सदर अस्पताल में 69 डॉक्टरों के पद, सिर्फ 36 मौजूद:डॉक्टरों की कमी से मरीजों को परेशानी, निजी अस्पतालों का देखना पड़ता है रास्ता

समस्तीपुर8 दिन पहले
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सदर अस्पताल में दो वर्षों से अल्ट्रासाउंड से लेकर ऑपरेशन तक बंद है। - Dainik Bhaskar
सदर अस्पताल में दो वर्षों से अल्ट्रासाउंड से लेकर ऑपरेशन तक बंद है।

समस्तीपुर सदर अस्पताल जिले का सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल है। इस अस्पताल में ग्रामीण क्षेत्र के मरीज उम्मीद से आते हैं कि यहां उन्हें बेहतर उचार मिलेगा। लेकिन अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टर समेत अन्य एमबीबीएस डॉक्टरों के पद रिक्त रहने के कारण लोगों को निजी क्लीनिक का मुंह देखना पड़ रहा है। सदर अस्पताल में कुल 69 डॉक्टरों के पद हैं, जिसमें अभी 36 डॉक्टर कार्य कर रहे हैं। अस्पताल में करीब दो वर्षों से अल्ट्रासाउंड से लेकर ऑपरेशन तक बंद है। फिजिशियन, मुर्छक, हड्‌डी रोग विशेषज्ञ, फोरेंसिंक विशेषज्ञ नहीं हैं। इसके अलावा जीएनएम के 200 पद स्वीकृत हैं लेकिन उनके स्थान पर 74 जीएनएम काम कर रही है। लंबे समय से वार्ड ब्वाय व ओडी ब्वाय के सभी पद रिक्त चल रहे हैं। जिससे आये दिन ट्रॉली आदि खींचने को लेकर विवाद होता रहता है।

हालांकि सिविल सर्जन डॉक्टर संजय कुमार चौधरी ने कहा कि खाली पड़े डॉक्टरों के पदों के बारे में मुख्यालय को रिमाइंडर भेजा गया है लेकिन डॉक्टरों का पदस्थापन नहीं हो रहा है। जिससे परेशानी हो रही है। ऑपरेशन से लेकर कई कार्य प्रभावित है।

अस्पताल में हो रहा सिर्फ सिजेरियन ऑपरेशन

ऑपरेशन व अल्ट्रासाउंड दो सालों से बंद सदर अस्पताल में आधुनिक ओटी रहने के बाद सर्जन व मुर्छक डॉक्टर के नहीं रहने के कारण करीब दो सालों से मरीजों का ऑपरेशन नहीं हो रहा है। अस्पताल में सिर्फ सिजेरियन ऑपरेशन हो पा रहा है। रेडियोलॉजिस्ट के पद रिक्त रहने के कारण करीब दो सालों से अल्ट्रासाउंड बंद पड़ा है। लोगों को निजी जांच घरों का सहारा लेने पड़ रहा है।

फोरेंसिक विशेषज्ञ नहीं पोस्टमार्टम में फंसता है मामला

अस्पताल में फोरेंसिक विशेषज्ञ डॉक्टर के पद करीब तीन सलों से खाली है। जिस कारण सामान्य डॉक्टर ही शव का पोस्टमार्टम करते हैं। जिससे आये दिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट को लेकर विवाद भी उठता है। करीब तीन वर्ष पूर्व यहां फोरेंसिंक विशेषज्ञ डॉक्टर प्रतिनियुक्त थे। जिससे शवों के पोस्टमार्टम रिपोर्ट में परेशानी नही होती थी। हड्‌डी का उपचार के लिए जाना पड़ता है दरभंगा अस्पताल में हड्‌डी रोक विशेष कई सालों से नहीं है। जिस कारण हड्‌डी रोक से संबंधित इलाज के लिए लोगों को डीएमसीएच व पीएमसीएच रेफर कर दिया जाता है।