सुविधाओं में कटौती:उसका नाम तो सुंदरी रखाया, पर वहां ऐसा कुछ नहीं, जिससे लगे कि यह सुंदरपुर है

सीवान14 दिन पहले
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गांव में सड़क बनाने की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन करते ग्रामीण। - Dainik Bhaskar
गांव में सड़क बनाने की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन करते ग्रामीण।
  • गांव में न तो सड़क और न ही नाली, पीने के पानी के लिए भी होती है किचकिच
  • ग्रामीणों की शिकायत पर भी अधिकारी नहीं देते ध्यान, जनप्रतिनिधि भी बेखबर

बड़हरिया प्रखंड के सुंदरपुर पंचायत के सुंदरी गांव में जर्जर सड़क से परेशान ग्रामीणों ने शुक्रवार को जर्जर सड़क के बीच खड़े होकर स्थानीय जनप्रतिनिधि के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। ग्रामीणों ने बताया की आस पड़ोस के गांवों से सुंदरी पढ़ने आने वाले छात्र सड़क की बदहाली से काफी परेशान हैं। मंशा बाबा के पास से बदरजीमी गांव को जाने वाली सड़क बिलकुल जर्जर अवस्था में है। दस साल पहले इटकरण किया गया था। जो अभी काफी बेकार हालत में हैं। इस पर कई जगह छोटे बड़े गढ़े बन गए हैं। थोड़े ही बारिश में सड़क पर कीचड़ लग जाता है। बदरजीमी, सवलहाता, भलुई समेत अन्य गांवों से सुंदरी पढ़ने आने छात्रों को प्रतिदिन कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। सड़क की हालत अच्छी नहीं होने के कारण अक्सर आते-जाते समय लोग गिरकर घायल हो जाते हैं। बरसात के दिनों में इसकी स्थिति इतनी बुरी हो जाती है कि इस सड़क से आने-जाने में लोग कतराने लगते हैं। यह सड़क बदरजीमी, सवलहाता, भलुई, महमदपुर, बलेथा, बजरंगमोड़, मीरगंज जाने का सबसे आसान रास्ता है लेकिन लोगों को इसके बदहाली के कारण चार किलोमीटर घूमकर दुसरे रास्ते से जाना पड़ता है। यहां के स्थानीय जनप्रतिनिधि सड़क के प्रति उदासीन बने हुए हैं न ही विगत मुखिया लक्ष्मण प्रसाद तरुण द्वारा इसपर ध्यान दिया गया और न ही वर्तमान मुखिया ने ही इसकी सुधि ली हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जहां सभी गांवों के सड़कों की दशा सुधरने लगी है वहीं सुंदरी गांव स्थित यह सड़क जर्जर बना हुआ है। इसी सड़क से अपने फसलों को ढो कर घर ले जाते हैं। इसके लिए कोई दूसरा रास्ता नहीं है।

जनप्रतिनिधियों के खिलाफ ग्रामीणों ने की नारेबाजी, गांव में मांगी सुविधा

शुक्रवार को स्थानीय लोगों ने जनप्रतिनिधि के खिलाफ जर्जर सड़क के बीच में खड़े होकर विरोध प्रदर्शन किया और जल्द से जल्द सड़क निर्माण के लिए मांग की है। विरोध में शामिल छात्र राहुल कुमार, झुना कुमार, पंकज कुमार, विकास कुमार, प्यासा कुमार, राजीव कुमार, विजय कुमार, उमाशंकर प्रसाद ने बताया कि पूरे पंचायत के अंदर कहीं भी बेहतर सड़क का निर्माण नहीं कराया गया है। दस साल पूर्व ईटाकरण कराई गई थी लेकिन उसके बाद देखरेख नहीं होने के कारण ईट भी सड़क से टूट फूट कर नष्ट हो चुकी है। जिसका खामियाजा हम ग्रामीणों को भुगतनी पड़ रही है। चुनाव के समय सभी जनप्रतिनिधि आते हैं और सड़क बनवाने का आश्वासन देकर चुनाव जीत जाते हैं। इस बार भी वैसा ही हुआ। अब तक किसी के द्वारा सड़क को बनाने का कार्य नहीं किया गया है।

शिकायत पर भी नहीं हुई कार्रवाई
पूरी पंचायत में जर्जर सड़क से हम सभी परेशान हैं। दर्जनों बार शिकायत की गयी लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई है। लोग अभावों की जिंदगी जीने को मजबूर हैं। जनप्रतिनिधियों को भी कोई फर्क नहीं पड़ता है।
राजीव कुमार, ग्रामीण।

बरसात में घर से निकलना मुश्किल
बरसात के दिनों में सड़क से होकर चलना भी मुश्किल हो जाता है। चार पहिया वाहन भी नहीं निकल पाता है तो साइकिल और बाइक से कोई सवाल ही नहीं उठता है। हर दिन रोज दुर्घटना का शिकार हो जाते हैं।
पंकज कुमार, ग्रामीण।

सड़क पर ही बहता है घरों का पानी, पैदल चलना भी मुश्किल
पूरा पंचायत के अंदर कहीं भी पक्की नाला का निर्माण नहीं कराया गया है। जिससे घरों के सभी दूषित पानी मुख्य सड़क पर ही बह रहर है। जो कि हमेशा संक्रमित होने का खतरा बना रहता है। छिड़काव भी नहीं किया जाता है। मच्छरों का प्रकोप हमेशा रहता है। स्थानीय बीडीओ से शिकायत भी किया गया लेकिन उनके द्वारा भी कोई पहल नहीं किया गया। सीओ से शिकायत करने पर उन्होंने आकर देखा था लेकिन उसके बाद भी कहीं कुछ नहीं हुआ। हम पूरे ग्रामीणों को दूषित पानी में आवाजाही करना पड़ता है। छात्र छात्राओं को स्कूल या बाजार जाने के लिए इसी सड़क से होकर जानी होती है। इसमें हमेशा बच्चे गिर कर घायल होते हैं। बच्चों का ड्रेस भी खराब हो जाता है। इसका जवाब देने वाला कोई नहीं है। रात के समय अगर किसी का तबीयत खराब हो जाए तो एंबुलेंस दरवाजे तक नहीं पहुंचती हैं। उन्हें गांव के बाहर ही मोड़ के समीप रोक दी जाती है और मरीज को बाइक से या कंधे लगाकर एंबुलेंस तक लाई जाती हैं। डिजिटल जमाने में भी इस तरह की स्थिति उत्पन्न होगी। कल्पना करना भी मुश्किल है। ग्रामीण उमाशंकर प्रसाद ने बताया कि बदरजीमी बाजार से सुंदरी आने के लिए एक बांध बनाया गया जो आगे बरगद के पेड़ के पास जाकर पतला हो गया है। जिससे कोई चारपहिया वाहन नहीं जा सकता। उन्होंने बताया कि इस मार्ग से प्रतिदिन सैकड़ों खरीदार और विक्रेता सुन्दरी बाजार आते हैं। बरसात आते ही पढ़ने आने वाले विद्यार्थियों को मजबूरी वश इस रास्ता को छोड़ना पड़ता है।

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