तिल का तिलकुट बनता है। मांग के अनुसार काला तिलकुट भी बनता है।

मकर संक्रांति के बाद नहीं रहती मांग
मुख्यालय में तिलकुट बनाने का कार्य और व्यवसाय से जुड़े व्यवसाइओ ने बताया कि लागत और मेहनत के अनुसार इस व्यवसाय में कारोबार के अनुसार मुनाफा नहीं है। फिर भी इस कार्य को ग्राहकों पर पकड़ के लिए करना पड़ता है। तिलकुट के बाद पेठा बनाने, फल बिक्री का कार्य भी किया जाता है। जिससे बिक्री वाले ग्राहक हमेसा से जुड़े रहते हैं। वही व्यवसायियों के अनुसार घाटा होने पर ग्राहकों की जुड़ाव के कारण दूसरे व्यवसाय में मुनाफा मिल जाता है। जिसे घाटे की भरपाई हो जाती है। 14 जनवरी के बाद दूसरे व्यवसाय में लग जाते हैं।

बाजार में तिलकुल व अन्य चीजों की कीमत
तिलकुट 280 रुप, किलो।
खोया तिलकुट 560 रुपए किलो।
स्पेशल 460 रुपए किलो।
चांद तिलकुट 400 रुपए किलो।
चीनी तिल पापड़ी 260 रुपए किलो।
काला तिल 320 रुपए किलो।
चिकी 180 रुपए किलो।
रेवड़ी 160 रुपए किलो।
तिल 170 से 200 रुपए किलो।
चीनी 38 रुपए किलो।
गुड़ 50 रुपए किलो।
बासमती चूड़ा 160 रुपए किलो।
चेरी पेठा 100 रुपए किलो।

मांग बढ़ी, पर समय के अनुसार मजदूरी नहीं
तिलकुट कारोबार में जुटे मजदूर गोवा जिले से आए हुए हैं। गोवा से आए मजदूर पिंटू ने बताया कि इस कारोबार में 25 साल से जुड़े हैं। महंगाई बढ़ रही है लेकिन, मजदूरी उस हिसाब से नहीं बढ़ रही है। मकर संक्रांति का इंतजार पूरे साल रहता है। इसके बाद घर का कार्य अन्य मजदूरी कर पेट भरा जाता है।

पहले की अपेक्षा अभी बाजार ठीक हो गया है। मकर संक्रांति को लेकर अच्छी बिक्री हो रही है। पिछले साल इससे भी ज्यादा डिमांड थी। लेकिन, इसबार कोरोना की वजह लोग कम खरीदारी कर रहे हैं।
अमित कुमार, दुकानदार।

मकर संक्रांति के लिए बाज़ार में आए हुए हैं। लगभग सभी सामान की खरीदारी हो गई है। विशेष रूप से तिल व तिलकुट का स्वाद भी लिया हूं। हर तरह के तिलकुट बाजार में उपलब्ध है।
गिरिश कुमार सिंह, ग्राहक।

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