राहत की बारिश:जुलाई व अगस्त में सामान्य से कम हुई बारिश, सितंबर में किसानों को मिली राहत, अब तक 166 मिमी वर्षा

सहरसा15 दिन पहले
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खेत में लगी धान की फसल। - Dainik Bhaskar
खेत में लगी धान की फसल।
  • पानी की कमी से झु़लस कर पीले पर चुके धान की फसल के लिए हुई अमृत वर्षा
  • बीते साल जिले में अगस्त माह में 363 एमएम और सितंबर माह के 16 वें दिन तक 113.7 एमएम हुई थी बारिश

जुलाई और अगस्त माह में सामान्य से कम वर्षापात से बेहार किसानों को सितंबर का महीना राहत दे गया। सितंबर माह में मानसून की सक्रियता ने झु़लस कर पीले पर चुके धान की फसल के लिए वरदान साबित हुआ है। मानसून की बेरुखी से हताश किसानों के चेहरे पर रौनक लौट आई है। बीते बुधवार और गुरूवार और शनिवार को रुक रुक कर हुई बारिश ने धान की फसल को आवश्यक पानी उपलब्ध करा दिया है। बीते तीन दिनों में करीब 20 एम एमएम बारिश होने हुई है जिससे धान के खेतों में नमी बना दी है। बीते अगस्त माह में जहां मात्र 31.1 एमएम बारिश हुई थी , वहीं सितंबर माह में अब तक अबतक 166.5 एमएम बारिश हो चुकी है। जबकि बीते साल जिले में अगस्त माह में 363 एमएम तथा सितंबर माह के 16 वें दिन तक 113.7 एमएम बारिश हुई थी। पिछले साल की तुलना में इस वर्ष 17 सितंबर तक करीब 53 एमएम अधिक बारिश हो चुकी है। हालांकि जिले में सितंबर माह में वर्षापात के चक्र में अत्यधिक परिवर्तन देखा गया है।

सहरसा जिले में 6 सालों में हुई बारिश का आंकड़ा

वर्ष जून ‌ जुलाई अगस्त सितंबर 2022 265.5 91.8 31.1 166.5 एमएम(17 तक) 2021 307 214.8 369.3 148.4 एमएम 2020 209 519.9 175 344.एमएम 2019 119 438.6 14.2 0000 एमएम 2018 33.1 335.9 145.5 33.2 एमएम 2017 196.9 276.9 363.7 75.7 एमएम

मॉनसून का ट्रफ बनने से बारिश हुई
मौसम विभाग द्वारा अगले पांच दिनों तक हलके से मध्यम दर्जे की बारिश की संभावना जताई गई है। क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र अगवानपुर के मौसम वैज्ञानिक अशोक पंडित ने बताया मॉनसून का ट्रफ बनने से बारिश हुई है। अगले 5 दिनों तक हल्की से मध्यम दर्जे के बारिश होने के आसार हैं। उन्होंने बताया कि यह बारिश धान की सभी किस्मों के लिए अत्यधिक फायदेमंद साबित होगी। सब्जी की खेती करने वाले किसान अपने खेत में पानी जमा नहीं होने दें। किसान एवं कृषि वैज्ञानिक भी सितंबर माह में हुई दोनों बारिश को खासकर धान की फसल के लिए अति लाभकारी बता रहे हैं। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि इस बारिश का फायदा रबी फसल की बुआई तक हो सकता है। खेतों में नमी बनी रहेगी।

उत्पादन कम होगा लेकिन धान होगा: किसान
सौर बाजार प्रखंड क्षेत्र के तीरी चकला निवासी किसान कुलानंद यादव ने कहा कि अभी भी पर्याप्त मात्रा में बारिश नहीं हुई है। धान में पानी डालने की सोच रहे हैं।। सत्तर कटैया प्रखंड के बरहशैर पंचायत के किसान नंदकिशोर खां ने कहा कि लगता है अब मेहनत बेकार नहीं जाएगा। ‌ उत्पादन कम होगा, लेकिन धान होगा। कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक देवन चौधरी ने बताया कि नीचे और मध्यम उंची जमीन में लगी धान की फसल को काफी फायदा होगा। जुलाई और अगस्त माह में बारिश नहीं होने से धान की फसल पहले ही बुरी तरह प्रभावित हो चुकी है। वर्तमान में 110 से 130 दिनों में होने वाले धान में कवच एवं कीट जनित रोग का प्रकोप देखा जा रहा है। उन्होंने किसानों से कहा कि फसल के बचाव के लिए आवश्यक उपाय करें। धान में लगने वाले रोग एवं इसके उपचार के संबंध में पौधा संरक्षण विभाग के सहायक निदेशक राहुल कुमार ने बताया कि धान की फसल में आवरण झुलसा रोग का प्रकोप देखा जा रहा है । इस रोग से पीड़ित धान की पत्तियों पर आंख के आकार का धब्बा दिखाई देता है एवं जमीन की सतह से तना गलना शुरू होता है। इस रोग से बचाव के लिए कृषक किसी भी प्रकार के फफूंदी नाशक दवा जैसे हेक्साकोनाजोल 5 फ़ीसदी 1 एमएल प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव कर सकते हैं अथवा भेलिडामाइसिन 3 फिसदी 2 एमएल प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव कर सकते हैं।

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