सारण में मां की मौत दो भाइयों को लाई साथ:जायदाद में हिस्सेदारी के लिए एकसाथ दी मुखाग्नि, दोनों भाई कर रहे दाह-संस्कार का कार्य

छपरा2 महीने पहले
मां को मुखाग्नि देते दोनों बेटे।

जमीन जायदाद और बांट बकरे का मामला सदा से ही विवादों से भरा रहा है। लेकिन इसी जमीन जायदाद ने एक बड़े ही रोचक घटना को जन्म दिया है। जो भाई कल तक एक दूसरे की सूरत देखना पसंद नहीं करते थे, आज एक साथ अपनी मां के शव यात्रा में शामिल हुए। लेकिन, इससे भी दिलचस्प बात यह रही कि मां की शव यात्रा भी उनके लिए जमीन जायदाद में बराबर की हिस्सेदारी को लेकर रहा।

मामला छपरा शहर के भगवान बाजार थाना क्षेत्र का है। स्वर्गीय इंद्र देव राय की पत्नी गीता देवी का दाह संस्कार मांझी स्थित नदी घाट पर किया गया। उनके बड़े पुत्र सिंगयेश्वर राय ने उतरी संभाला और मां को मुखाग्नि देने पहुंचे। तब तक उन का छोटा भाई दिनेश्वर राय भी उतरी पहनकर मां को मुखाग्नि देने के लिए तैयार हो गया। जिसके बाद घाट पर दुविधा की स्थिति उत्पन्न हो गई कि दोनों बेटों में मुखाग्नि कौन देगा। सभी लोग सोच रहे थे। तभी बड़े भाई ने मुखाग्नि के लिए घाट कर्मी से अग्नि लिया। वहीं उसके छोटे भाई ने भी मुखाग्नि देने की ठान रखी थी तो उसके द्वारा भी अग्नि लिया गया। जिसके बाद चिता के फेरे लगाने में आगे आगे बढ़ा भाई सिंगेश्वर राय तो पीछे-पीछे छोटा भाई दिनेश्वर राय सहित परिजन चिता भ्रमण के बाद मुखाग्नि दी। जिसके बाद यह चर्चा का विषय बन गया कि कई चिताएं ऐसी जलती है जिन्हें कोई अपना मुखाग्नि देने वाला नहीं होता है, लेकिन जमीन जायदाद में बराबर की हिस्सेदारी को लेकर आज दो बेटों ने अपनी मां की चिता को मुखाग्नि दिया।

मां की फाइल फोटो।
मां की फाइल फोटो।

बड़े बेटे के साथ रहती थी मां

स्वर्गीय गीता देवी अपने बड़े बेटे सिंगेश्वर राय के साथ उसके घर पर रहती थी। उसके पति पुलिस सेवा से सेवानिवृत्त हुए थे, तो कुछ पेंशन उनको मिलता था। उसको लेकर छोटा बेटा पेंशन के लिए कभी-कभी उसे याद कर लिया करता था। मां की मृत्यु के बाद छोटे भाई को लगा कि सारी संपत्ति बड़ा भाई हड़प लेगा इसलिए उसको भी मुखाग्नि देनी चाहिए ताकि उसकी बराबर के हिस्सेदारी का दावेदारी मजबूत रहे। दोनों भाइयों ने मुखाग्नि दी।

बांट-बखरे को लेकर दोनों भाइयों में चलता रहा है विवाद

बता दें कि दोनों भाइयों के पास पुश्तैनी जमीन के नाम पर शहर में घर के साथ शहर एवं रिविलगंज में 4 बीघा जमीन है। हालांकि पूर्व में छोटे भाई के द्वारा अपनी मां से बख्शीशनामा लिखवा लिया गया था। लेकिन, मां को गांव पर अकेले छोड़े जाने के बाद उनका बड़ा बेटा सिंगेश्वर उन्हें उठाकर छपरा शहर स्थित घर पर लाया और कपने साथ रखने लगा। जहां उसकी मां को पश्चाताप हुआ और उसने अपने बख्शीश नामा को गलत साबित करते हुए कोर्ट में रिट दायर कर दी। जिसमें उनके द्वारा बताया गया कि वह जाली कागजात है। जिसके बाद यह मामला कोर्ट में विचाराधीन चल रहा है।