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परिचर्चा आयोजित:हिन्दी दिवस पर सूर्यपुरा में परिचर्चा का आयोजन, 1953 से हिन्दी दिवस मनाने की हुई थी शुरूआत

सूर्यपुरा10 दिन पहले
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सूर्यपुरा में हिंदी पर परिचर्चा में शामिल लोग। - Dainik Bhaskar
सूर्यपुरा में हिंदी पर परिचर्चा में शामिल लोग।
  • हिन्दी राष्ट्रभाषा, यह सभ्यता और संस्कृति की परिचायक

हिन्दी दिवस के अवसर पर मंगलवार को सूर्यपुरा प्रखंड मुख्यालय स्थित राजा साहब के बड़ा तालाब के पास हिंदी परिचर्चा का आयोजन किया गया। जिसकी अध्यक्षता शिक्षक धनेश्वर प्रसाद जबकि संचालन उपसरपंच अभय सिन्हा ने किया। हिन्दी दिवस पर सर्वप्रथम बोलते हुए समाजसेवी अनिल सिंह चंद्रवंशी ने कहा कि आज भी बहुत से लोग सोशल मीडिया पर अंग्रेजी में ही लिखते हैं तथा सरकारी एवं निजी चिकित्सक भी दवाई का नाम अंग्रेजी में लिखते हैं।

जिसके कारण हम ग्रामीण लोगों को पढ़ने और समझने में काफी परेशानी होती है। इसलिए हम सभी को यह कोशिश करनी चाहिए कि हिंदी में ही दवाई के लिए सलाह दें। वही रजनीकांत पांडेय ने कहा कि हिंदी हमारी मातृभाषा है, इस लिए हम सबों को हिंदी भाषा को ही अधिक से अधिक अपनाना चाहिए इसलिए कि हिंदी हमारी सभ्यता और संस्कृति की परिचायक है।

शिक्षक विकास कुमार ने कहा कि साल 1953 से हिंदी दिवस की शुरुआत की गई है, क्योंकि हिंदी संवैधानिक रूप से भारत की राजभाषा और भारत की सबसे अधिक बोली और समझी जाने वाली भाषा है, हिंदी और इसकी बोलियां संपूर्ण भारत के विभिन्न राज्यों में बोली जाती है।

विश्व की तीसरी सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा है हिन्दी
पप्पू सिंह ने कहा कि हिंदी विश्व की तीसरी सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा है ,विश्व आर्थिक मंच की गणना के अनुसार यह विश्व की 10 शक्तिशाली भाषाओं में से एक है । हिंदी की लिपि देवनागरी है जो हिंदी भारत के 9 राज्यों में उपयोग की जाने वाली भाषा है जैसे बिहार, छत्तीसगढ़ ,हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान ,उत्तराखंड ,जम्मू और कश्मीर , उत्तर प्रदेश और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली वहीं भारत के बाद अन्य देशों में भी लोग हिंदी बोलते और पढ़ते लिखते हैं।

फीजी, मारीशस, सुरीनाम, नेपाल और संयुक्त अरब अमीरात 2019 में अबू धाबी में हिंदी को न्यायालय की तीसरी भाषा के रूप में मान्यता मिली है। मौके पर मुकेश कुमार वर्मा, रिक्की राय, जयराम सहित कई लोग थे।

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