कार्यक्रम:मखाना की खेती को बढ़ावा देने का किया आह्वान

सहरसाएक महीने पहले
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अंतरराष्ट्रीय सेमीनार में भाग लेते विद्वत जन। - Dainik Bhaskar
अंतरराष्ट्रीय सेमीनार में भाग लेते विद्वत जन।
  • एमएलटी कॉलेज में आयोजित दो दिवसीय सेमीनार में साइंस एंड टेक्नोलॉजी पर हुआ विचार-विमर्श

स्थानीय एमएलटी कॉलेज में आयोजित दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सेमीनार के दूसरे दिन प्रतिभागियों ने मखाना, टीबी रोग एवं साइंस टेक्नोलॉजी के बारे में विस्तार से अपने अपने विचार रखे। सेमिनार के प्रथम सत्र में डॉ.विद्यानाथ झा ने विश्व बाजार में मखाना की बढ़ती मांग एवं कोसी इलाके में इसके उत्पादन के संबंध में चर्चा करते हुए कहा कि मखाना आज एक ब्रांड बन चुका है। मखाना में उत्तम गुणवत्ता वाले प्रोटीन और स्टार्च पाए जाने तथा वसा नहीं पाए जाने के कारण समृद्ध देशों में इसकी मांग बहुत तेजी से बढ़ी है। इसका उपयोग बढ़ाने के लिए स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी आह्वान किया था। इस क्षेत्र में सहरसा एवं सुपौल जिले को एक जिला एक उत्पाद योजना से जोड़ा गया है। उन्होंने कहा मखाना के साथ-साथ कमल का फूल एवं फल, सिंघाड़ा इत्यादि इस क्षेत्र की विशेष पहचान है। डॉ. विश्व दीपक त्रिपाठी ने क्षय रोग यानी टीबी की दवा की खोज की दिशा में फास्फोरस डेड्रीमर्स के उपयोग पर प्रकाश डालते हुए कहा फास्फोरस डेड्रीमर्स एक नए मॉलीक्यूल के रूप में टीबी की दवा की खोज की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा। उनका यह शोध अमेरिकन केमिकल सोसायटी रिसर्च जनरल बायोमेक्रो मॉलीक्यूल में प्रकाशित हुआ है। उन्होंने कहा कि टीबी बैक्टीरिया सभी के अंदर है। लेकिन रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होने के कारण हम सभी उससे बचे रहते हैं। डॉ. फराज शेख ने कहा कि दवा उद्योग अनुसंधान और शिक्षा में कंप्यूटर की शुरुआत के बाद बहुत विकसित हुई है।

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