हादसा:लालगंज से नाव लेकर बालू निकालने के लिए कोईलवर गए मजदूर हादसे के हुए शिकार, 19 में से पांच लापता

सोनपुर2 महीने पहले
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  • नाव पर 19 से अधिक मजदूर थे सवार, अधिक बालू लदे होने की वजह से हुआ हादसा

कोईलवर के समीप मंगलवार की सुबह सोन नदी में बालू लदी नाव के अचानक डूबने से उस पर सवार 19 मजदूरों में से पांच लापता हैं। सुबह 10 बजे की घटना के बाद मामले की जानकारी होने पर देर शाम तक खोजबीन जारी रही। मिली जानकारी के अनुसार लालगंज बलहा बसन्त के रमेश राय की नाव कोईलवर से बालू लाद कर वापसी के लिए चली थी। नाव पर क्षमता से अधिक बालू लदे होने के कारण अचानक नाव डूबने लगी। देखते देखते नाव गहरे पानी में समा गई और उसपर सवार सभी मजदूर डूबने लगे।

हालांकि, किसी तरह 14 मजदूर पानी में मिले सहारे से बच निकले, लेकिन बताया जाता है कि 5 मजदूरों का कोई अता-पता नहीं चल सका। इसमें तुर्की व कुढ़नी के मजदूरों समेत सोनपुर के आनंदपुर का धुरेन्द्र राय का करीब 26 वर्षीय पुत्र वीरचन्द्र राय भी शामिल है। वहीं घटना में सोनपुर के करीब आधा दर्जन मजदूरों की जान इस हादसे में बच गई है। बताया जाता है कि वीरचन्द्र बालू निकालने में मजदूर के रूप में कार्य कर अपने परिवार का भरण पोषण करते थे। उसके छोटे छोटे दो बच्चे हैं।

तीन दिन पूर्व भी मनेर के हल्दी छपरा के पास हुआ था नाव हादसा
बताते चलें कि तीन दिन पूर्व ही मनेर के हल्दी छपरा के पास बालू लदे नाव हादसे में सबलपुर नेवल टोला व पछियारी के तीन मजदूरों की जान गई थी। इसके पहले भी गंगा नदी में कई बार हादसे हो चुके हैं। जनवरी में गंगाजल टोला के सामने दो नावों की टक्कर में बालू लदे नाव के डूबने से 4 मजदूर लापता हो गए थे। यह सभी भी सोनपुर के सबलपुर के ही थे। इस घटना के बाद एक सप्ताह के भीतर काफी मशक्कत के उपरांत बारी-बारी से सभी डूबे मजदूरों का शव बरामद किया गया है।

सबलपुर के पास गंगा नदी में भी बालू नदी नाव डूबने से दो लोग डूब गए थे
बीते दिनों सबलपुर के सामने ही गंगा नदी में बालू लदा नाव डूब जाने से दो लोग डूब गए थे। काफी मशक्कत के बाद दोनों शवों को बरामद किया गया था। हालांकि, काफी खोजबीन के बाद भी एसडीआरएफ की टीम को सफलता नहीं मिली थी, लेकिन बाद में लोगों ने ही शवों को बरामद किया था। वहीं बीते माह बालू कारोबार में ही रंगदारी के लिए एक मजदूर की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। पश्चिमी पंचायत के रायपुर हसन का मजदूर रहने वाला था। सोन नदी से बालू लेकर वे सभी मजदूर आ रहे थे। इसी दौरान मनेर में रंगदारी के लिए विरोध करने पर बदमाशों ने गोली मार दी थी।

रोक के बावजूद बालू उत्खनन जारी
बालू के उत्खनन एवं भंडारण पर रोक के बावजूद यह सिलसिला जारी ही है। जान पर खेलकर कड़ी मेहनत के बाद बालू निकालने वाले यह मजदूर अत्यंत ही गरीब परिवारों के होते हैं। बालू कारोबार से जुड़े सूत्र बताते हैं कि नाव पर रहने वाले मजदूर ही सही मायने में बालू खरीद-बिक्री के मालिक होते हैं। इसका 70 फीसदी हिस्सा मजदूरों में बंटता है जबकि बालू के लाभ का मात्र 30 फीसदी ही नाव के मालिक को प्राप्त होता है। बालू का उत्खनन तथा इसके खरीद-बिक्री का जिम्मा मजदूरों का होता है। दूसरी ओर विडंबना यह है कि इतनी मशक्कत के बाद भी गंगा नदी से बालू उत्खनन करने वाले इन मजदूरों का जीवन सुरक्षित नहीं होता। कभी पुलिस का छापा तो कभी रंगदार का खौफ तो कभी नाव हादसा।

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