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भास्कर एक्सक्लूसिव:जिले में संचालित 17 एंबुलेंस में से 6 एंबुलेंस छह महीने से गैराज में, मरम्मत का इंतजार

सहरसा13 दिन पहले
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गैरेज में खड़ी जिले की सभी सरकारी एंबुलेंस। - Dainik Bhaskar
गैरेज में खड़ी जिले की सभी सरकारी एंबुलेंस।
  • कई नई एंबुलेंस मिलने की दी जा रही जानकारी
  • जुगाड़ पर चल रहे जिले के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में मरीजों को हायर सेंटर भेजे जाने की प्रक्रिया

जिले के सदर अस्पताल, अनुमंडलीय अस्पताल, रेफरल अस्पताल सहित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में संचालित हो रहे एंबुलेंस की व्यवस्था जुगाड़ पर चल रहा है। मरीजों को वक्त पर एम्बुलेंस नहीं मिल पाता है। उन्हें एम्बुलेंस मिलने में ऑनलाइन बुकिंग के बाद भी घंटों इंतजार करना पड़ता है जो समय मरीज के लिए काफी महत्वपूर्ण होता है। लाचार मरीज के परिजन जिंदगी बचाने के लिए अस्पताल के बाहर खड़े निजी एम्बुलेंस दलाल के चक्कर में पड़ जाते हैं। जिससे उनके इलाज का अनावश्यक खर्च बढ़ जाता है। अस्पताल में एम्बुलेंस की कमी की जब भास्कर टीम ने पड़ताल की तो एक नयी बात सामने आयी। आधा दर्जन सरकारी एम्बुलेंस मामूली मरम्मत के चलते गैराज में पड़ा मिला। सदर अस्पताल समेत सभी सरकारी अस्पताल में जहां सरकारी एंबुलेंस 24 घंटे उपलब्ध होनी चाहिए। लेकिन यहां स्थिति उलट है। सरकारी एम्बुलेंस गैराज में है और निजी एम्बुलेंस मनमानी कीमत पर रेफर मरीज को ले जाने के लिए परिजनों को मजबूर कर दे रहा है। सदर अस्पताल सहित जिले के लगभग सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के कमोबेश यही स्थिति है।

कितने सरकारी एम्बुलेंस है उपलब्ध
जिले के सदर अस्पताल सहित पीएचसी में कुल 17 सरकारी एंबुलेंस संचालित है। जिनमें 6 सरकारी एंबुलेंस बीते कई महीनों से छोटी-छोटी गड़बडिय़ों के चलते गैरेज में सड़ रहे हैं। यानी 17 में से अभी कुल 11 एम्बुलेंस ही जिले में संचालित हो रहे है। जिले में अभी एक सदर अस्पताल, एक अनुमंडलीय अस्पताल, एक रेफरल अस्पताल और एक दर्जन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में संचालित हो रहा है।

बनगांव रोड के कहरा कुटी मोड़ के निकट मनोज गैरेज में 6 सरकारी एंबुलेंस खड़ी
स्थानीय बनगांव रोड़, कहरा कुटी मोड़ के निकट मनोज गैरेज में 6 सरकारी एंबुलेंस खड़ी मिली। जिनमें दो एंबुलेंस बीते 6 महीने से खराब बताया गया। वहीं एक एंबुलेंस बीते 3 महीने से गैरेज में खड़ी है जबकि दो एंबुलेंस जहां 15 दिन से गैरेज में पड़ी है। वहीं, एक एंबुलेंस लगभग एक सप्ताह से गैरेज में धूल फांक रही है। कुल 6 खराब एम्बुलेंस में से एक बिना नंबर का एंबुलेंस जो एक्सीडेंट के बाद गैरेज पहुंचा आज तक वहीं पड़ा है। वह लगभग 8 महीने से गैरेज में धूल फांक रहा है। गैरेज संचालक मनोज कुमार की मानें तो उसमें मात्र 45 से 50 हजार रुपए के खर्च लगेंगे। जिसके बाद गाड़ी दुरुस्त होकर सड़क पर दौड़ने लगेगी। वहीं, एम्बुलेंस संख्या-बीआर 25 पी 9649 बीते 6 महीने से गैरेज में खड़ी है। जिसमें मात्र 50 हजार रुपए के खर्च आने की बात गैरेज संचालक बता रहे हैं। जिसके बाद वह पूरी तरह दुरुस्त हो जाएगी।जबकि एंबुलेंस संख्या-बीआर 01 पीएफ 1055 बीते तीन महीने से अधिक समय से गैरेज में लगी है। जिसमें भी 50-60 हजार रुपए के बीच मामूली खर्च हो जाने से गाड़ी सड़क पर दौड़ने लगेगी। वहीं, एंबुलेंस संख्या - बीआर 01 पीएल 2179 में एक पखवाड़े से लगी हुई है। जिसमें अधिकतम मात्र 5 हजार रुपए का खर्च होना गैरेज मालिक बता रहे हैं। साथ ही एंबुलेंस संख्या-बीआर 01 पीएफ 0876 भी गैरेज में खड़ी है। जिसमें मात्र 1 हजार रुपए के खर्च होना बताया गया है। लेकिन उक्त गाड़ी का खराब सामान अभी लोकल बाजार में उपलब्ध नहीं है। जिसके कारण गाड़ी दुरुस्त नहीं होने की बात बताई जा रही है।

गैरेज की सभी एंबुलेंस 2 लाख किमी चल चुकी
गैरेज में लगी सभी 6 एंबुलेंस 2 लाख किलोमीटर से अधिक चल चुकी है। इसके बाद उसमें खराबी आई है। वे कहते हैं कि अब गाड़ी चलेगी तो खराब होगी ही। लेकिन लंबे समय तक उसे दुरुस्त नहीं किए जाने के सवाल पर चिढ़ते हुए कहा कि गाड़ी का खराब सामान नहीं मिल रहा है। जिसके कारण गाड़ी ठीक नहीं हो रही है। जबकि मरीजों को हो रही असुविधा के सवाल पर उनका कहना है कि जिस-जिस सरकारी अस्पताल का एंबुलेंस गैरेज में लगा है। वहां वैकल्पिक तौर पर दूसरा एंबुलेंस उपलब्ध करा दिया गया है। उन्होंने कहा कि बैकअप के लिए दो एंबुलेंस जिला में है। जिन्हें पीएससी केंद्र के खराब एंबुलेंस की जगह पर नियुक्त रखा गया है। उन्होंने बताया कि 6 नया एंबुलेंस जल्द ही जिले को मिलने वाला है। साथ ही खराब सभी एम्बुलेंस को भी ठीक करने की प्रक्रिया की जा रही है।
आशीष कुमार, एसीएमओ

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