6 दिनों से 4 शवों को अंतिम संस्कार का इंतजार:सुपौल में हत्या बताकर दोबारा पोस्टमार्टम के लिए अड़ा परिवार, कलेक्टर ने किया मना

सुपौल2 महीने पहले

सुपौल में 6 दिन पहले चार युवकों की मौत हो गई। लेकिन अब तक शवों का अंतिम संस्कार नहीं हुआ है। एक तरफ परिवार मामले को हत्या बताकर दोबारा पोस्टमार्टम के लिए अड़ा है। कलेक्टर ने किया मना कर दिया है और प्रशासन का कहना है कि चारों की मौत सड़क हादसे में हुई है।

मामला बीरपुर थाना क्षेत्र का है और घटना 17 सितंबर के रात की। दरअसल बीरपुर निवासी चारों युवक 17 सितंबर की रात विश्वकर्मा पूजा का मेला देखने जाने की कह कर घर से निकले थे। लेकिन अगली सुबह उनकी मौत की खबर आई। पुलिस अज्ञात वाहन की ठोकर से चारों की मौत बता रही है। वहीं परिजन चारों दोस्तों की हत्या का दावा कर रहे हैं।

परिजनों के दावे को बल इस बात से भी मिलता है कि पुलिस की दुर्घटना वाली थ्योरी अब खुद ही एक मिस्ट्री बन गई है। पुलिस अपनी ही थ्योरी के अनुसार दुर्घटना वाली गाड़ी को तलाशने के लिए एनएच 106 पर बीरपुर भीमनगर के बीच सभी सीसीटीवी फुटेज को खंगालने में जुटी है। 6 दिनों में हाथ कुछ नहीं आया। वहीं मृतकों के परिजन दोबारा पोस्टमार्टम की मांग पर अड़े हैं। बहरहाल इसको लेकर प्रशासन खामोश है और चारों युवकों का शव मधेपुरा के शवगृह में अंतिम संस्कार और न्याय की बाट जोह रहा है।

बता दें कि युवकों की मौत के बाद अगली सुबह ही मचे बवाल को देखते हुए प्रशासन की ओर से खुद जिलाधिकारी मीडिया के सामने आए थे और पुलिस की ओर से बताई गई थ्योरी को साझा किया था।

परिजन कर रहे हत्या का दावा

मृतकों के परिजनों का दावा है कि 17 सितंबर की देर रात युवकों के मोबाइल से उन्हें फोन आया। फोन करने वाले ने खुद को पुलिसकर्मी बताया और मोबाइल धारक के संबंध में जानकारी भी ली। इस क्रम में युवकों की मौत के बारे में भी बताया गया। फोन करने वाले ने कहा कि युवकों का शव सुपौल भेज दिया गया है। परिजनों के अनुसार उनकी अनुपस्थिति में ही सभी का पोस्टमार्टम किया गया। अब उनका आरोप है कि युवकों की हत्या हुई है और पुलिस इसे दबाने के लिए सड़क दुर्घटना बताकर लीपापोती में जुटी हुई है। पुलिस के पास मृतकों से संबंधित किसी भी अस्पताल की कोई पर्ची नहीं है।

घटना के बाद बीरपुर थाना पुलिस ने 17 सितंबर की देर रात ही दो ऑटो पर लादकर चारों शवों को महज एक चौकीदार के भरोसे पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल सुपौल भेज दिया था। अगली सुबह जब शवों का पोस्टमार्टम होना था तो उसके लिए जरूरी कागजी कार्रवाई भी सदर थाना की पुलिस द्वारा की गई। घटना के बाद परिजन और ग्रामीण आक्रोशित हो गए। वीरपुर गोल चौक पर चारों ओर से बेरियर लगाकर सभी ओर से रास्ते को बंद कर दिया और टायर जलाकर आगजनी भी करने लगे थे। आक्रोशित लोगों ने बाजार को भी बंद करवा दिया था। जब पुलिस मौके पर पहुंची तो लोग उग्र हो गए और पुलिस के खिलाफ जमकर नारेबाजी करने लगे। उनका कहना था कि पुलिस ने बिना परिजनों को सूचना दिए ही शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।

अब दोबारा नहीं कराएंगे पोस्टमार्टम
इधर, जिलाधिकारी कौशल कुमार ने स्पष्ट किया है कि युवकों की मौत सड़क दुर्घटना से ही हुई है। लिहाजा प्रशासन शवों का दोबारा पोस्टमार्टम नहीं कराएगी। परिजन अगर शव लेने को तैयार नहीं हुए तो न्यायालय के माध्यम से आगे की प्रक्रिया की जाएगी।

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