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परेशानी:राजनपुर-घोघसम पर बना चचरी पुल का अधिकांश हिस्सा पानी में डूबा, लोग जान जोखिम में डालकर पार कर रहे नदी

सहरसा\राजनपुरएक महीने पहले
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क्षतिग्रस्त चचरी पुल से किसी तरह सुरक्षित निकलते राहगीर। - Dainik Bhaskar
क्षतिग्रस्त चचरी पुल से किसी तरह सुरक्षित निकलते राहगीर।
  • मानसून से पहले ही कोसी ने दी बाढ़ की दस्तक, नेपाल में बारिश के बाद अचानक पानी छोड़े जाने से नदी के जलस्तर में हुई वृद्धि

इस साल मानसून से 20 दिन पहले कोसी ने बाढ़ की दस्तक दे दी है। मंगलवार को अचानक कोसी नदी के बढ़े जलस्तर से नदी की चौड़ाई बढ़ने लगी। घोघसम घाट के समीप लोगों के आवागमन के लिए बीते 8 माह से चंचरी पुल पर चल रहा आवागमन मंगलवार से ठप हो गया। कोसी नदी के जलस्तर में हुई अप्रत्याशित वृद्धि से घोघसम घाट पर बना चंचरी पुल के ऊपर से पानी बहने लगा। पुल क्षतिग्रस्त हो जाने से कई लोग बीच में ही फंस गए। लोगों ने अपनी जान जोखिम में डालकर किसी तरह बाइक के साथ बाहर निकल पाए। स्थानीय लोगों के लिए मानसून से पहले चंचरी पुल होकर यह आखिरी सफर था। अब अगले 6 महीने तक नाव के सहारे ही नदी पार करना पड़ेगा। ऐसे इस साल मानसून भी जून के पहले सप्ताह में प्रवेश कर रहा है। कोसी नदी में अचानक जलवृद्धि का मुख्य कारण पिछले दो दिनों में नेपाल में हुई भारी बारिश बताया गया है। तटबंध के अंदर के लोगों ने बताया कि मंगलवार को कोसी में सुबह से लेकर शाम तक लगातार जल स्तर में वृद्धि देखी गयी। जलस्तर बढ़ने से जगह-जगह चंचरी पुल क्षतिग्रस्त हो गया। अब इस पुल होकर लोगों का आवागमन किसी बड़े हादसे का गवाह बन जाएगा। क्षतिग्रस्त चंचरी पुल पार कर किसी तरह सुरक्षित निकले राहगीर कई राहगीरों ने बताया कि अगर रात भर पानी बढ़ने का रफ्तार यही रहा तो बांस का यह पुल पूरी तरह से बह जाएगा। स्थानीय नाविक सनोज कुमार यादव ने कहा हम लोग 6 माह के लिए चंचरी पुल बनाते थे लेकिन मेरा चंचरी पुल 8 माह तक चला लेकिन आज आखिरी सफर हो रहा है। कोसी नदी में समय से पहले पानी आ गया है। लगातार जलस्तर में वृद्धि के बाद अब नाव परिचालन ही करना पड़ेगा। स्थानीय लोगों की मानें तो कोसी के जलस्तर में वृद्धि शुरू होने से पहले से सूखे चैनल में पानी भरने लगा है। इस कारण वाहनों और पैदल चलने वाले लोगों की परेशानी भी बढ़ने लगी है। इस क्षेत्र के लोग 15 जून तक बाढ़ से पहले सभी तरह की तैयारी कर लेते हैं लेकिन इस साल पूर्वानुमान फेल कर रहा है। इधर, पूर्वी कोसी तटबंध के भीमनगर कोसी बराज से कोपरिया तक 125 किमी. तक तटबंध को पूरी तरह से सुरक्षित कर लेने का दावा जल संसाधन विभाग के इंजीनियरों ने किया है। विभागीय सूत्रों की मानें तो अभी कोसी के जलस्तर में वृद्धि का आधिकारिक आंकड़ा जारी नहीं होगा। 15 जून से जब सरकारी बाढ़ की अवधि शुरू हो जाएगी इसके बाद से कोसी बराज से निकलने वाले पानी के डिस्चार्ज का रेकार्ड अगले 15 अक्टूबर तक प्रतिदिन हर तीन घंटे पर दर्ज किया जाएगा।

चचरी पुल को जोड़ने वाली सड़क नदी में डूबने के कगार पर।
चचरी पुल को जोड़ने वाली सड़क नदी में डूबने के कगार पर।

पीपा पुल बनाने को लेकर लोगों में जगी उम्मीद
जिला पदाधिकारी आनंद शर्मा जब सहरसा के डीएम बन कर आए तो उन्होंने पूर्वी कोसी तटबंध के अंदर के क्षेत्र का दौरा करने के बाद कोसी नदी में बने बांस के चंचरी पुल देखने के उपरांत उन्होंने यह घोषणा की थी कि इस जगह पर पीपा पुल का निर्माण कराया जाएगा। इसके लिए डीएम ने सभी प्रमुख विभागों के वरीय अभियंताओं के साथ घोघसम- राजनपुर कोसी नदी घाट का निरीक्षण किया था तथा पीपा पुल बनाने को लेकर लगभग 23 करोड़ का डीपीआर भी सरकार को भेजा है। सरकार से स्वीकृति मिल भी जाती है तो इसके बनने में वक्त लगेगा। तब तक लोगों का एकमात्र सहारा नाव ही रहेगा।

15 जून के बाद आएगा आंकड़ा
कोसी के जलस्तर में वृद्धि पर जल संसाधन विभाग के चन्द्रायण डिविजन के इंजीनियर धर्मेंद्र कुमार ने कहा कि मंगलवार को कोसी नदी के जलस्तर में अचानक वृद्धि हुई है। इसका मुख्य कारण नेपाल के जलग्रहण क्षेत्र में भारी वर्षा होना है। नेपाल में काफी बारिश होने के कारण कोसी में वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा कि 15 जून के बाद से डिस्चार्ज का आंकड़ा आने लगता है।

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