शहाबुद्दीन के मकबरे पर फिर विवाद:परिवार के एक करीबी ने कहा- साजिश कर रोका गया काम, दूसरे ने कहा- फाइनल टच बाकी

सीवान6 महीने पहले
सीवान के पूर्व सांसद दिवंगत मो शहाबुद्दीन। (फाइल)

सीवान के पूर्व सांसद दिवंगत मो शहाबुद्दीन का मकबरा बनने में रुकावट की खबरों ने खूब सुर्खियां बटोरी थी। बताया गया कि मकबरा बनाने पर कोर्ट ने रोक लगा दी है। हालांकि, अब इस मामले में दो अलग-अलग तरह के बयान आ रहे हैं। इस मामले में शहाबुद्दीन परिवार के करीबी माने जाने वाले RJD के दो नेता अलग-अलग बयान दे रहे हैं।

RJD नेता हामिद रजा उर्फ डब्लू खान का कहना है, 'साहब (मो शहाबुद्दीन) का भव्य मकबरा बनना चाहिए। वो सिर्फ अकलियत के नहीं, बल्कि पूरे समाज के नेता थे। उनके चाहने वालों ने उनकी याद में मकबरा बनाने के लिए देश के कोने-कोने से तरह-तरह के पत्थरों का इंतजाम किया है, लेकिन इसमें साजिश के तहत अड़चन पैदा की जा रही है।'

उन्होंने कहा, 'सरकार को चाहिए कि उनकी याद में बड़ा मकबरा बनाने की पहल की जाए। अगर सरकार पहल नहीं करती है तो उनके चाहने वाले खुद आगे की व्यवस्था करेंगे।' हालांकि, हामिद रजा ने यह नहीं बताया कि मकबरा न बनने देने की साजिश करने वाले लोग कौन हैं?

बाएं से हामिद रजा और अदनान।
बाएं से हामिद रजा और अदनान।

दूसरी ओर RJD के प्रदेश महासचिव अदनान अहमद सिद्दीकी ने रुकावट की खबर को अफवाह बताया है। उन्होंने कहा है, 'मकबरा का कार्य लगभग पूरा हो गया है। फाइनल टच देना बाकी है। परिवार में वैवाहिक कार्यक्रम होने के चलते विलंब हुआ है। मकबरा जल्द बनकर तैयार होगा।'

अभी क्या है मकबरे की स्थिति

जानकारी के अनुसार, अभी मकबरे की स्थिति वही है, जो जून में थी। तब ही इसे बनाने को लेकर विवाद शुरू हुआ था। शहाबुद्दीन के शव को दिल्ली गेट स्थित जदीद कब्रिस्तान में दफनाया गया था। कब्र को यादगार बनाने के लिए परिजनों ने मकबरा बनाने की कोशिश की। इसकी जानकारी मिलते ही जदीद कब्रिस्तान कमेटी ने विरोध कर दिया। विरोध के बावजूद थोड़ा बहुत काम हुआ। कमेटी ने पुलिस भी बुलवाई। बाद में हंगामा बढ़ता देख परिजनों ने काम रुकवा दिया।

कहा जा रहा है कि मरहूम पूर्व सांसद के परिजन कब्र पर बड़ा मकबरा बनाना चाहते हैं, लेकिन कब्रिस्तान कमेटी के कानून और वक्फ बोर्ड ने इसकी इजाजत नहीं दी है। मामले में दिल्ली में आम आदमी पार्टी के विधायक मो नेमतुल्लाह ने भी अपनी ओर से कोशिश की थी, लेकिन उसका कोई खास परिणाम नहीं निकला। इधर, इस पूरे मामले पर पूर्व सांसद के परिवार का कोई भी सदस्य कुछ भी कहने से बच रहा है।

जून माह में काम रोके जाने के वक्त मकबरे की स्थिति।
जून माह में काम रोके जाने के वक्त मकबरे की स्थिति।

1 मई को कोरोना संक्रमण से हुई थी मौत

दिल्ली के तिहाड़ जेल में आजीवन कारावास की सजा काट रहे शहाबुद्दीन कोविड-19 से संक्रमित हो गए थे। 1 मई को इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई थी। उनके परिजन शव को बिहार के सीवान में पैतृक गांव प्रतापपुर में दफनाना चाहते थे, लेकिन कोरोना संक्रमण के खतरे को देखते हुए इसकी इजाजत नहीं दी गई थी। आखिर में शहाबुद्दीन के शव को दिल्ली गेट के जदीद कब्रिस्तान में दफना दिया गया था। बाद में इस पर खूब राजनीति भी हुई थी।

शहाबुद्दीन की कब्र को मकबरा बनाने पर विवाद: दिल्ली में कब्र को चुपके से पक्का करा रहे थे परिजन, कमेटी ने रोका

(इनपुट: धनंजय सिंह तोमर)

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