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पालीगंज सीट:भाजपा के बागी अनिल ने निर्दलीय उतर मुकाबले को बनाया त्रिकोणीय, दो भाजपा नेताओं की खींचतान में टिकट पा गए अतुल कुमार

बिक्रम5 दिन पहले
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भाजपा के पूर्व विधायक इस चुनावी खेल में अलग और एक बिग ट्विस्ट के साथ मैदान में हैं।
  • सबसे अधिक भूमिहार मतदाता होंगे निर्णायक, दूसरे नंबर पर यादव वाेट
  • एक महिला समेत 15 उम्मीदवार चुनावी समर में, जिनमें 6 भूमिहार और 4 यादव

(मो. सिकंदर) सोन नदी से निकल कर किसानों के खेताें को हरा-भरा रखने वाली नहर में जितना पानी नहीं बह रहा, उससे अधिक तेज गति से बिक्रम में राजनीति की धारा बह रही है। हर कोई अपने-अपने उम्मीदवार लड़ा रहा है, जिता रहा है। लेकिन, मन को टटोलने की कोशिश करिए तो हर कोई चुप्पी साध रहा है।

गांव से लेकर दालान तक चुनावी बैठकें चल रही हैं। हर काेई जातीय आधार पर जाेड़-घटाव करने में जुटा है। यहां से एक महिला समेत 15 उम्मीदवार चुनावी समर में किस्मत आजमा रहे हैं। इस बार चुनावी मैदान में मुकाबला पिछली बार की तरह ही आमने-सामने होने की उम्मीद थी, लेकिन भाजपा से निष्कासित और इस विधानसभा का तीन बार प्रतिनिधित्व कर चुके अनिल कुमार का टिकट कट गया। वे निर्दलीय के ताैर पर चुनावी मैदान में कूद गए।

भाजपा ने यहां से अतुल कुमार पर भराेसा जताते हुए उन्हें पार्टी का उम्मीदवार बनाया है। पूरे विधानसभा क्षेत्र में इसी बात की चर्चा है कि पूर्व विधायक अनिल के बागी हाेने से किसे फायदा हाेगा। वहीं महागठबंधन समर्थित कांग्रेस के सिद्धार्थ सौरभ मैदान में तो मजबूती के साथ डटे हैं।

दूसरी तरफ, एनडीए की ओर से भाजपा से पालीगंज सीट से पिछली बार भाजपा उम्मीदवार बने रामजनम शर्मा के बारे में चर्चा थी। उन्होंने दिल्ली में डेरा में डाल दिया था पर न उन्हें टिकट मिला और न ही अनिल काे। इन दो सीनियर नेताओं की खींचतान काे देखते हुए पार्टी के आलाकमान ने नौबतपुर के दरियापुर निवासी अतुल कुमार को टिकट थमा दिया। अतुल महाराष्ट्र में चुनाव प्रभारी की टीम में काम कर चुके हैं।

क्षेत्र के लोगों के संपर्क में रहते हैं सिद्धार्थ सौरभ
कांग्रेस उम्मीदवार सिद्धार्थ सौरभ के बारे में नौबतपुर के रामनरेश सिंह कहते हैं कि उन्होंने हर गांव में कुछ न कुछ काम किया है। ऐसा नहीं है कि जनता उनसे नाराज है। पंचायत प्रतिनिधियों की मानें तो उनकी बात भी विधायक के स्तर तक पहुंचाने में अधिक परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता है। लोगों से मिलने और उनकी मदद करने में भी वे आगे रहते हैं। विपक्ष में अनिल व अतुल के बीच भूमिहार के वोटों का बंटवारा भी उन्हें मदद कर सकता है।

अपनी पहचान बढ़ाने की है अतुल के सामने चुनौती
भाजपा उम्मीदवार अतुल कुमार के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपनी पहचान लोगों के बीच बढ़ाने की है। पिछली बार सिद्धार्थ जदयू, राजद व कांग्रेस के संयुक्त उम्मीदवार थे। इसका उन्हें फायदा भी मिला था। लेकिन, इस बार उनके खाते से जदयू का वोट बैंक का छिटकना तय माना जा रहा है। ऐसे में अतुल को एनडीए उम्मीदवार होने का लाभ मिलता दिख रहा है।

चुनाव में बिग ट्विस्ट लेकर आए हैं अनिल
भाजपा के पूर्व विधायक इस चुनावी खेल में अलग और एक बिग ट्विस्ट के साथ मैदान में हैं। वे लगातार क्षेत्र में सक्रिय रहे हैं। लोगों से मुलाकात कर वे अपनी पुरानी छवि को स्थापित करने का प्रयास करते देखे गए। उम्मीदवारों की घोषणा से पहले उन्हें भाजपा की ओर से उम्मीदवारी में पहले नंबर पर देखा जा रहा था।

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