उदासीनता:ठाेरा नदी का अस्तित्व खतरे में, उद्गम स्थल ही पड़ा सूखा

बिक्रमगंज15 दिन पहले
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उद्गगम स्थल जहां अभी भी होता  है पूजा। - Dainik Bhaskar
उद्गगम स्थल जहां अभी भी होता है पूजा।

बिक्रमगंज के नोनहर गांव से होकर बक्सर गंगा की धार में प्रवाहित होने वाले नदी का उद्गम स्थल दशकों से सूखा है। गांव से पश्चिम जो करहा जैसा दिखता था वह भी अब रिसता भर है। रोहतास जिले के एक गांव के कुएं से निकलकर बक्सर पहुंच गंगा में मिलने वाली नदी का उद्गम स्थल कुंआ ही माना जाता है। परंतु यह अद्भुत नदी अब संकट में है। उसके उद्गम स्थल पर कुंए में पीपल का एक बड़ा पेड़ है कुएं को लोहे और कंक्रीट से ढाल दिया गया है।

कुआं जिससे नदी निकलती थी, वह अब नहीं दिखता। ठोरा नदी की धारा जो पहले इस कुएं से निकलती थी, अब वहां से कुछ दूर पश्चिम दिशा में जाने के बाद दिखाई देती है। करहा रुपी नदी आगे जल्हा-बल्हा गांव के समीप बड़े आकार में दिखती है। ठोरा नदी किसानों के लिए जीवनदायिनी भी साबित होती रही है, इसके पानी से कृषि कार्य होता रहा है। परंतु अब यह जीवनदायिनी नदी संकट में है।

पौराणिक है ठोरा नदी

बताते हैं ठोरा का जन्म उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर के एक ब्राह्माण परिवार में हुआ था। उनका ननिहाल प्रखंड के नोनहर गांव में था, उनके सात मामा थे। एक बार ननिहाल में जब किसी मामा के परिवार में खाने के लिए नहीं पूछा गया तो ठोरा ने कुएं में डूबकर जान दे दी। यह देख उनके साथ आए एक नौकर व कुत्ता परिवार में जवाब देने के भय से कुएं में छलांग लगा दी। पानी की एक धारा निकली जो अपना विकास करती हुई अपने वेग से पूरे क्षेत्र को चीरती हुई गंगा नदी से मिल गई।

कुआं से उद्गम वाली नदी

पौराणिक ठोरा नदी के उद्गम स्थल के बारे में गांव के कोई ग्रामीण बता नहीं पाते कि नदी के उत्पति कब हुई । ग्रामीण अरुण पाठक कहते है कि यह नदी बक्सर में गंगा के बीचो-बीच जाकर समाप्त मिलती है।क जानकार तो यहां तक कहते हैं कि रोहतास ही नहीं बल्कि बिहार की एकमात्र नदी है जिसका कुंआ उद्गम स्थल है। उद्गम स्थल भले सुख गए है लेकिन नदी का अस्तित्व अभी भी बरकरार है।

नदी पर बने हैं बड़े पुल

ऐसा नही है कि इस नदी के उद्गम स्थल 44 डिग्री पारा में सुखा है, बल्कि हमेशा-हमेशा के लिए सुख गए है हलांकि आगे गांवों में नदी का अस्तित्व अभी भी बरकरार है। जल्हा बल्हा, सिकरौल, दावथ सहित कई गांवों में इस नदी पर पुल भी बंधे है। उद्गम स्थल सूखा, नोनहर उद्गम स्थल पर भले ही नदी सुख गए ।

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