कम हुई है बारिश:मात्र दो% किसानों ने ही गिराया धान का बिचड़ा

शेखपुरा2 महीने पहले
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  • पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष जून माह में 92.8 मिलीमीटर कम हुई है बारिश

जिले में मानसून की दस्तक के साथ ही बारिश का दौर शुरू हो चुका है। लेकिन जिले में अभी भी मानसून की रफ्तार धीमी है। रोजाना जिले के किसी न किसी हिस्से में बारिश हो रही है, लेकिन अभी भी मानसून ने जोर नहीं पकड़ा है। पिछले वर्ष के मुकाबले इस बार स्थिति काफी उलट है। क्योंकि खरीफ फसल के लिए कृषि कार्य शुरू होने का नक्षत्र रोहिणी अब समाप्त हो गया है। परंतु किसानों को मूसलाधार बारिश नसीब नहीं हो पाई है। जिले में बारिश तो हो रही है लेकिन यह बारिश किसानों के लिए नाकाफी है।

कम बारिश होने की वजह से अब तक जिले भर में महज दो फीसदी बिचड़ा गिराया जा सका है। आसमान में बादल रहने की वजह से उमस भरी गर्मी से लोगों को परेशानी हो रही है। किसान आसमान की ओर टकटकी लगाए बैठे हैं। जिले में 24 जून तक औसत बारिश मात्र 165.2 मिमी हुई है, जो काफी कम है। पिछले वर्ष जून माह में करीब 258 मिमी बारिश हुई थी। ऐसे में किसान इस सोच में पड़े हैं कि कहीं मानसून ने दगा दे दिया तो फिर क्या होगा। मौसम विशेषज्ञ शबाना ने बताया कि अबतक मानसून ने जोर नहीं पकड़ा है।

अब तक नहरें पड़ी हैं सूखी
शेखपुरा जिले में देर से मानसून के प्रवेश करने और मानसून के दौरान कम बारिश होने की वजह से जिले के सभी नदी व नहर सूखे पड़े है। बारिश कम होने की वजह से जिन नहरों से किसानों को पानी मिलता है, वह सूखी है, जिसकी वजह से अभी तक बिचड़ा भी नहीं गिराया जा सका है। हरोहर नदी से लेकर कई अन्य नदियों में भी काफी कम पानी मौजूद है। किसानों को उम्मीद है जल्द से जल्द नदी के जलस्तर में सुधार होगा।

रोहिणी नक्षत्र में बिचड़ा गिराना आवश्यक माना जाता है
जिले में इस बार लगभग 23 हज़ार हेक्टेयर में धान की खेती करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। धान की बेहतर पैदावार के लिए रोहिणी नक्षत्र में बिचड़ा गिराना आवश्यक माना जाता है। लेकिन बारिश कम होने से बिचड़ा गिराने की गति धीमी है। कम बारिश के बावजूद किसान हतोत्साहित नहीं हुए हैं। किसान उम्मीद लगाए बैठे हैं कि देर से ही सही परंतु मानसून काफी अच्छा रहेगा। इस उम्मीद में धान का बिचड़ा खेतों में गिराने में लगे हैं। जिला कृषि पदाधिकारी शिवदत्त सिन्हा ने बताया कि मानसून में कम बारिश होने की वजह से अबतक महज दो प्रतिशत बिचड़ा गिराया जा सका है।

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