छपरा के डॉ. बीएनपी सिंह हैं समाज सेवा की मिसाल:विंग कमांडर बन देश की सेवा की, अब पेंशन से भष्ट्राचार के खिलाफ लड़ रहे

छपरा2 महीने पहले
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विंग कमांडर डॉ. बीएनपी सिंह। - Dainik Bhaskar
विंग कमांडर डॉ. बीएनपी सिंह।

एयरफोर्स में विंग कमांडर के रुप में पहले देश की 22 वर्षों तक सेवा की और अब सेवानिवृत होकर 70 साल की उम्र में देश में व्याप्त भष्ट्राचार के खिलाफ जंग लड़ रहे हैं। मूल रूप से छपरा शहर के दहियावां निवासी सेवानिवृत विंग कमांडर डॉ. बीएनपी सिंह ऐसे ही शख्स हैं। फिलवक्त वह वेट्रन्स फोरम फॉर ट्रांसपरेंसी इन पब्लिक लाइफ संस्थान बनाकर न्याय की लड़ाई लड़ रहे हैं। अभी तक देश के तमाम प्रदेशों में हाईकोर्ट व देश के सर्वोच्च न्यायालय सुप्रीम कोर्ट में कुल 47 सार्वजनिक मामलों में याचिका दायर की है। कईयों में न्याय दिला चुके हैं। जिससे समाज को बहुत बड़ी कामयाबी हासिल हुई है।

इन बड़े मामलों में मिला है न्याय

  • 2015 में पटना हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की। जिसमें कोर्ट ने 40 प्रतिशत से ऊपर और 50 प्रतिशत से नीचे वाले विद्यार्थियों के दाखिले का निर्णय सुनाया। 106 सीटें बढ़ गई।
  • स्वास्थ्य पर साइड इफेक्ट डालने वाली 344 दवाओं को प्रतिबंधित कराने को लेकर पटना हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की। जिसमें कोर्ट ने 24 ऐसे दवाओं को प्रतिबंधित करने का फैसला सुनाया।
  • 2012 में बिहार में स्वास्थ्य बीमा योजना में बड़े पैमाने पर घोटाला की गई। जिसमें बिहार में करीब 518 महिला व युवतियों का गर्भशय बिना जरुरत के ही निकाल लिये गये या फिर फर्जी तरीके से निकाला बताया गया। हाईकोर्ट में याचिका दायर किये जाने के बाद आर्डर आया। उसके अनुसार 40 वर्ष से नीचे के उम्र के महिला को 2.50 लाख तथा अधिक उम्र वालों को 1.50 लाख मुआवजा दिलाया गया। दोषी डाक्टरों व क्लिनिकों पर आर्थिक दंड व कानूनी कार्रवाई की गई।
  • 2016 में उन्होंने पटना हाईकोर्ट में जजों की कमी के कारण केस लंबित रहने के संदर्भ में याचिका दायर की। जिसमें कोर्ट के आर्डर पर 244 जजों की बहाली ली गई।
  • 2017 में अस्पतालों से निकलने वाले मेडिकल कचरा की प्रबंधन नहीं होने की सूरत में डॉ. बीएनपी सिंह ने एनजीटी में एक याचिका दायर की। जिसमें बिहार के चीफ सेक्रेटरी भी हाजिर होकर जवाब दिये। इसमें करीब नौ हजार अस्पताल व क्लिनिक मापदंड पर नहीं होने पर प्रदूषण नियंत्रण पर्षद ने क्लोजर नोटिस थमाई है। इसमें आर्थिक दंड के भी प्रावधान किये गये है।
  • 2016 में उन्होंने छपरा शहर का एक ऐतिहासिक मुगलकालीन नाला खनुआ नाला की अस्तित्व बचाने की लड़ाई लड़ी। जिसमें उन्होंने एनजीटी में याचिका दायर की। उसमें एनजीटी ने 286 दुकानों के अलावें सभी तरह के अतिक्रमण हटाकर मूल अवस्था में लाने का आदेश दिया है। उसके बाद नगर आवास विकास विभाग से सिवरेज सिस्टम के लिए 242 करोड़ व खनुआ नाला के लिए 30 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, जिसका निर्माण भी शुरु हो गया है।

22 सालों का सेवा के बाद लिया वॉलेन्टियर रिटायरमेंट

डॉ. बीएनपी सिंह 1977 में इंडियन एयरफोर्स में बतौर विंग कमांडर योगदान की। 22 सालों तक एक डॉक्टर के रुप में सेवा देने के बाद उन्होंने 1999 में वॉलेन्टियर रिटायरमेंट ले ली। पुन: 2000 से 2006 तक इंडोनेशिया के पूर्वी तिमूर तथा झारखंड, छत्तीसगढ़ व मणिकपुर में डब्लूएचओ में रिजनल अफिसर के पद पर कार्य किए। 2007 में विवेकानंद हॉस्पीटल मुरादाबाद में डायरेक्टर रहे। 2011 में आर्मी व एयरफोर्स के दो अफसरों के साथ मिलकर समाज हित की लड़ाई लड़ने के लिए वेट्रन्स फोरम फॉर ट्रांसपरेंसी इन पब्लिक लाइफ संस्थान की स्थापना की। 2012 के बाद इस संस्थान के अध्यक्ष के तौर पर देश के थल सेना अध्यक्ष रह चुके जनरल बीके सिंह रहे। उसके बाद डॉ. बीएनपी सिंह ने देश के कई बड़े मुद्दों को लेकर सुप्रीम कोर्ट व हाईकोर्ट में याचिका दायर की और न्याय भी मिला। वह तमाम मुद्दों की लड़ाई का खर्च वह अपनी पेंशन से करते है। इसमें 60 से अधिक उम्र वाले रिटायर सेना के अफसर हैं।

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