अगस्त क्रांति:अंग्रेजों के सीने पर चढ़कर लहराया था तिरंगा

शेखपुरा2 महीने पहले
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शेखपुरा थाना परिसर में झोपड़ीनुमा ऐतिहासिक थाना - Dainik Bhaskar
शेखपुरा थाना परिसर में झोपड़ीनुमा ऐतिहासिक थाना
  • 16 से 22 साल के युवाओं ने कर दिया था अंग्रेजों को भागने पर मजबूर

स्वंत्रतता आंदोलन में शेखपुरा जिला के युवाओं ने हाथ मे तिरंगा लेकर अपनी भूमिका निभायी थी। वह तारीख आज भी शेखपुरा के लिए ऐतिहासिक तथा यादगार बनी हुई है जब यहां के छात्रों तथा युवाओं की टोली ने अंग्रेज सिपाहियों के सीने पर चढ़कर तिरंगा झंडा लहराया था। वह ऐतिहासिक तारीख 16 अगस्त 1942 की थी। शेखपुरा के छात्रों तथा युवाओं की टोली ने 1942 के अंग्रेजों भारत छोड़ो आंदोलन के तहत किया था। जिला के इतिहास के जानकार बताते हैं कि 16 अगस्त 1942 के इस आंदोलन में शामिल युवाओं की उम्र 16 से 22 साल की थी।

तब शहर के इन युवाओं का जोश देखकर गोरे अंग्रेज सिपाही भाग खड़े हुए थे। युवाओं की यह टोली शहर में बड़ा तिरंगा जुलूस निकाला था। युवाओं ने पहले कटरा चौक स्थित रजिस्ट्री कचहरी के भवन पर तिरंगा फहराया था तथा बाद में आगे बढ़कर शेखपुरा थाना के भवन पर तिरंगा झंडा फहराया था। बाद में अंग्रेजी हुकूमत ने मुंगेर से अतिरिक्त गोरे सिपाहियों को शेखपुरा बुलाकर आंदोलनकारी युवाओं का उत्पीड़न किया था, जिसमें कई को जेल भी जाना पड़ा था तथा कई को महीनों भूमिगत जीवन व्यतीत करना पड़ा था। थाना का वह भवन अभी भी जर्जर स्थिति में यहां मौजूद है जबकि रजिस्ट्री कचहरी के उस ऐतिहासिक भवन को प्रशासन ने कई वर्ष पहले ढाह दिया।

बरबीघा में युवाओं ने डाकघर व डाक बंगला पर फहराया था तिरंगा
जानकर बताते है कि इसी तरह का आंदोलन अगस्त 1942 में जिला के बरबीघा में हुआ था, जहां वहां के जोशीले युवाओं ने डाकघर तथा डाक बंगला के भवन पर तिरंगा झंडा फहराया था। इस आंदोलन में सबसे पहले शहर के पूर्वी छोर पर स्थित मौजूदा महादेव नगर में बड़ी सभा की गई थी। यह सभा लुल्ही बगीचा में आयोजित की गई थी। अब उस लुल्ही बगीचे का अस्तित्व मिट चुका है। अंग्रेजों भारत छोड़ो आंदोलन के तहत शेखपुरा में शुरू हुए आंदोलन में तब डीएम हाई स्कूल के छात्रों की भी बड़ी भूमिका थी। स्कूल एक होस्टल में रहने वाले छात्र इसमें बढ-चढकर हिस्सा लिया था। उन्होंने बताया कि स्वतंत्रता आंदोलन को हवा देने के लिए यहां के युवाओं ने तब पाक्षिक समाचार पत्र आजाद हिंदुस्तान बुलेटिन निकाला करते थे। यह पाक्षिक पत्र हस्तलिखित थी। स्वतंत्रता आंदोलन की शुरुआत जिला में सबसे पहले सदर ब्लाक के हसौड़ी गांव में हुआ था। तब पटना से आकर दो मुस्लिम भाईयों शौकत अली तथा बरकत अली ने 1921 में अपने गांव हसौड़ी में युवाओं की बैठक करके अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ लोगों को खड़ा किया था।

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