सामाजिक कुरीति:कम उम्र में ब्याह दी जा रही आधे से अधिक बेटियां, 18 वर्ष से कम में 14% बन रहीं मां

शेखपुरा2 महीने पहले
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  • सरकार की कोशिश के बाद भी समाज में जागरुकता का दिख रहा है अभाव

सरकार की महत्वाकांक्षी योजना बेटी पढ़ाओ, बेटी बचाओ को सफल बनाने के लिए सरकार द्वारा करोड़ों रुपए खर्च किए जा रहे हैं। बाल विवाह में कमी लाने एवं बेटियों को शिक्षित करने के लिए सरकार कई योजनाएं लाई लेकिन जमीनी हकीकत इससे विपरीत है। जिले में आज भी 46.1 प्रतिशत बेटियां 18 वर्ष से कम उम्र में ही ब्याह दी जा रही है। 10.2 प्रतिशत बेटियां 18 वर्ष से कम उम्र में मां भी बन रही है। कम उम्र में शादी के बाद इसमें से अधिकतर लड़कियों कर पढ़ाई तो छूट ही जा रही है। साथ में कम उम्र में मां बनने का असर जच्चा- बच्चा के स्वास्थ्य पर भी पड़ रहा है। वहीं, विशेषज्ञों के अनुसार मातृ-शिशु मृत्यु दर बढ़ने का सबसे बड़ा कारण 18 वर्ष से कम उम्र में नाबालिगों की शादी है। नेशनल फैमिली हेल्थ रिपोर्ट के अनुसार राज्य में बाल विवाह के मामले में शेखपुरा पहले स्थान पर है। हालांकि जारी रिपोर्ट के अनुसार पिछले 05 वर्ष में बाल-विवाह के मामले में करीब 4.7 प्रतिशत की कमी आई है। फिर भी अन्य जिलों के मुकाबले शेखपुरा बाल विवाह में सबसे आगे है। नेशनल फैमिली हेल्थ रिपोर्ट के अनुसार 2015-16 में जिले की 50.08 बेटियों की शादी 18 वर्ष से कम उम्र में हो जाती थी। जिसमें 14.0 प्रतिशत नाबालिग लड़की मां भी बन जाती थी।

ग्रामीण इलाकों में अधिक होता है बाल विवाह
गौरतलब है कि बाल विवाह कानूनन अपराध है। बाल विवाह को रोकने के लिए वर्ष 2006 में बाल विवाह निषेध अधिनियम बनाए गए। बाल विवाह को लेकर लोगों को जागरूक करने के लिए समय-समय पर योजनाएं भी लाई जा रही है। लेकिन जमीन पर इसका कोई असर आज भी नहीं दिख रहा है। आज भी ग्रामीण इलाकों में खुलेआम बाल विवाह होता है। पुलिस जानकारी हाेने पर भी बिना शिकायत के बाल-विवाह के खिलाफ कोई भी कार्रवाई करने से परहेज करती है। हाल के दिनों ऐसे कई मामले सामने आए है जिसमें बाल विवाह की सूचना पुलिस को होती है। लेकिन कोई शिकायत नहीं मिलने के कारण पुलिस वहीं समाजशास्त्री माता पिता का अशिक्षित होना बाल विवाह सबसे बड़ा कारण मानते है।

69.5% माँ व 80.1% 5 वर्ष से कम के बच्चे एनीमिया के शिकार
नेशनल फैमिली हेल्थ रिपोर्ट के अनुसार जिले में 69.5 प्रतिशत महिलाएं एवं80.1 प्रतिशत 05 वर्ष से कम उम्र के बच्चे एनीमिया (रक्ताल्पता) से ग्रसित हैं। वहीं, जन्म के दौरान जिले में प्रति हजार 08 बच्चों की मौत हो जाती है। एनिमिक महिलाओं में 73.9 प्रतिशत से अधिक संख्या 18 वर्ष से कम उम्र में लड़कियों की है। अपर चिकित्सा पदाधिकारी डॉ.अशोक कुमार बताते है 18 वर्ष तक की उम्र शारीरिक विकास के लिए होता है। कम उम्र में लड़कियों का शरीर मां बनने के लिए तैयार नहीं होता है। भ्रूण को विकास के लिए जिन चीजों की आवश्यकता होती है कम उम्र में वह नहीं मिल पाता है। जिससे महिला एवं गर्भ में पल रहे बच्चे का शारीरिक विकास रुक जाता है। 18 वर्ष से कम उम्र में मां बनने वाली ज्यादातर महिलाओं में खून की कमी देखी गई है। पूरा पोषण नहीं मिलने से बच्चे कमजोर व कुपोषित पैदा होते है। कोरोना को लेकर बीते दो वर्ष तक एनीमिया मुक्त भारत कार्यक्रम ठप रहा।

जागरूक करना जिला प्रशासन का काम
बाल विवाह पर रोक लगाने या इसके लिए लोगों को जागरूक करना जिला प्रशासन का काम है। पुलिस को जब भी सूचना मिलती है। कार्रवाई की जाती है। इस वर्ष भी बाल विवाह के कई केस दर्ज हुए है।
-कार्तिकेय के.शर्मा, एसपी।

बाल विवाह रोकने के लिए गठित है टास्क फोर्स
रिपोर्ट के बारे में तो जानकारी नहीं है। बाल विवाह पर रोक लगाने के लिए जिले में टास्क फोर्स गठित है। लोगों को जागरूक करने के लिए पंचायत के मुखिया के साथ बैठक कर बाल-विवाह पर रोक लगाने के लिए दिशा निर्देश दिए जाएंगे।-सावन कुमार, डीएम।

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