पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

अनदेखी:दांतों के डॉक्टर भी हैं और मशीन भी, बावजूद नहीं होता इलाज

हसनपुरा8 दिन पहले
  • कॉपी लिंक
  • गुरुजवा जलालपुर स्थित हसनपुरा स्वास्थ्य केंद्र का हाल, लाखों रुपए खर्च करने के बाद भी ग्रामीणों को नहीं मिल रही स्वास्थ्य सुविधा

ग्रामीण क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने की बात भी कही जा रही है, परंतु गुरुजवा जलालपुर स्थित हसनपुरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में यह सारे दावे फेल नजर आते हैं। सांसद मद से 3 करोड़ 51 लाख 56 हजार की लागत से बनी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का निर्माण जब हुआ, तो क्षेत्र के लोगों को उम्मीद जगी थी कि अब यहां स्वास्थ्य से जुड़ी सारी व्यवस्थाएं मौजूद रहेंगी। लेकिन डेंटल सेवा कब शुरू होगी इसका भगवान हीं मालिक है। सरकार की तरफ से हर तरह की सुविधा उपलब्ध करा दी गई है। लेकिन अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही से अभी तक यह सुविधा नहीं मिल पा रही है। यहां पर डेंटल डॉक्टर को नियुक्त हुए लगभग दो वर्ष होने वाले हैं। इसी तरह डेंटल मशीन को आए हुए भी करीब नौ से दस महीने हो गए। डेंटल चेयर मशीन की कीमत 12-15 लाख है। जो अस्पताल में मरीजों के लिए प्रदर्शनी से कम नही है। वही सूत्र बताते है कि व्यवस्था की बदहाली का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि यहां विगत दो साल से एक भी दंत रोगी का उपचार नहीं हुआ है।

प्रतिदिन पांच से छह मरीज इलाज कराए बगैर लौटते हैं घर

प्रखंड क्षेत्र के अरंडा, हसनपुरा, शेखपुरा, रजनपुरा, उसरी बुजुर्ग आदि गांवों के पांच से छह लोग कोई दांत में खोड़ला, मसूड़ा में दर्द, पायरिया आदि से ग्रसित लोग स्वास्थ्य केंद्र पहुंचते है। लेकिन इलाज के अभाव में निजी क्लिनिक या बाहर का रुख करना पड़ता है। दांत से ग्रसित बड़ी सरैयां के रहने वाले गोलू कुमार, संजय कुमार, राजा कुमार ने दांत में दर्द तो वही शेखपुरा से नेसार अली, अजबुद्दीन, शेख मुन्ना, मल्लू खान, तबरेज अंसारी ने मसूड़ा में दर्द जबकि मलहिडीह से राजेन्द्र, मबिंद्र, रबिन्द्र, अशोक, शैलेश ने बताया कि दांतों में खोड़ीला के अलावा पायरिया की शिकायत थी। जिसको लेकर गुरुजवा जलालपुर स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे। लेकिन न दंत चिकित्सक मिले और न ही इलाज हुआ। फिर बाहर आकर निजी क्लिनिक का सहारा लेना पड़ा।

दांत के डॉक्टर कर रहे सर्दी, खांसी व उल्टी का इलाज
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में अजीब सिस्टम काम कर रहा है। अस्पताल में जो डॉक्टर्स हैं, उनके लिए इलाज के उपकरण से लेकर संसाधन भी उपलब्ध हैं। फिर भी 67 हजार रुपये वेतन ले रहे डॉक्टर्स चाहकर भी अपनी क्षमता का उपयोग नहीं कर रहे हैं। आलम यह है कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा यहां भेजी गई डेंटल सर्जन दांतों के इलाज की बजाए ओपीडी में सर्दी, खांसी व उल्टी-दस्त के मरीजों का इलाज कर रहे हैं। इस वजह से दांतों से संबधित मरीजों का इलाज नहीं हो रहा है।

उपकरण की है कमी
हसनपुरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी अभय कुमार ने कहा कि कुछ सामान उपलब्ध नही है। एक सहायक असिस्टेंट की जरूरत है।

सहायककर्मी की जरूरत
दंत चिकित्सक नफीस आलम ने कहा कि कुछ सामान नहीं होने व एक सहायक कर्मी की जरूरत है। जो दंत की सर्जरी करने में सहयोग कर सकें।

खबरें और भी हैं...