जानिए, बाराह बाबा के मंदिर की कहानी:कार्तिक पूर्णिमा पर लाखों लोग करेंगे जलाभिषेक, 400 साल पुराना है इतिहास

पूर्णिया22 दिन पहले

पूर्णिया जिले के भवानीपुर प्रखंड क्षेत्र अंतर्गत बाराहा बाबा स्थान लोगों के लिए आस्था और विश्वास का केंद्र बना हुआ है। जहां प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष भी लाखों श्रद्धालु जलाभिषेक करेंगे। भवानीपुर प्रखंड मुख्यालय बस स्टैंड से महज 1 किलोमीटर की दूरी स्थित बाराहा बाबा स्थान में कार्तिक पूर्णिमा के दिन यहां लाखों लोग जलाभिषेक करते हैं। संभवतः देश के इकलौते बाराहा बाबा स्थान में पूर्णिमा के दिन श्रद्धालुओं का काफी जमावड़ा लगा रहता है। आसपास के लोगों के अलावा यहां दूर-दूर से श्रद्धालु जलाभिषेक करने पहुंचते हैं, उत्तर प्रदेश, झारखंड, मध्य प्रदेश बंगाल के अलावा हमारे पड़ोसी मुल्क नेपाल और भूटान से भी भारी संख्या में श्रद्धालु आते हैं।

ऐतिहासिक है मंदिर।
ऐतिहासिक है मंदिर।

400 वर्ष पुरानी है मंदिर

मंदिर की उत्पत्ति के बारे में मंदिर के पुजारी परशुराम झा बाबा कहते हैं कि करीब 400 वर्ष पूर्व यहां एक बड़ा चौरा था। इस चौरे में एक बार एक साथ कई व्यक्ति हल चला रहे थे। जिसमें सबसे आगे सहदेव सिंह नामक किसान के खेत का हल मिट्टी के नीचे किसी चीज में फस गया। काफी मशक्कत के बाद चार पांच हलवाहों ने मिलकर हल निकालने के बाद मिट्टी खोदकर देखा तो पत्थरनुमा चीज से खून निकल रहा था। वह खबर पूरे इलाके में जंगल की आग की तरह फैल गई। उसे देखने के लिए भीड़ इकट्ठा होने लगी। उसके बाद उसी हलवाहे को उसी रात स्वप्न में बाराहा बाबा ने दर्शन दिया और बताया कि हम उसी जगह पर हैं। लोगों ने वहां पूजा पाठ करना शुरू कर दिया। वह दिन कार्तिक मास के पूर्णिमा का दिन था।

कार्तिक मास के दिन होता है जलाभिषेक

पहली बार गांव के लोगों ने पूजा की थी। काफी संख्या में लोग पहुंचे और बाबा को दूध से अभिषेक किया। काफी संख्या में श्रद्धालुओं पहुंचने के कारण वहां दूध की नदी बहने लगी। इसलिए उसी दिन से हरेक कार्तिक माह पूर्णिमा को यहां जलाभिषेक होता है।

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