पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

सुविधा:दरौंदा स्टेशन पर लगेगी वाटर एटीएम, यात्रियों को शुद्व पेयजल उपलब्ध कराने की तैयारी

सीवान9 महीने पहले
  • कॉपी लिंक
  • तीसरा गुड्स प्लेटफॉर्म चालू होने से व्यवसाय में होगी बढ़ोतरी, रेलवे से माल और तेजी से आएगी

रेलवे यात्रियों को कई तरह की सुविधाएं उपलब्ध कराने की तैयारी कर रहा है। ताकि यात्रियों को किसी भी तरह की कठिनाइयों का सामना नहीं करना पड़े। सीवान स्टेशन के डीसीआई गणेश यादव ने बताया कि दरौंदा रेलवे स्टेशन पर वाटर एटीएम लगाने की तैयारी की जा रही है। इसके लिए स्थान उपलब्ध करा दिया गया है। वाटर एटीएम लग जाने से रेल यात्रियों को शुद्व पानी मिलने लगेगा। सीवान स्टेशन के सर्कुलेटिंग एरिया में पहले से ही वाटर एटीएम लगा हुआ है। इधर, सिसवन ढाला पर जाम से निजात दिलाने के लिए सिसवन ढाला से चांप तक सड़क बनाई जाएगी। इसके लिए अधिकारियों ने निरीक्षक कर अपनी सहमति दे दी है। अब डीपीआर तैयार कर निर्माण के लिए टेंडर प्रक्रिया अपनाई जाएगी। वहीं सीवान स्टेशन के मालगोदाम में तीसरा प्लेटफार्म बन रहा है। यह प्लेटफॉर्म पर नए साल में पूरी तरह से बनकर तैयार हो जाएगा। इससे सीवान में मालगाड़ियों के रैक लगने का काम तेज हो जाएगी। इससे व्यवसाय के क्षेत्र में बढ़ावा मिलेगा। अभी सीवान में प्रति माह 60 से 70 रैक खाली होती होता है। तीसरा गुड्स प्लेटफॉर्म बन जाने से प्रति माह लगभग 100 रैक खाली होने लगेगा। इससे यहां के व्यवसायियों को दूसरे स्थानों या दूसरे माध्यम से माल मंगाने की समस्या से निजात मिल जाएगी और वे रेलवे से ही समय पर माल मंगा सकेंगे। इधर, दरौंदा- मशरक रेलखंड पर नए साल में इलेक्ट्रिक इंजन से ट्रेनें चलेगी। रेल संरक्षा आयुक्त लखनऊ मो. लतिफ खां द्वारा निरीक्षण करना है। निरीक्षण में अगर सबकुछ ठीक- ठाक रहा तो वे परिचालन अधिकारियों को विद्युत इंजन से ट्रेन चलाने का निर्देश देंगे। अगर निरीक्षण के दौरान कोई खामी पाई गई तो इस संदर्भ में वे सुधार के लिए आवश्यक निर्देश देंगे। हालांकि निरीक्षण के दौरान खामी मिलने की संभावनाएं नहीं रहती है। कारण कि इसके पहले कई स्तर पर इसका निरीक्षण हो गया है। वाराणसी रेल मंडल के पीआरओ अशोक कुमार ने बताया कि नए साल में जनवरी के अंत तक यह विद्युतीकरण रेलखंड चालू हो जाएगा। इस रेलखंड में दरौंदा के बाद महाराजगंज, बसंतपुर समेत अन्य कई स्टेशन है।

रेलवे के खर्च में आएगी कमी और पर्यावरण में प्रदूषण भी रुकेगा
इधर, पीआरओ ने बताया कि इलेक्ट्रिक इंजन से ट्रेन के परिचालन कराने से रेलवे को आर्थिक बचत भी है। डीजल इंजन से ट्रेन चलाने पर ज्यादा खर्च करनी पड़ती है। जबकि विद्युत से ट्रेन चलाने पर खर्च कम है। साथ ही पर्यावरण संरक्षण भी होता है। डीजल की वजह से पर्यावरण में प्रदूषण भी फैलता है। लेकिन इलेक्ट्रिक इंजन से ट्रेन परिचालन से पर्यावरण को कोई खतरा नहीं होता है। इधर, यात्रियों के लिए भी भविष्य में लाभ होंगे। छपरा- सीवान रेलखंड प्रभावित होने पर ट्रेनों को छपरा से थावे रुट से ट्रेनों का परिचालन कराई जाती है। लेकिन विद्युत इंजन से ट्रेन चलने से इस स्थिति में मशरक के रास्ते इस रुट पर ट्रेनें बिना रुकावट की चलाई जा सकती है। जबकि लम्बी दूरी की ट्रेनें इलेक्ट्रिक इंजन से चलाई जाती है और जरूरत पड़ने पर इस रुट पर डीजल इंजन उपलब्ध नहीं होने से थावे रुट से ट्रेनों का परिचालन कराना पड़ता है। इसके अलावा भी ट्रेन परिचालन को और बेहतर करने का प्रयास किया जा रहा है।

खबरें और भी हैं...