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सतर्कता जरूरी:कोरोना से बचने के लिए 410435 लोगों ने फर्स्ट व 87115 ने ली वैक्सीन की दूसरी डोज

सीवानएक महीने पहले
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मिडिल स्कूल रेलवे कॉलोनी में वैक्सीन लेती युवती। - Dainik Bhaskar
मिडिल स्कूल रेलवे कॉलोनी में वैक्सीन लेती युवती।
  • शत-प्रतिशत टीकाकरण के लिए प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी लगा रहे जोर

काेरोना वायरस से बचाव के लिए वैक्सीन लेना अति आवश्यक है। तभी इस बीमारी से लोग लड़ सकते हैं। हालांकि अभी मास्क लगाना और सोशल डिस्टेंस का पालन करना भी अति आवश्यक है। इन सभी हथियार से ही करोना वायरस का संक्रमण पूरी तरह से खत्म किया जा सकता है। संक्रमण से बचाव के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा टीकाकरण पर भी जोर दिया जा रहा है। अब तक इस जिले में 497550 वैक्सीन कोरोना वायरस से बचाव के लिए लगाया गया है। स्वास्थ्य विभाग के डीपीएम ठाकुर विश्वमोहन ने बताया कि इसमें फर्स्ट डोज लेने वाले लोगों में 410435 लोग शामिल हैं। जबकि सेकंड डोज लेने वाले लोगों में 87115 लोग शामिल है। वैक्सीनेशन के लिए शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों में कैंप लगाकर टीकाकरण किया जा रहा है। इसके अलावा वैक्सीनेशन एक्सप्रेस भी चलाई जा रही है, जो गांव में घूम कर भी लोगों को वैक्सीन दे रही है। इधर वैक्सीनेशन को लेकर लोगों के प्रति जागरूकता भी बढ़ी है। उन्होंने बताया कि तीसरी लहर से बचने के लिए तमाम लोगों को समझदारी से कदम उठाने की जरूरत है। जरा सी भी लापरवाही हुई तो समाज के लिए खतरनाक साबित होगी। दो साल से संक्रमण के बारे में तमाम लोगों को जानकारी हो गयी है। इसी के अाधार पर सतर्क रहने की जरूरत है। अब भी बिना काम के घरों से नहीं निकलें। सोशल डिस्टेंस तो बहुत ही जरूरी है।

तीसरी लहर से बचने के लिए लापरवाही नहीं, समझदारी से उठाना होगा कदम

तीसरी लहर से बच्चों को बचाने के लिए कवायद तेज जागरुकता और वैक्सीनेशन पर दिया जा रहा है जोर

वैश्विक महामारी कोरोना संक्रमण की तीसरे लहर से बच्चों को बचाने की कवायद शुरू कर दी गई है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर गाइडलाइन जारी किया गया है जिसमें कहा गया है कि कोरोना के वयस्क रोगियों के उपचार में काम आने वाली आइवरमेक्टिन, हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन, फैविपिराविर जैसी दवाएं और डाक्सीसाइक्लिन व एजिथ्रोमाइसिन जैसी एंटीबायोटिक औषधियां बच्चों के उपचार के लिए अनुशंसित नहीं हैं क्योंकि कोरोना पीड़ित बच्चों पर इनका परीक्षण नहीं किया गया है।

महामारी के मामलों में एक अंतराल के बाद फिर वृद्धि होने की आशंकाओं के बीच सरकार ने बच्चों के लिए कोरोना देखरेख केंद्रों के संचालन के वास्ते दिशा-निर्देश तैयार किए हैं। दिशा-निर्देशों में कहा गया है कि कोरोना वायरस से गंभीर रूप से संक्रमित बच्चों को चिकित्सा देखभाल उपलब्ध कराने के लिए कोरोना देखरेख प्रतिष्ठानों की मौजूदा क्षमता में वृद्धि की जानी चाहिए। बच्चों के लिए कोरोना रोधी टीके को स्वीकृति मिलने की स्थिति में टीकाकरण में ऐसे बच्चों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए जो अन्य रोगों से पीड़ित हैं और जिन्हें कोरोना का गंभीर जोखिम है। स्वास्थ्य सुविधाओं और कोरोना से बचने को लेकर जारी गाइडलाइन की जानकारी अभिभावकों को हर हाल में रखनी चाहिए।

पर्याप्त संख्या में प्रशिक्षित डाॅक्टर और नर्स की जरूरत
पर्याप्त संख्या में प्रशिक्षित डाक्टर और नर्से भी उपलब्ध कराई जानी चाहिए। बच्चों की उचित देखभाल के लिए स्वास्थ्य अधिकारियों को क्षमता बढ़ाने के कार्यक्रम शुरू करने चाहिए। बच्चों के अस्पतालों को कोरोना पीडि़त बच्चों के लिए अलग बिस्तरों की व्यवस्था करनी चाहिए। कोरोना अस्पतालों में बच्चों की देखभाल के लिए अलग क्षेत्र बनाया जाना चाहिए जहां बच्चों के साथ उनके माता-पिता को जाने की अनुमति हो। बच्चों के उपचार से जुड़े उपकरणों की उपलब्धता जरूरी है।

संयुक्त प्रयास से ही कोरोना से मुक्ति पाने में मिलेगी सफलता, नहीं चलेगी लापरवाही
अगले तीन-चार महीनों में संभावित तीसरी लहर के दौरान संक्रमण के मामलों में किसी भी वृद्धि से निपटने के लिए निजी और सार्वजनिक क्षेत्र को संयुक्त रूप से प्रयास करने की आवश्यकता है। बच्चों की देखरेख के लिए अतिरिक्त बिस्तरों का अनुमान महामारी की दूसरी लहर के दौरान विभिन्न जिलों में संक्रमण के दैनिक मामलों के चरम के आधार पर लगाया जा सकता है। इससे बच्चों में संक्रमण के संभावित मामलों के साथ ही यह अनुमान भी लगाया जा सकता है कि उनमें से कितनों को भर्ती करने की आवश्यकता पड़ेगी। दिशा-निर्देशों में कहा गया है, ‘कोरोना से गंभीर रूप से बीमार बच्चों को देखभाल (चिकित्सा) उपलब्ध कराने के लिए मौजूदा कोरोना देखरेख केंद्रों की क्षमता बढ़ाना वांछनीय है।

अस्पतालों में आईसीयू सेवाएं बढ़ाने की भी है जरूरत
गाइडलाइन में कहा गया है कि मल्टीसिस्टम इंफ्लेमेटरी सिंड्रोम से पीडि़त ऐसे बच्चे जो कोरोना से गंभीर रूप से संक्रमित न हों, की बच्चों के वर्तमान अस्पतालों में ही देखभाल की जानी चाहिए। इन अस्पतालों में एचडीयू और आइसीयू सेवाएं बढ़ाने की भी जरूरत है। सामुदायिक व्यवस्था में घर पर बच्चों के प्रबंधन और भर्ती कराने की जरूरत पर निगरानी रखने के लिए आशा और एमपीडब्ल्यू को शामिल किया जाना चाहिए। इसमें सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं और समुदाय समेत सभी पक्षकारों को प्रशिक्षण प्रदान करने पर भी बल दिया गया है।

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