सीवान में मवेशियों को सब्जी खिलाने पर मजबूर हुए किसान:बाजार में नहीं बिक रही सब्जियां, चारा के रूप में सब्जी खिलाने रहे किसान

सीवानएक महीने पहले
सब्जियों की बिक्री ना होने पर मवेशियों को चारा के रूप में खिलाता किसान।

सीवान में कभी कमाई के लिए जानी जाने वाली सब्जियों की खेती भी घाटे का सौदा बन रही है। लगातार बढ़ रही मजदूरी और गिरते दामों ने इस वर्ष किसानों की कमर तोड़ दी। कई किसान सब्जी की खेती छोड़ने पर मजबूर हो रहे है। जिले के महाराजगंज प्रखंड के धोबवलिया गांव के सैकड़ों किसान सब्जी की खेती करते है। यहां के किसान हर वर्ष सैकडों एकड़ जमीन में विभिन्न प्रकार की हरे पत्तेदार सब्जियों की खेती करते है। लेकिन इस बार सब्जियों के दामों में गिरावट आने से किसानों को लागत मूल्य भी नहीं मिल रहा है। जिससे सब्जी उत्पादक किसानों में भारी निराशा देखी जा रही है।

सब्जियों के दामों में गिरावट आने से किसानों को लागत मूल्य भी नहीं मिल रहा है।
सब्जियों के दामों में गिरावट आने से किसानों को लागत मूल्य भी नहीं मिल रहा है।

धोबवलिया गांव निवासी सब्जी उत्पादक किसान आकाश कुशवाहा, बिट्टू कुशवाहा, मनीष कुशवाहा, दीपक महतों, नागेंद्र प्रसाद, विकाश प्रसाद, राहुल कुशवाहा ने बताया कि इस बार सब्जियों के दाम 3 रुपये से लेकर 30 रुपए के बीच सिमट कर रह गई है।

थोक भाव

  • लौकी- 3-4 रुपए पीस
  • करेला- 8 रुपये किलो
  • घेवड़ा- 3 रुपये किलो
  • भिंडी- 4 रुपये किलो
  • बरबट्टी- बोरों 3-4 रुपये किलो
  • खीरा- 14-16 रुपये किलो
  • मरीचा- 20 रुपये किलो
  • तरोई- 12 रुपये किलो
  • परवल- 30 रुपये किलो।
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