लापरवाही:चार वर्षों बाद भी पहले फेज में चयनित किए गए 2385 लोगों के नहीं बने घर

बिक्रमगंज2 महीने पहले
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झोपड़ी के ऊपर प्लास्टिक डालकर मानसून की बारिश से बचने की जुगाड़ कर रहे लोग। - Dainik Bhaskar
झोपड़ी के ऊपर प्लास्टिक डालकर मानसून की बारिश से बचने की जुगाड़ कर रहे लोग।
  • प्रधानमंत्री शहरी आवास योजना में प्रशासन की बड़ी लापरवाही

मानसून माथे पर मंडरा रहा है। छत बनी नहीं है। आवास के लिए किसी को पहली तो किसी को दूसरी क़िस्त ही मिली है। बहुत कम लोग हैं जिनके आवास पूर्ण हुए हंै। ऐसे में इन लोगों के द्वारा कैसे गुजर बसर किया जाएगा, कल्पना की जा सकती है। प्रधानमंत्री शहरी आवास योजना में चयनित लाभुक के सपना 4 साल बीत जाने के बाद भी पूर्ण नहीं हो सके। इसमें कहीं ना कहीं लाभुक के साथ-साथ नप सरकार कम दोषी नहीं है। क्योंकि चयन प्रक्रिया के दौरान चयन किए गए लाभुकों के द्वारा किस तरह चयन किया गया चयन प्रक्रिया पर सवाल उठाना उचित नहीं लेकिन बहुत से ऐसे भी लाभुक है, जिनको सही मायने में छत नही है।उन्हें इस योजना का लाभ मिलना उनका हक है। नाम नहीं छापने के सवाल पर लाभुक चयन से लेकर पहली किस्त की राशि डालने में कुछ लोगों को विलंब होने का कारण आर्थिक लाभ भी बताया जाता है। दबे स्वर में असहाय लोग बरबस यह बोल देते हैं कि कार्यालय का चक्कर लगाना पड़ता है उसके बाद भी हम लोग क्या करें। ऐसे में प्रधानमंत्री शहरी आवास योजना द्वारा बनाए जाने वाले अवास सरकार पर सवालिया निशान जरूर छोड़ रहे है, क्योंकि 4 साल बीत जाने के बावजूद भी सभी चयनित लाभुकों के आवास नहीं बन पाए कहीं ना कहीं नप सरकार व प्रशासन दोषी जरूर है या तो उसे किस्त के पैसे देने में विलंब किए गए या फिर चयन किए गए प्रक्रिया ही गलत है या फिर चयनित व्यक्ति के द्वारा पैसे लेकर दूसरे कार्य में लगा दिया गया।

पहली किस्त के बाद नही मिली राशि: वार्ड 24 के बाबूधन राम की पत्नी डोमनी देवी का एक क़िस्त के बाद दूसरी क़िस्त नही बना सुखराज राम ,मीरा देवी पति अनिल राम सहित दर्जनों लाभुक ऐसे है। जिनको बरसात शुरू होने के बाद रहने के ठिकाने नही है।इन लोगो ने बताया कि पहले क़िस्त की राशि मिलने के बाद कार्यालय का चक्कर लगा रहे है लेकिन कोई सुनता नहीं ।इस संबंध में कार्यपालक पदाधिकारी सूर्या नंद सिंह से बात करने का प्रयास किया गया तो मोबाइल उठाना मुनासिब नहीं समझे। वैसे रोहतास जिला अधिकारी धर्मेंद्र कुमार प्रधानमंत्री आवास योजना को लेकर खासे तत्पर दिख रहे हैं। कई अधिकारियों पर कार्रवाई तक भी कर दिए देखना यह है कि बिक्रमगंज नगर परिषद के द्वारा किए गए लापरवाही पर उनकी पहली नजर पड़ती है या नहीं।

फर्स्ट पेज के सभी लाभुकों को कार्यादेश, पर घर नहीं बना
प्रधानमंत्री शहरी आवास योजना वित्तीय वर्ष 2016-17 से ही शुरू की गई जिसमें उसी वित्तीय वर्ष में 758 लाभुकों को चयनित किया गया दूसरे फेज में 1272 लाभुक चयनित किया गया एवं तीसरे फेज में 355 लाभुकों को इस योजना के लिए चयनित किया गया।नप इओ की माने तो 758 लाभुकों में 300 से अधिक लाभुकों ने अपना पत्र सरेंडर कर दिया। बाकी शेष बचे सभी लाभुकों को पहली किस्त की राशि उनके खाते में दी गई है इसी प्रकार दूसरा किस्त 384 लाभुकों को दिया गया।तीसरी क़िस्त 125 लाभुक को ही मिली है। वैसे फर्स्ट पेज के सभी लाभुकों को कार्यादेश मिलने की बात नप सरकार के द्वारा जरूर बताई गई। ऐसे में 4 वर्ष बीत जाने के बाद भी इन लाभुकों को प्रधानमंत्री शहरी आवास योजना के तहत बनने वाले आशियाना कंप्लीट अवस्था में नहीं हो पाए ।

पहली क़िस्त मिली तो दूसरी के इंतजार में बैठे हुए हैं लोग, किराए पर रहने की मजबूरी

शहरी क्षेत्र होने की वजह से बहुत ऐसे परिवार हैं जिनका प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत चयन तो हो गया कार्यादेश मिल गए। काम भी लग गये। पहली क़िस्त मिली दूसरी किस्त के इंतजार में लोग बैठे हुए हैं। वार्ड नंबर 11 सहित अन्य वार्डों में एक हजार से पंद्रह सौ रुपये किराये देकर परिवार लेकर रह रहे है। इस प्रकार यह लोग अगर दो वर्ष तक दूसरे के मकान में किराए पर रह गए तो जितनी राशि इन्हें नगर सरकार देगी उतना इनका किराया में चला जाएगा ऐसे में प्रधानमंत्री आवास योजना के सपने अधूरे रह जाएंगे नगर सरकार के द्वारा पहले तो कार्यादेश देने में विलंब किया जाता है बाद में क़िस्त की राशि विलंब से दी जाती है कारण चाहे जो हो खामियाजा लाभुकों को ही भुगतना पड़ता है।

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