आस्था:स्नान ध्यान व कथा सुनने को लेकर नदी किनारे उमड़ी महिलाओं की भीड़

हसनपुरा19 दिन पहले
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जिउतिया पर्व पर स्नान के लिए जुटी महिलाओं की भीड़ । - Dainik Bhaskar
जिउतिया पर्व पर स्नान के लिए जुटी महिलाओं की भीड़ ।

हसनपुरा नगर पंचायत के अलावे प्रखंड क्षेत्र के विभिन्न गांवों में रविवार को अपने पुत्र की दीर्घायु के लिए महिलाओं ने निर्जला जीउतीया का व्रत रखा। जीउतीया की कथा सुनने के लिए विभिन्न गांवों से व्रती महिलाओं का समूह नगर पंचायत के अरंडा स्थित शिवाला घाट व उसरी बुजुर्ग स्थित खुदीदास महाराज घाट स्थित पवित्र वाण गंगा ( दाहा ) नदी के किनारे पहुंचा। यहां काफी संख्या में महिलाओं ने पवित्र नदी में डुबकी लगाई। इस दौरान महिलाओं ने अपने पूर्वजों को नमन किया और व्रत का अनुष्ठान किया। वही देर शाम से समूहों तथा अपने घरों में व्रती महिलाओं ने बांस के डाले में मिष्ठान्न, पकवान, फल व फूल सजा कर चिल्लो सियारों की कथा सुनी। इस दौरान आचार्य वरुण मिश्र, अशोक मिश्र व रविन्द्र पांडेय ने बताया कि इस व्रत को लेकर कई किंवदंती है। कहीं इस व्रत में भगवान सूर्य की पूजा की जाती है, तो कहीं जीमूत-वाहन राजा की पूजा की जाती है। वही चिल्लो सियारों की कथा के बाद महाभारत का एक प्रसंग आता है जिसमें अभिमन्यु की पत्नी उत्तरा के गर्भ की रक्षा के बाद परीक्षित का जन्म हुआ। कहा जाता है कि तभी से यह व्रत चलन में है। जीमूत-वाहन ने गरूड़ से नागवंशियों की रक्षा की थी, जिसके बाद से व्रत प्रचलन में आया। मान्यता है, कि कथा के बाद डाली को पवित्र पात्र से ढंक दिया जाता है। वही सुबह सबसे पहले व्रती महिला की प्रथम संतान ही उस डालिया को खोलेगी, जिसके बाद प्रसाद का वितरण होगा और व्रत का पारण किया जाता है। अपने पुत्र की मंगलकामना के लिए जीवित पुत्रिका व्रत (जिउतिया) शनिवार को नहाय खाय के साथ शुरू हुआ।

जीवित्पुत्रिक व्रत कथा सुनतीं माताएं ।
जीवित्पुत्रिक व्रत कथा सुनतीं माताएं ।

व्रत रखकर मांगी संतान की दीर्घायु

दरौली। संतान की दीर्घायु के लिए दरौली सरयू नदी के तटपर हजारों की संख्या में महिलाओं ने उपवास रह जीवित्पुत्रिका का व्रत पर स्नान किया। वहीं व्रत के माैके पर महिलाओं ने स्नान कर पूजा अर्चना किया। जिसके बाद कथा का श्रवण किया गया। दरौली के पांच मन्दिरा घाट, शिवाला घाट, अमरपुर, नरौली में सरयू नदी में महिलाओं ने स्नान कर पूजा पाठ की। प्रखंड क्षेत्र में पुत्र के लंबी उम्र के लिए मनाया जानेवाला जीउतीया पर्व श्रद्घा के साथ सम्पन्न हो गया। संतान की लंबी आयु के लिए किया जाने वाला जीवित्पुत्रिका या जिउतिया पर्व माताएं ने हर्षोंल्लास के साथ मनाया। माताएं निर्जला व्रत रखी। आश्विन माह कृष्ण पक्ष की सप्तमी से नवमी तिथि तक जिउतिया पर्व मनाया जाता है। इस तीन दिवसीय व्रत में शनिवार को नहाय-खाय के साथ व्रत की शुरुआत हुई। ऱविवार को माताएं खर जितिया यानी निर्जला व्रत रखेंगी। वहीं तीसरे दिन सोमवार को सुबह पारण के साथ यह पर्व संपन्न किया गया । इस व्रत को लेकर महिलाओं ने रविवार को 24 घंटे का निर्जला उपवास रखा और पूजा आर्जना की । महिलाओं ने बिना अन्न जल ग्रहण किये पूजा पाठ कर पुत्र की सलामती एवं उसके लंबे उम्र के लिए भगवान से प्रार्थना की। महिलाओं ने संतानों की सुरक्षा और दीर्घ जीवन के लिए जिउतिया पर्व पर बुधवार को उपवास किया। रविवार को दिन और रात का उपवास 24 घंटों का रहा।

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