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परेशानी:हजारों यात्री हर दिन करते हैं सफर, पर बस स्टैंडों में न तो प्रतीक्षालय है, न पानी और न ही शौचालय, अनदेखी से लोगों में गुस्सा

सीवान9 महीने पहले
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  • सुविधा को लेकर न तो कभी अधिकारियों ने ध्यान दिया है और न ही जनप्रतिनिधियों ने

शहर का ललित बस स्टैंड, बड़हरिया स्टैंड, तरवारा मोड़ के समीप स्टैंड समेत सभी बस स्टैंडो में यात्रियों के लिए कोई सुविधा नहीं है। स्टैंडो में यात्री प्रतीक्षालय, सुलभ शौचालय आदि नहीं होने से यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।

विभिन्न रूटो में शहर में रोजाना 50 से अधिक बसों का आना-जाना होता है। रोजाना हजारों यात्री सफर करते हैं। यहां बस स्टैंड के प्रतीक्षालय में यात्रियों के बैठने की भी सुविधा नहीं है। बेंच या चबूतरा नहीं होने के कारण लोगों को मजबूरन फर्श पर बैठना पड़ता है। बस स्टैंड की तमाम देखरेख का कार्य बस स्टैंड इंचार्ज पर होता है। लेकिन बस स्टैंड पर इंचार्ज की पद गत दो माह से खाली है।

विश्राम की व्यवस्था नहीं

बस स्टैंड निर्माण पर लाखों खर्च करने के बावजूद आलम ये है कि बस स्टैंड पर यात्रीगण के साथ साथ रोडवेज कर्मियों को परेशानी होती है। रात्रि ठहराव की बसों के चालक परिचालकों की रात्रि विश्राम का इंतजाम नहीं है। रात्रि ठहराव की बसों के कर्मियों के विश्राम की व्यवस्था का जिम्मा रोडवेज विभाग का होता है। जहां कर्मियों के लिए ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है।

बस स्टैंडों पर यात्रियों को देनी होंगी ये सुविधाएं
बस स्टैंड में कर्मचारियों व यात्रियों की जरूरत को देखते हुए पेयजल व्यवस्था, यात्रिायों के लिए विश्रामालय, शौचालय, बाथरूम, यात्रियों के ठहराव की व्यवस्था, रात को रोशनी की व्यवस्था, बसों के लिए काउंटर तथा यात्रियों के लिए बैंच आदि की पर्याप्त व्यवस्था होना अनिवार्य है।

लेकिन विभागीय उपेक्षा के चलते नियमों को दरकिनार कर दिया गया है। सीवान से गोपालगंज जाने वाली सोनी देवी, सीमा बरनवाल, आंसू कुमारी और बड़हरिया स्टैंड से रोशनी, खुशबू ने बताया कि स्टैंडों में किसी तरह की व्यवस्था नहीं हं। शौच, पानी की भारी दिक्कत है।

प्यास बुझाने के लिए इधर-उधर भटकते हैं यात्री
शहर में बनाए गए स्टैंडों में पानी की व्यवस्था नहीं है। यात्री पानी के लिए इधर&उधर भटकते है। गर्मियों के मौसम शुरू होते ही यात्रियों को सोचना पड़ता है कि पानी कहां से पिए। छोटे-छोटे बच्चे पानी पीने के लिए रोते नजर आते हैं। वही शौचालय की भी व्यवस्था नहीं है।

पुरुष यात्री तो सड़क किनारे या इधर उधर जाकर शौच कर लेता है लेकिन सबसे ज्यादा समस्या महिलाओं को होती है। बाथरूम जाने के लिए महिलाएं स्टैंडो के आस पास घरों में रहने वाले लोगों की सहयता से घरों में जाकर बाथरूम करती है। कभी कभी हालात ऐसे भी होते है की डर के वजह कोई अपने घर में बाथरूम के लिए महिलाओं को आने नहीं देता है।

बैठने के लिए पैसा जरूरी
ग्रामीण समेत अन्य क्षेत्रों से आने वाले यात्रियों को बस स्टैंड के बाहर सड़क पर ही बैठना होती है। वहीं स्टैंड में बनाएं गए चाय दुकान या अन्य दुकानों पर यात्रियों को बैठने के लिए चाय समोसे नमकीन खाने पड़ते हंै। यात्रियों की मजबूरी होती है कि दुकानों में बैठने के लिए कुछ न कुछ खाने होते हैं।

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