परेशानी:सोनवर्षाराज के 3 गांव के लोग वर्षों से सड़क बनने की जोट रहे बाह

सोनवर्षाराज चिरंजीवएक महीने पहले
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बाजार कर लौटतीं विश्वनाथपुर की महिलाएं। - Dainik Bhaskar
बाजार कर लौटतीं विश्वनाथपुर की महिलाएं।
  • विकास से वंचित, लोगों को आज भी पगडंडियों का लेना पड़ रहा सहारा, परेशानी

सहरसा जिला के सोनवर्षाराज प्रखंड के तीन पंचायतों का तीन गांव और उससे जुड़े टोला तक जाने के लिए आजादी के 75 साल बीतने के बाद भी किसी सरकार ने सड़क नहीं बनवाई। सहसौल पंचायत के विश्वनाथपुर, विराटपुर के बैसा और देहद पंचायत के तीनधारा महादलित टोला के लोग आज भी पगडंडियों के सहारे ही आवागमन कर रहे हैं। देश और राज्य में सड़क निर्माण की एक साथ कई योजनाएं चल रही हैं लेकिन उसका लाभ इन गांवों के लोगों को अबतक नहीं मिला है। वे अपना जनप्रतिनिधि चुनते हैं ताकि कोई गांव तक सड़क बनवा दें लेकिन जीतने के बाद कोई प्रतिनिधि दोबारा झांकने तक गांव नहीं जाते। बरसात के महिनों में सड़क विहीन यह तीनों गांव टापू में तब्दील हो जाता है।
इन तीन जगहों के लोग सड़क की बाह जोट रहे-
विश्वनाथपुर मुख्य रुप से सुरसर नदी के पश्चिमी तट पर बसा है। यहां लगभग 500 की आबादी निवास करती है। आजादी के बाद अबतक इस गांव को सड़क मार्ग की सुविधा नहीं मिल पाई है। खेतों की पगडंडियों के सहारे सुरसर नदी के किनारे लगभग 5 किलोमीटर की दूरी तय कर उन्हें बेहट गांव स्थित सहशौल सोनवर्षाराज मुख्य मार्ग होकर पहुंचना पड़ता है। विराटपुर पंचायत स्थित बैसा महादलित टोला की भी यही स्थिति है। यहां की आबादी लगभग 400 के लगभग है। बैसा महादलित टोला के ग्रामीणों को भी विराटपुर सोनवर्षाराज मुख्य मार्ग तक आने के लिए आधा किलोमीटर से अधिक दूरी पगडंडियों के सहारे तय करनी पड़ती है। बरसात प्रारंभ होते ही गांव के लोगों को अपने घरों से निकलने के लिए नाव का सहारा लेना होता है। देहद पंचायत का तीनधारा-महादलित बाहुल्य तीनधारा टोला के लोगों का भी आवागमन पगडंडियों के सहारे ही है। यहां भी करीब 5 सौ की आबादी निवास करती है। उनको भी अपने पंचायत आने के लिए खेतों की पगडंडियों के सहारे लगभग दो से ढ़ाई किलोमीटर की दूरी तय कर मुख्य सड़क पर पहुंचने में लगता है।
इस टोला में मुख्य रूप से बाढ़ व बरसात के समय आमजनों के साथ-साथ वृद्ध, बच्चे व बीमार लोगों को आवागमन में भारी समस्या उत्पन्न हो जाती है। खेतों की टेढ़ी मेढ़ी पगडण्डी व सुरसर नदी के कछार से होकर जाना पड़ता है। सड़क से वंचित उपरोक्त तीनों गांव जाने के लिए कुछ दूरी तक बिहार सरकार की भूमि है लेकिन बांकी गांव तक पहुंचने के लिए निजी रैयतों की जमीन होकर जाना पड़ता है। जिसको समझाने में आजतक न तो कोई पंचायत प्रतिनिधि और न ही स्थानीय विधायक सक्षम हो पाएं है। जाहिर है ऐसे में सूबे की सरकार का मुख्यमंत्री ग्राम संपर्क योजना से बसावट टोला को सड़क से जोड़ने की योजना क्षेत्र में सिर्फ कागजों पर ही सीमित होकर रह गई है। हालांकि इस बाबत स्थानीय विधायक रत्नेश सादा ने अगले वर्ष तक उपरोक्त तीनों महादलित टोला में सड़क बनवा दिए जाने का आश्वासन दिया है।

क्या कहते हैं जनप्रतिनिधि
विधायक ने बताया कि बैसा महादलित टोला में सड़क निर्माण हेतु वर्ष 1013-14 में ही स्वीकृति मिल गई थी लेकिन निजी रैयतों द्वारा सड़क निर्माण के लिए जमीन नहीं दिए जाने की वजह से कार्य आगे नहीं बढ़ पाया। मामले को लेकर क्षेत्र के सहशौल पंचायत के मुखिया शिवेन्द्र नारायण सिंह ने कहा कि विश्वनाथपुर टोला के आवागमन की समस्या को दूर करने का एकमात्र विकल्प सुरसर नदी पर पुल का निर्माण ही है। वहीं, विराटपुर पंचायत के मुखिया प्रतिनिधि हशिरउद्दीन ने कहा कि बैसा महादलित टोला तक जाने के लिए निजी रैयत अपनी भूमि देने को तैयार हो गए हैं जल्द ही सड़क का निर्माण करवा दिया जाएगा।

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