इस मां को सलाम:7 साल तक लोगों के ताने सुनते हुए स्मिता ने दिव्यांग बेटी काे चलने लायक बनाया

सीतामढ़ी16 दिन पहले
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बच्चों को पढ़ाती स्मिता वर्मा। - Dainik Bhaskar
बच्चों को पढ़ाती स्मिता वर्मा।
  • दिव्यांग राग का नित्यकर्म कराना, ट्यूशन पढ़ाना और परिवार का खर्च चलाना, इन चुनौतियों से 7 साल जूझी स्मिता, लेकिन नहीं मानी हार, आज उनकी बदौलत चलने लगी दिव्यांग

आज मदर्स डे है, यानी मातृ दिवस। मां न के केवल ममता की प्रतिमूर्ति होती है, बल्कि एक अनुभूति, एक विश्वास, एक रिश्ता भी है। मां मातृत्व की कितनी परिभाषाएं रचती है। स्नेह, त्याग, उदारता और सहनशीलता के कितने प्रतिमान गढ़ती है। ऐसे ही एक मां ने ममता, उदारता व सहनशीलता की मिसाल पेश की है जिसका नाम है स्मिता वर्मा। वह अपनी पहली संतान दिव्यांग बेटी की आपबीती सुनाते हुए भाव विभोर हो जाती है।
समाज की मुख्य धारा से जोड़ने को बनाया लक्ष्य

स्मिता बताती है कि साल 2000 में शहर के वार्ड 18 निवासी सुधीर कुमार वर्मा के साथ परिणय सूत्र में बंधी। एक साल बाद एक बच्ची को जन्म दिया। जिसका नाम राग वर्मा रखा। लेकिन, राग जन्म से आेस्टियो-जनेसिस-इंपरफेक्टा के शिकार हो गई। पहली संतान के रूप में बेटी का जन्म हुआ वह भी दिव्यांग। संबंधी व समाज के लोग भी अच्छी बात नहीं बोलते थे। मैं नन्ही सी बेटी काे निहारती थी और छूप-छूपकर रोया करती थी। लेकिन हिम्मत नहीं हारी। मैं राग को समाज की मुख्य धारा से जोड़ने के लिए कठिन लक्ष्य तैयार की।

पति को नौकरी नहीं मिली बेटी का इलाज कराना था

आेस्टियो-जनेसिस-इंपरफेक्टा के शिकार नन्ही-सी जान राग सात साल तक बेड रेस्ट में ही रही। पति को नौकरी नहीं मिली और बेटी के इलाज के लिए संकट था। एेसे में घर पर ही ट्यूशन पढ़ाना शुरू किया। शहर के डॉक्टर से लेकर फिजियोथेरेपिस्ट तक इलाज कराया लेकिन कोई सुधार नहीं हुआ। राग की दोनों पैर की हड्डियां टेढ़ी और बहुत कमजोर हो गई थी। इसके कारण सात साल में कुल 10 बार इनके पैरों की हड्डियां टूटी। 2013 में जब चेन्नई के एक हॉस्पीटल में राग का ऑपरेशन हुआ तो उनमें कुछ सुधार होने लगा।

मां की बदौलत लगातार राग के 3 ऑपरेशन हुए

मां की बदौलत लगातार तीन ऑपरेशन के बाद आज राग अपने पैरों पर खड़ी हो पा रही है। आज राग इंस्टा क्लासेज के माध्यम से बच्चों को शिक्षित करने में जुटी है। स्मिता घर पर ही ऑफलाइन कोचिंग संचालित कर रही है। स्मिता के पति सुधीर कुमार वर्मा, दूसरी बेटी रक्टिमा वर्मा व तीसरी बेटी इशानी वर्मा मां के कोचिंग में हाथ बंटा रहे हैं। राग को 2016 में राज्यस्तरीय चित्रांकन प्रतियोगिता में प्रथम व संगीत में तृतीय स्थान मिला। 2019 में मैट्रिक में 81% अंक प्राप्त कर जिले की तीसरी टॉपर बनी।

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