हड़कंप:जिले की कई पंचायतों में लंपी वायरस से सैकड़ों मवेशी बीमार, दर्जनों की हुई मौत

शेखपुराएक महीने पहले
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लंपी वायरस से ग्रसित मवेशी - Dainik Bhaskar
लंपी वायरस से ग्रसित मवेशी
  • किसान के लिए अबूझ पहेली बना बीमारी, इलाज के बावजूद मवेशियों को नहीं मिल रही राहत

लंपी वायरस धीरे-धीरे बिहार राज्य के शेखपुरा जिला में भी फैल चूका है। जिससे पीड़ित होकर जिले के हजारों गोवंश बीमार हो चुकी हैं तो कई दर्जन मवेशी मौत की आगोश में चले गए है। बेबस किसान अपनी बेबस निगाहों से अपने मवेशियों को तड़पते देख रहा है, लेकिन कुछ कर नहीं पा रहा है। नयी बीमारी होने की वजह से पशु चिकित्सक अपनी ओर से मवेशियों का इलाज तो कर रहे है, किन्तु हर दवा बेअसर साबित हो रही है। जानकार पशुपालक लंपी वायरस के लक्षणों को देख कर अपने मवेशी का इलाज तुरंत कराना शुरू कर दे रहें है।

जिससे मवेशी काफी हद तक राहत महसूस करते हैं किन्तु इस वायरस से पीड़ित मवेशियों के इलाज में हो रही देरी की वजह से बीमारी लाइलाज साबित हो रही है। जिससे मवेशी असमय काल की गाल में समां रहें है। जिससे पशुपालकों की चिंता बढ़ी हुई है। वहीं, आश्चर्य की बात है की अब तक जिला पशुपालन विभाग द्वारा न कोई टीकाकरण किया जा रहा है और ना बीमार मवेशियों के इलाज हेतु कोई पहल की जा रही है। जिससे पशुपालक असमंजस की स्थिति में पड़े हुए है की आखिर उनके बीमार पशुओं का इलाज क्या और कैसे होगा। क्योंकि अब तक यह बीमारी जिले में पशुपालकों के लिए अबूझ पहेली बनी हुई है और किसान जानकारी के अभाव में अपने बीमार मवेशियों के इलाज के लिए इधर-उधर भटक रहे है।

गोट पॉक्स वैक्सीन का करें उपयोग
जिले के कृषि विज्ञान केंद्र अरियरी के पशु वैज्ञानिक डॉ.विद्याशंकर सिन्हा ने बताया कि लंपी वायरस से बचाव हेतु किसानों को गोट पॉक्स की वैक्सीन 3 मिली की डोज के अनुसार पशुओं की चमड़ी में देनी चाहिए। चार महीने से नीचे उम्र के मवेशी एवं 8-9 महीने की गर्भवती पशुओं को यह वैक्सीन नहीं देनी है। चिमोकन और मख्खी इस रोग के वाहक होते है। ऐसे में गौशाला में उबाली हुई नीम के पानी का छिड़काव करनी चाहिए एवं साथ में नीम के पानी से ही जख्म की साफ-सफाई करनी चाहिए। किसान चिमोकन एवं अन्य परजीवी जंतुओं से बचाव को लेकर इवरमेक्टिन की दवा का भी उपयोग कर सकते है। लंपी वायरस का इलाज पशु चिकित्सकों की देखरेख में ही होनी चाहिए।

इन गांवों में फैला लंपी वायरस
चेवाड़ा प्रखंड के करंडे, कपासी, घारी, लहना, महेशपुर, एकाढा, सहित अन्य गांव एवं घाटकुसुम्भा प्रखंड के डीहकुसुम्भा, भदौस, दरियापुर, गगौर, माफो, घाटकुसुम्भा एवं पानापुर, बरबीघा प्रखंड के तेउस, केवटी, कुशेढी, सदर प्रखंड के पचना, महसार, लोदीपुर, नेमदारगंज, गवय, अरियरी प्रखंड के भोजडीह, हुसैनाबाद, करकी, चांदी, वृन्दावन और शेखोपुरसराय के नीमी, बडेपुर, भदेली, अस्थना, महानन्दपुर, मोहब्बतपुर पंचायत के खुड़िया समेत जिले के दर्जनों गांव के मवेशी लंपी वायरस की चपेट में आ चुके है। शेखोपुरसराय अंतर्गत खुड़िया गांव के पशुपालक लालजी, मनीष कुमार, चुनचुन सिंह, भाषों सिंह, सुरेन्द्र राम, कपिल राम, योगेश कुमार सहित दर्जनों लोगों ने बताया कि खुड़िया गांव के महज एक टोला में दर्जनों पशु लंपी वायरस की चपेट में हैं और बीमार होकर खाना पीना तक छोड़ चुके है। बीमार पशुओं के लिए पशुपालन विभाग न तो कोई टीका उपलब्ध करवा पा रहा है और न बीमार पशुओं के इलाज के लिए कोई सटीक दवा बता रहा है। जिससे किसान चिंतित दिखाई पड़ रहें है और पशुधन की मृत्यु का शोक मना रहें हैं।

आखिर क्या है लंपी वायरस

जिले में मवेशियों में खास करके गोवंश में उनकी चमड़ी पर गांठ उभर आते है, फिर धीरे-धीरे वह जख्म का रूप धारण कर लेता है। जिसके बाद मवेशी तीव्र बुखार और दर्द से बेचैन हो उठते है। जिसके बाद पशुओं के मुँह से लार टपकती रहती है और मवेशी खाना-पीना बिलकुल छोड़ देते है। यह सामान्यतः लंपी वायरस के लक्षण हैं। किन्तु यह वास्तविक में लंपी वायरस है। यह जांच का विषय है। किन्तु ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालक लंपी वायरस मान कर इलाज करा रहें हैं।

जिले में सभी 17 पशु स्वास्थ्य केंद्रों पर चिकित्सकों के द्वारा लंपी वायरस की चपेट में आये बीमार पशुओं का इलाज किया जा रहा है। साथ ही पशुपालकों को लंपी वायरस से बचाव को लेकर जागरूक किया जा रहा है। हमारी टीम गांव-गांव जाकर पशुओं को एचएसबीक्यू की वैक्सीन लगा रही है। साथ ही क्षेत्रीय निदेशक द्वारा भेजी गयी टीम भी गांवों में जाकर बीमार पशुओं का मुआयना कर रहें है-डॉ.विनय चंद्रयान, जिला पशुपालन पदाधिकारी, शेखपुरा।

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