टिन की छत, फूस की दीवार वाले स्कूल में पढ़ाई:पूर्णिया के प्राइमरी स्कूल में बेंच तक नहीं, घर से बच्चे चटाई लाते हैं

नागेश्वर कर्ण|पूर्णिया3 महीने पहले
जमीन पर बैठकर पढ़ाई करते बच्चे। - Dainik Bhaskar
जमीन पर बैठकर पढ़ाई करते बच्चे।

पूर्णिया में बच्चे टिन के शेड के बने एक कमरे के प्राइमरी स्कूल में पढ़ने को मजबूर है। टिन शेड और फूस की दीवारों से बने इस एक कमरे के स्कूल में 200 छात्र एकसाथ पढ़ते हैं। एक साथ 1-5 तक क्लास चलते हैं। इतना ही नहीं बच्चों के बैठने के लिए बेंच तक नहीं है। छात्र अपने-अपने घरों से चटाई लाते है, उस पर बैठकर पढ़ते हैं।

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टिन शेड के नीचे बच्चों का भविष्य गढ़ता ये वार्ड-14 हाउसिंग काॅलोनी स्थित प्राथमिक विद्यालय है। प्राइमरी स्कूल की स्थापना वर्ष 2006 में हुई थी। यह स्कूल सिर्फ सरकारी कागज पर मौजूद है। 16 सालों में स्कूल को अपना भवन तक नहीं मिला है।

जमीन पर बैठकर पढ़ते बच्चे।
जमीन पर बैठकर पढ़ते बच्चे।

शिक्षकों ने बनवाया टिन शेड का रूम
स्कूल के प्रधानाध्यापक भूपेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि स्कूल भवन नहीं होने से करीब 4 वर्षों तक तो पेड़ के नीचे छात्रों को पढ़ाया। उसके बाद स्कूल के शिक्षकों ने अपने खर्च से टिन का शेड बनाकर क्लास रूम बनाया और बच्चों को पढ़ाने लगे। इस तपती हुई गर्मी टिन और भी गर्म हो जाता है, जिसमें बच्चे पढ़ते हैं। स्कूल में शिक्षकों ने अपने खर्च से पंखे लगवाए थे लेकिन वह भी चोरी हो गया।

टिन शेड के कमरे में पढ़ाई।
टिन शेड के कमरे में पढ़ाई।

एक ही रूम में होती है पांच तक की पढ़ाई

इस प्राथमिक विद्यालय में पांच कक्षा तक की पढाई होती है। दो शिक्षक व दो शिक्षिका भी है। स्कूल में 200 छात्र भी है। लेकिन अलग-अलग रूम नहीं होने से सभी क्लास की पढ़ाई एक ही रूम में होती है। प्रधानाध्यापक ने बताया कि स्कूल शिक्षा विभाग के रजिस्टर में दर्ज है। यहां तक कि 28 कट्ठा जमीन भी उपलब्ध कराई गई है। भवन निर्माण के लिए पत्र लिखा गया।

बच्चों को बैठने के लिए बेंच डेस्क तक उपलब्ध नहीं। बच्चे खुद घर से बैठने के लिए चटाई लाकर जमीन पर बैठकर पढ़ाई करते हैं। यहां तक स्कूल में दो साल से विकास अनुदान बंद है।