सहरसा की बेटी ने माउंट एवरेस्ट बेस कैंप लहराया तिरंगा:बिहार की पहली बेटी बनने का मिला गौरव

सहरसा2 महीने पहले
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सहरसा की बेटी ने माउंट एवरेस्ट बेस कैंप लहराया तिरंगा - Dainik Bhaskar
सहरसा की बेटी ने माउंट एवरेस्ट बेस कैंप लहराया तिरंगा

सहरसा का कोसी का इलाका समृद्धि और ज्ञान से भरा हुआ है। जहां एक से एक विभूतियों ने सहरसा और कोसी का नाम देश दुनिया तक पहुंचाया है। इसी कड़ी में जिले के बनगांव की बेटी लक्ष्मी झा ने एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। वे मात्र 9 दिन के अंतराल में ही नेपाल स्थित काला पत्थर पिक और माउंट एवरेस्ट बेस कैंप तक पहुंचकर तिरंगा झंडा को फ़हराया है। जिसके बाद वे एवरेस्ट तक पहुंचने वाली बिहार की पहली बेटी बनी है। जिससे जिले का नाम रौशन हुआ है। उन्हें यह सफलता काफी संघर्ष के बाद मिला है। उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाने में उनकी मां सरिता देवी का काफी सहयोग रहा है। जिनकी प्रेरणा एवरेस्ट पर फतह करने में उनका सहायक बनी।

बता दें कि सहरसा जिले के बनगांव निवासी स्व विनोद झा और सरिता देवी के चार बच्चों में सबसे छोटी लक्ष्मी झा जब छोटी थी। उसी समय उनके पिता का निधन हो गया। रोजी रोटी का कोई सहारा नहीं होने के कारण उसकी मां गांव के ही कई घरों में चूल्हा-चौका संभाल कर परिवार की गाड़ी खिंचती रही। साथ ही चारों बच्चों का लालन-पालन भी करती रही। अपने बड़े दो भाई और एक बहन के साथ लक्ष्मी बड़ी होती रही। बड़े भाई श्याम झा ने जहां गांव में ही किताब की दुकान खोल ली। वहीं से छोटे भाई गणेश झा पढ़ाई को जारी रखा और बड़े भाई के दुकान में भी मदद दे रहे है। वही लक्ष्मी से बड़ी बहन शशितारा की शादी हो गई और वे अपने ससुराल चली गई।

ऐसे में लक्ष्मी में मैट्रिक और इंटर के बाद लिए बीए की परीक्षा पास किया। फिर ग्रुप डी की परीक्षा को पास कर पटना स्थित सचिवालय में सहायक कर्मचारी बनी। वर्ष 2019 में उन्होंने सचिवालय में नौकरी प्राप्त किया। जहां से वे अपने सपने एवरेस्ट पर चढ़ने की ओर कदम बढ़ाया। जिसके बाद उसके जिंदगी में बदलाव आया। उनका नामांकन उत्तराखंड स्थित पर्वतारोहण के नेहरू इंस्टिट्यूट में हुआ। जहां वर्तमान में हरियाणा में पदस्थापित डीएसपी अनीता कुंडुन से उनकी मुलाकात हुई। जिसके सहयोग और मार्गदर्शन से वे आगे बढ़ती रही। जिसके बाद बीते दिनों नेपाल स्थित काला पत्थर पिक और माउंट एवरेस्ट बेस कैंप की चढ़ाई को पूरा किया।हालांकि वे एवरेस्ट की शिखर तक नहीं पहुंची है। चूंकि एवरेस्ट शिखर तक जाने में 40 से 45 लाख रुपए के खर्च के साथ कड़े अभ्यास की आवश्यकता हैं। वे फिलहाल दोनों ही स्थिति में अपने आपको सुरक्षित नहीं महसूस कर पा रही हैं। हालांकि उनकी इच्छा एवरेस्ट के शिखर पर भारत के झंडे को फहराना है। जिसके लिए वे आगे भी अपना प्रयास जारी रखेंगी।

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