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लापरवाही:दो साल से बंद है सदर अस्पताल का पोषण पुनर्वास केंद्र, कुपोषित बच्चों को किया जाता है दरभंगा रेफर

समस्तीपुर4 दिन पहले
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सदर अस्पताल स्थित पोषण पुनर्वास केंद्र। - Dainik Bhaskar
सदर अस्पताल स्थित पोषण पुनर्वास केंद्र।
  • सदर अस्पताल व जिला स्वास्थ्य समिति की खींचतान का असर झेल रहे बच्चे

सदर अस्पताल का पोषण पुनर्वास केंद्र सदर अस्पताल व जिला स्वास्थ्य समिति की आपसी खींचतान के कारण दो सालों से बंद है। जिसका नतीजा है कि सदर अस्पताल पहुंचने वाले कुषोषित बच्चों को दरभंगा रेफर कर दिया जाता है। सदर अस्पताल से औसतन दो बच्चे रोज शिशु रोग विशेषज्ञ द्वारा दरभंगा पुनर्वास केंद्र भेजे जा रहे हैं। जबकि कुषोषित बच्चा व उनकी माता का केंद्र में रख कर उपचार के लिए सदर अस्पताल में पोषण पुनर्वास केंद्र खोला गया था। इस केंद्र में अतिकुपोषित बच्चों को भर्ती कर उनका इलाज करने के साथ ही उन्हें पौष्टिक आहार दिया जाता था। केंद्र का संचालन एनजीओ कर रही थी। इसी दौरान अचानक कोरोना से पहले केंद्र को बंद कर सरकार ने खुद संचालन का निर्णय लिया। लेकिन उसके बाद केंद्र पर ताला लटक गया।

जिससे कुपोषित बच्चों को दरभंगा रेफर किया जाने लगा। सदर अस्पताल के शिशु रोग विशेष डॉ नागमणि राज ने कहा कि औसतन रोज दो से तीन बच्चे दरभंगा पोषण केंद्र रेफर किए जा रहे हैं। सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ गिरीश कुमार ने कहा कि केंद्र उन्हें हैंड ओवर नहीं किया गया। इसको लेकर कई मार पत्राचार किया गया है। आखिर केंद्र का संचालन कैसे होगा। उधर, हाल ही में जिला स्वास्थ्य समिति ने खुद केंद्र के संचालन संबंधी पत्र डीएस को भेजा है।

डीएस बाेले- केंद्र संचालन के लिए नहीं उपलब्ध कराई गई राशि, न ही केंद्र को किया गया हैंड ओवर

पोषण केंद्र में कुपोषित बच्चे व उनकी मां का होता है उपचार
आंगनबाड़ी सेविका अपने पोषक क्षेत्र में आने वाले सभी लाभार्थियों में से अति गंभीर कुपोषित बच्चों को चिंहित करती है फिर उसे पोषण पुनर्वास केंद्र में रेफर करती है। जहां वृद्धि निगरानी के क्रम में बच्चों का वजन, लंबाई एवं ऊंचाई वजन लिए जाने के दौरान अति गंभीर कुपोषित के श्रेणी में आए बच्चों को स्थानीय स्वास्थ्य केंद्र एवं पोषण पुनर्वास केंद्र में रेफर किया जाता है एवं उसकी निगरानी भी की जाती है।

15% वजन में इजाफा का है लक्ष्य

पोषण पुनर्वास केंद्र में बच्चे को 14 दिनों के लिए रखा जाता है। डॉक्टर की सलाह के मुताबिक ही डाइट दी जाती है। अगर यहां रखा गया कोई बच्चा 14 दिन में कुपोषण से मुक्त नहीं हो पाता है तो उसे एक माह तक भी यहां रखे जाने का प्रावधान है। भर्ती हुए बच्चे के वजन में न्यूनतम 15 प्रतिशत की वृद्धि के बाद ही यहां से डिस्चार्ज किया जाता है। बच्चे को एनआरसी में भर्ती करने के लिए कुछ मानक निर्धारित किए गए हैं। छह माह से अधिक एवं 59 माह तक के ऐसे बच्चे जिनकी लंबाई के आधार पर वजन थ्री एसडी (स्टैंडर्ड डेविएशन) से कम हो।

केंद्र के लिए उपस्कर की खरीद शुरू
करीब दो सालों से बंद पोषण पुनर्वास केंद्र का संचालन पूर्व में एनजीओ द्वारा होता था। जिस कारण केंद्र बेड से लेकर खाने पीने का उपस्कर एनजीओ की थी। एनजीओ के पीछे हटने के बाद जिला स्वास्थ्य समिति को जिम्मेवारी दी गई है। सिविल सर्जन डॉ चौधरी ने बताया कि इसके लिए स्वास्थ्य समिति के जिला प्रोग्राम ऑफिसर आदित्यनाथ झा को जिम्मेवारी दी गई है। केंद्र को पुन: चालू करने के लिए स्वास्थ्य समिति को जरूरत के हिसाब से उपस्कर, बेड , खानपान की व्यवस्था करने को कहा गया है। स्वास्थ्य समिति द्वारा उपस्कर की खरीद शुरू कर दी गई है।​​​​​​​

पुनर्वास केंद्र पर दी जाने वाली सेवाएं​​​​​​​

  • रेफर किए गए बच्चों की पुन:जांच कर अति-कुपोषित की पहचान करना।
  • बच्चे के पोषण का ख्याल रखना।
  • बच्चों के पोषण पर अभिभावकों को सलाह प्रदान करना
  • भर्ती किए गये कुपोषित बच्चों की 24 घंटे उचित देखभाल करना
  • पोषण पुनर्वास केंद्र में डिस्चार्ज के बाद हर 15 दिन में 2 माह तक 4 बार फॉलोअप करना।
  • रोजना 300 रुपए खर्च भी देने का प्रावधान है

रेफर किए जा रहे बच्चे

1सातनपुर उजियारपुर के संजीव कुमार के छह माह के पुत्र अंकित कुमार का वजन 3.8 किलो है। सदर अस्पताल का पोषण केंद्र बंद रहने के कारण इसे दरभंगा रेफर किया गया।
2शहर के 12 पत्थर के राजीव रंजन के पुत्र बासू झा कुषोषित है केंद्र बद रहने के कारण उसे भी दरभंगा रेफर किया गया
3सरायरंजन के सुहानी दो दिन पूर्व सदर अस्पताल से कुपोषण को लेकर दरभंगा रेफर की गई
^पोषण पुनर्वास केंद्र का संचालन अब जिला स्वास्थ्य समिति खुद करेगी। इसको लेकर तैयारी की जा रही है । सब ठीक ठाक रहा तो इसी महीने से केंद्र का संचालन शुरू हो जाएगा।
-संजय कुमार चौधरी, सिविल सर्जन


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